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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Nainital News ›   The race to get the '80s look: Be careful before uploading photos

80 के दशक का लुक पाने की होड़: फोटो अपलोड करने से पहले हो जाए सावधान, चेहरा बन सकता है साइबर ठगी का जरिया

Sun, 13 Sep 2026 11:48 AM IST
गायत्री जोशी समीर बिसारिया
समीर बिसारिया Published by: गायत्री जोशी Updated Sun, 13 Sep 2026 11:48 AM IST
सार

80 के दशक के लुक का ट्रेंड लोगों को अपनी तस्वीरें एआई ऐप और वेबसाइट पर अपलोड करने के लिए आकर्षित कर रहा है। साइबर विशेषज्ञों ने अनजान प्लेटफॉर्म पर फोटो साझा करने से सावधान रहने की सलाह दी है।

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The race to get the '80s look: Be careful before uploading photos
साइबर अपराधी। - फोटो : amar ujala

विस्तार

सोशल मीडिया पर 80 के दशक के पुराने लुक में अपनी तस्वीर देखने का शौक कहीं लोगों को भारी न पड़ जाए। एआई के जरिये चेहरे को पुराने जमाने के कपड़े, हेयर स्टाइल और अंदाज में बदलने का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। लोग चंद सेकंड में तस्वीर बदलवाने के लिए अनजान एआई ऐप और वेबसाइट पर अपनी फोटो अपलोड कर रहे हैं। साइबर विशेषज्ञों को आशंका है कि आज मनोरंजन के लिए साझा किया गया चेहरा कल साइबर ठगी का जरिया बन सकता है।

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विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी अनजान एआई प्लेटफॉर्म पर फोटो अपलोड करने से पहले यह जानना जरूरी है कि वह प्लेटफॉर्म फोटो और चेहरे से जुड़े डाटा को किस तरह स्टोर और इस्तेमाल करता है। सोशल मीडिया पर पहले से मौजूद नाम, मोबाइल नंबर, फोटो और अन्य जानकारियों के साथ चेहरे की डिजिटल जानकारी जुड़ जाए तो अपराधियों को किसी व्यक्ति को निशाना बनाने के लिए ज्यादा देर नहीं लगेगी। अब तक लोगों की आवाज एआई के डेटा बैंक में थी लेकिन अब 80 दशक जैसे ट्रेंड वायरल होने के बाद चेहरा भी एआई को मिल चुका है। भविष्य में इससे निजिता व सुरक्षा का खतरा भी मंडराने लगा है।

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पहले आवाज अब चेहरे की बारी

फरवरी 2025 में फ्रांस में एक प्रतिष्ठित मोबाइल कंपनी के वॉइस असिस्टेंट को लेकर शिकायत और जांच कराई गई थी। आरोप था कि वॉइस असिस्टेंट के जरिये रिकॉर्ड हुई कुछ बातचीत में यूजर्स की निजी जानकारियां शामिल थीं। कंपनी ने आरोपों से इनकार करते हुए अपना बचाव किया था। अक्तूबर 2025 में पेरिस अभियोजक कार्यालय में भी इसकी डेटा-हैंडलिंग को लेकर जांच शुरू की गई। आरोप था कि वॉइस असिस्टेंट ने अपने डेटा बैंक से एक व्यक्ति की रिकॉर्डिंग को लीक कर दिया जिससे उनकी आवाज का इस्तेमाल कर विज्ञापन तैयार किए गए।

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खुद एआई ने माना पूरी तरह सुरक्षित नहीं

अमर उजाला ने जब इसकी जांच के लिए चैट जीपीटी से पूछा कि एआई प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड पूरा करने के लिए फोटो साझा करना ठीक है तब उसने जवाब दिया कि इसे पूरी तरह से सुरक्षित कहना सही नहीं है। फोटो साझा करना अपेक्षाकृत कम जोखिम वाला हो सकता है, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि फोटो किस प्लेटफॉर्म पर, किस शर्त पर और किस तरह प्रोसेस की जा रही है। चेहरे की तस्वीर तकनीकी रूप से हमेशा बायोमेट्रिक डाटा नहीं होती, लेकिन अगर उसे चेहरे की पहचान के लिए तकनीकी रूप से प्रोसेस कर फेस-प्रिंट-प्रोफाइल बनाया जाता है, तो वह संवेदनशील बायोमेट्रिक डाटा बन सकती है।

क्या कहते हैं जानकार

एआई एक डेटा स्टोरेज की तरह काम करता है। अपना डेटा बैंक भी बनाता है जो जानकारियां हम उस पर अपडेट करते हैं या साझा करते हैं वह सभी एकत्र होती हैं। वर्तमान में सामान्य जीवन में मोबाइल से लेकर बैंक खातों तक में चेहरे की पहचान, फिंगर प्रिंट और वॉइस कोडिंग का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में आवाज और चेहरे की पहचान अंजान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या प्रॉम्पट के साथ साझा करना भविष्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। -सुमित पांडे, सीओ साइबर, हरिद्वार



ट्रेंड फॉलो करने के चक्कर में लोग अपने चेहरे की पहचान दे रहे हैं। इसकी मदद से साइबर अपराधी कभी भी आपके चेहरे की पहचान का इस्तेमाल कर वारदातों को अंजाम दे सकते हैं। आपके मोबाइल में लगे फेस लॉक को खोलकर निजी डेटा चुरा सकते हैं और गलत इस्तेमाल कर ब्लैकमेल भी कर सकते हैं। -अमित कुमार सैनी, सीओ साइबर, नैनीताल

इस तरह हो सकता है फोटो का इस्तेमाल

- चेहरे की फोटो से आपके नाम पर नकली सोशल मीडिया अकाउंट बनाया जा सकता है।

- किसी अन्य वीडियो पर लगाकर भ्रामक या आपत्तिजनक सामग्री बनाई जा सकती है।

- चेहरे और आवाज की नकल कर परिचित बनकर पैसे मांगने की कोशिश हो सकती है।

- फोटो में एआई से बदलाव कर धमकाने या ब्लैकमेल करने का प्रयास किया जा सकता है।

- पहचान का इस्तेमाल रिश्तेदारों व दोस्तों का भरोसा जीतकर ठगी में किया जा सकता है।

- फोटो व अन्य जानकारियां जोड़कर आपकी डिजिटल प्रोफाइल तैयार की जा सकती है।

- फोटो से पहचान आधारित धोखाधड़ी के प्रयासों में किया जा सकता है।

- चेहरे को किसी उत्पाद, बयान या गतिविधि के साथ जोड़कर भ्रामक सामग्री बनाई जा सकती है।

 

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