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UK: कैमरे में जिस स्थान पर पहले कैद हुआ वही माना जाएगा बाघ का क्षेत्र, पढ़ें पूरी खबर

Sat, 04 Jul 2026 07:18 AM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, रामनगर
अमर उजाला नेटवर्क, रामनगर Published by: Heera Updated Sat, 04 Jul 2026 07:18 AM IST
सार

सीटीआर समेत आसपास के वन प्रभागों में कैमरा ट्रैप के माध्यम से हुई बाघों की गणना का डाटा अब विश्लेषण के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून भेज दिया गया है। संस्थान वैज्ञानिक तरीके से सभी तस्वीरों का मिलान कर अंतिम बाघ गणना तैयार करेगा।

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The place where the camera first captures the tiger will be considered its territory in ramnagar
बाघ

विस्तार

रामनगर कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) समेत आसपास के वन प्रभागों में कैमरा ट्रैप के माध्यम से हुई बाघों की गणना का डाटा अब विश्लेषण के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) देहरादून भेज दिया गया है। संस्थान वैज्ञानिक तरीके से सभी तस्वीरों का मिलान कर अंतिम बाघ गणना तैयार करेगा।

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इस साल एनटीसीए की ओर से बाघों की गणना कराई गई। इसके बाद अब कैमरा ट्रैप में आई तस्वीरों को डब्ल्यूआईआई को भेज दिया गया है। गणना के दौरान एक ही बाघ अपने क्षेत्र से निकलकर दूसरे वन प्रभाग या टाइगर रिजर्व में भी पहुंच जाता है। ऐसे में अलग-अलग कैमरा ट्रैप में उसकी तस्वीरें रिकॉर्ड हो जाती हैं। इस स्थिति में एक ही बाघ की दो बार गिनती न हो इसके लिए विशेष प्रक्रिया अपनाई जा रही है।

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वैज्ञानिक विश्लेषण के दौरान संबंधित बाघ पहली बार जिस कैमरा ट्रैप में रिकॉर्ड हुआ होगा उसे उसी वन क्षेत्र का बाघ माना जाएगा। इसके बाद अन्य स्थानों पर मिली उसकी तस्वीरों को उसी बाघ का मूवमेंट मानते हुए अलग से गिनती में शामिल नहीं किया जाएगा। इससे बाघों की वास्तविक संख्या का सटीक आकलन का पता चल सकेगा।

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रामनगर वनप्रभाग में मिले 93 बाघ

जानकारी के अनुसार वर्ष 2022 में हुई गणना में रामनगर वनप्रभाग में 67 बाघों की उपस्थिति मिली थी। इसके बाद इस वन प्रभाग में पहली बार फेस फोर के अंतर्गत बाघों की गणना की गई। इस दौरान वनप्रभाग में 93 बाघों की उपस्थिति मिली थी। माना जा रहा कि इस दौरान सीटीआर से सटे इलाकों के बाघ भी शामिल हो गए थे। अब हो रही एनटीसीए की गणना में सटीक आंकड़े सामने आने की उम्मीद है।

वनप्रभागों की सीमाओं पर एक साथ लगाए कैमरे
सीटीआर से मिली जानकारी के अनुसार वन प्रभागों और टाइगर रिजर्व में एक ही बाघ की गिनती दोबारा ना हो इसके लिए सीटीआर की सीमा से सटे वनप्रभागों में एक ही समय पर कैमरा ट्रैप लगाकर गिनती की गई।

बाघ की गणना का डाटा डब्ल्यूआईआई को भेज दिया गया है। संस्थान कैमरा ट्रैप की सभी तस्वीरों का वैज्ञानिक विश्लेषण करेगा। यदि एक ही बाघ अलग-अलग क्षेत्रों में रिकॉर्ड हुआ है तो जिस कैमरा ट्रैप में उसकी पहली तस्वीर दर्ज होगी उसी वन प्रभाग का बाघ माना जाएगा। इससे सटीक आंकड़ों के सामने आने की उम्मीद है। - डॉ. साकेत बडोला, निदेशक, सीटीआर
 

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