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Haldwani: बिना दवा टेंशन में मरीज, झोलाछाप भी सेहत पर भारी...इतने लोगों का सरकारी अस्पताल में चल रहा है इलाज

Fri, 03 May 2024 09:08 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल Published by: हल्द्वानी ब्यूरो Updated Fri, 03 May 2024 09:08 AM IST
सार

नैनीताल जिले के सरकारी अस्पतालों से लेकर बाजार तक टीबी की दवा का संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में टीबी मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। 

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TB medicine crisis, patients worried
प्रतीकात्मक।

विस्तार

नैनीताल जिले के सरकारी अस्पतालों से लेकर बाजार तक टीबी की दवा का संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में टीबी मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अलबत्ता स्वास्थ्य विभाग की ओर से मरीजों के लिए दवाओं की वैकल्पिक व्यवस्था कर उनका इलाज किया जा रहा है।

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चिकित्सकों के मुताबिक कई तरह की टीबी होती है। इसमें सामान्य टीबी होती है। अगर रोगी दवा खाना छोड़ दे तो दवा के प्रति रजिस्टेंस कम हो जाती है। इसे मल्टी ड्रग रजिस्टेंस (एमडीआर) कहते हैं। वर्तमान में एमडीआर की दवा तो विभाग के पास उपलब्ध है लेकिन सामान्य टीबी की नहीं है। जिले में लगभग 1700 लोगों का टीबी संबंधी इलाज सरकारी अस्पतालों में चल रहा है। राजकीय मेडिकल कॉलेज के टीबी व चेस्ट रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. आरजी नौटियाल का कहना है कि लगभग 20 दिनों से टीबी की सामान्य दवाओं का संकट बना हुआ है। उन्होंने बताया कि पहले टीबी की अलग-अगल चार तरह की दवा आती थीं लेकिन अब एक ही गोली में चार तरह की दवा मिलाकर आती है। इससे मरीज को सहूलियत होती है। यह दवा उपलब्ध नहीं हो पा रही है। ऐसे में टीबी की अलग-अलग तरह की दवाओं के माध्यम से मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
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इधर जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. राजेश ढकरियाल का कहना है कि रुद्रपुर स्थित स्टोर से डिमांड के अनुसार दवा उपलब्ध नहीं हो पा रही है। स्टोर से उपलब्धता के आधार पर मरीजों को दवा उपलब्ध कराई जा रही है। अन्य वैकल्पिक प्रयासों से भी मरीजों का इलाज किया जा रहा है जिससे मरीजों का इलाज संबंधी कोर्स प्रभावित न हो।
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क्या कहते हैं दवा विक्रेता
रामपुर रोड स्थित दवा विक्रेता हसीब का कहना है कि एक हफ्ते से टीबी की दवा उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इसके चलते मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दवा विक्रेता संदीप जोशी का कहना है कि पिछले काफी समय से टीबी मरीजों का इलाज सरकारी अस्पतालों के माध्यम से ही हो रहा है। लिहाजा मेडिकल स्टोर स्वामियों ने टीबी की दवा रखना बंद कर दिया है। कुछ विक्रेता इस दवा को रखते थे, वहां भी पिछले कुछ समय से दवा की कमी बनी हुई है। जल्द ही पर्याप्त दवा उपलब्ध होने के साथ स्थितियां सामान्य हो जाएंगी।

रेगुलर लेनी पड़ती है दवा
डाॅ. आरजी नौटियाल टीबी की दवा एक बार शुरू होने पर इसे रेगुलर लेना पड़ता है। दवा का सेवन न करने से मल्टी ड्रग रजिस्टेंट टीबी बन सकती है।

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