Haldwani: तराई में बरसेंगे सीड बम, फूटेंगी हरियाली की कोपलें; 15 को चलेगा विशेष अभियान, ऐसे किया जाता है तैयार
तराई पूर्वी वन प्रभाग पौधों की पारंपरिक रोपाई के बजाय बीज बम के जरिये हरियाली की एक नई क्रांति की ओर बढ़ चला है। तीन साल पहले की गई पहल के सकारात्मक परिणाम आने के बाद अब शासन के निर्देश पर विशेष अभियान चलाया जाएगा।
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तराई पूर्वी वन प्रभाग पौधों की पारंपरिक रोपाई के बजाय बीज बम के जरिये हरियाली की एक नई क्रांति की ओर बढ़ चला है। तीन साल पहले की गई पहल के सकारात्मक परिणाम आने के बाद अब शासन के निर्देश पर विशेष अभियान चलाया जाएगा। 15 जुलाई को वन प्रभाग के 18 हेक्टेयर क्षेत्र में बीज बम बरसाने की तैयारी है।
वन अनुसंधान ने वर्ष 2023 में बीज बम का कांसेप्ट दिया था। इसके बाद इस बीज बम को तैयार कर ड्रोन के जरिये दुर्गम जंगलों में फेंका गया था। तीन साल विभागीय पड़ताल में जंगल बढ़ा मिला। अब अभियान चलाकर एक बार फिर इसी तर्ज पर वनों को बढ़ाने की कवायद तेज हाे चुकी है। शासन इसके लिए बुधवार से ही अभियान शुरू कर चुका है।
आज से तैयार होंगे बीज
शासन के निर्देश पर 11 जुलाई को बीज बम बनाए जाएंगे। 12 जुलाई को चयनित जगह को अंतिम रूप दिया जाएगा। 13 और 14 जुलाई को बीज बम को सुखाने का काम होगा। 15 जुलाई को बीज बम को चयनित स्थानों पर डालने का काम होगा।
ऐसे किया जाता है तैयार
वर्मी कंपोस्ट और मिट्टी को बराबर मात्रा में पानी में मिलाया जाता है। फिर इसे पॉटिंग क्ले की लोई में रखकर सुखाया जाता है। बीज बम में जामुन, आम, नीम, कुसुम के बीजों का प्रयोग किया जा रहा है ताकि वन्यजीवों को जंगल में ही भोजन मिल सके।
ऐसे काम करता है बीज बम
वनाधिकारियों के अनुसार मिट्टी और वर्मी कंपोस्ट से बना यह बम (गोला) नमी मिलते ही टूटने लगता है। गोले के अंदर रखे बीज को पनपने के लिए खाद, मिट्टी, पानी तीनों मिलते हैं। इससे बीज अंकुरित होकर पौधा बनकर बिना शोर किए हरियाली की गूंज छोड़ जाएगा।
प्रभाग के नौ रेंजों में दो-दो हेक्टेयर जंगल का चयन कर लिया गया है। इन जगहों पर पौध रोपण होना है। यहां बीज बम के जरिये जंगल बढ़ाया जाएगा। सभी रेंज के वनाधिकारी को तैयारियां करने का निर्देश दिए जा चुके हैं। - हिमांशु बागरी, डीएफओ-तराई पूर्वी वन प्रभाग