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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Nainital News ›   The patient returned from OT without operation

बिना ऑपरेशन के ओटी से मरीज को लौटाया

Thu, 01 Sep 2016 11:41 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो हल्द्वानी
अमर उजाला ब्यूरो हल्द्वानी Updated Thu, 01 Sep 2016 11:41 PM IST
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सुशीला तिवारी अस्पताल में कुछ विभागों की मनमानी के आगे एसटीएच प्रशासन भी घुटने टेक चुका है। एक मरीज को ऑपरेशन के लिए दो घंटे तक आपरेशन थियेटर में रखने के बाद बिना ऑपरेशन के बाहर भेज दिया गया।

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वेंटीलेटर न होने की बात कहकर ऑपरेशन से पल्ला झाड़ लिया गया। एनेस्थीसिया विभाग की मनमानी के चलते न्यूरो के ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। जिलाधिकारी, एसडीएम, मेडिकल कालेज के प्राचार्य और एसटीएच के एमएस से मामले की शिकायत की गई है।
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अल्मोड़ा निवासी दीवान सिंह बिष्ट को गर्दन में चोट लग गई थी। बिष्ट को 20 अगस्त को सुशीला तिवारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। गर्दन में चोट के कारण न्यूरो सर्जन डॉ. दीपक पंवार को ऑपरेशन करना था।
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बिष्ट के भतीजे दीपक बिष्ट ने बताया कि 29 अगस्त को ऑपरेशन के लिए 50 हजार रुपये का सामान मंगा लिया। मरीज को ऑपरेशन थियेटर में ले गए और दो घंटे बाद बिना ऑपरेशन के बाहर भेज दिया।

दीपक ने बताया कि एनेस्थीसिया विभाग की आपत्ति के बाद सर्जन ने आपरेशन करने से मना कर दिया। दीपक का आरोप है कि ऑपरेशन के लिए लाई गई 50 हजार रुपये की दवाओं में लगभग डेढ़ हजार रुपये की दवाएं एवं अन्य सामान ओटी में निकाल लिया गया।

दवाएं और सामान मांगने पर देने से मना कर दिया। दीपक ने बताया कि वेंटीलेटर न होने की बात कहकर ऑपरेशन से मना किया गया, जबकि दो खाली हुए वेंटीलेटर दूसरे मरीजों को दे दिए गए। मामले की शिकायत मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा और एमएस डॉ. एके पांडे से की है।

दीपक ने अपने चाचा दीवान सिंह बिष्ट को इलाज के लिए एक निजी चिकित्सालय में भर्ती कराया है। इधर, कांग्रेस आईटी विभाग के जिला उपाध्यक्ष इंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि बुधवार को ऑपरेशन के संबंध में एमएस डॉ. एके पांडे से मिलने का प्रयास किया गया मगर चतुर्थ श्रेणी कर्मी ने मीटिंग की बात कहकर अंदर जाने से मना कर दिया।

लगभग पौने चार बजे ऑपरेशन न होने के बारे में पूछा तो एमएस ने जानकारी देने से मना कर दिया और कमरे से धक्का बाहर निकाल दिया। बिष्ट ने मामने की शिकायत जिलाधिकारी और एसडीएम से की है।


मरीज का ब्लड प्रेशर और पल्स रेट अधिक थी। इसके चलते ऑपरेशन थियेटर से वापस भेजना पड़ा। मरीज को वेंटीलेटर की जरूरत पड़ सकती थी और वेंटीलेटर खाली नहीं था। किसी को भी धक्का देकर कमरे से बाहर नहीं निकाला गया।

- डॉ. एके पांडे, एमएस, सुशीला तिवारी अस्पताल 

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