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हिमालयन स्टोन क्रशर में हंगामा, मारपीट 

Fri, 08 Sep 2017 02:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो हल्द्वानी
अमर उजाला ब्यूरो हल्द्वानी Updated Fri, 08 Sep 2017 02:14 AM IST
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Stone Crusher
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हल्द्वानी/हल्दूचौड़।  प्रदूषण की जांच के लिए केंद्रीय टीम के पहुंचने पर हिमालयन स्टोन क्रशर में बृहस्पतिवार को हंगामा हो गया। नौबत दो पक्षों के बीच मारपीट तक जा पहुंची थी। मौके पर पुलिस बल को भी बुलाया गया। केेंद्रीय टीम ने बताया कि रिपोर्ट 12 सितंबर को राष्ट्रीय हरित अभिकरण को सौंपी जाएगी। 

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राष्ट्रीय हरित अभिकरण ने एक याचिका पर फैसला करते हुए मोती नगर स्थित हिमालय स्टोन क्रशर और स्टोन इंडस्ट्री को शाम छह बजे से सुबह सात बजे तक संचालन बंद रखने के निर्देश दिए थे। साथ ही केंद्रीय व क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को वायु प्रदूषण की जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए थे।
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दिल्ली से सीपीसीबी की टीम बुधवार की देर रात हल्द्वानी पहुंची। टीम को क्रशर में 16 घंटे हवा के नमूने लेने थे इसलिए देर रात हवा के नमूने लिए गए। इसके बाद बृहस्पतिवार को सुबह फिर टीम पहुंच गई। टीम ने सुबह से शाम तक अलग-अलग समय के अंतर पर नमूने भरे। टीम ने क्रशर में रेता, बजरी के स्टाक, क्रशिंग, सफाई, धुलने गाड़ियों में भरने आदि की कार्रवाई का निरीक्षण किया। 
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टीम के पहुंचने की खबर लगते ही क्रशर से सटे ग्रामीण इलाकों के लोग भी पहुंच गए। उन्होंने क्रशर पर ध्वनि, वायु प्रदूषण फैलाने का आरोप लगाए। लोगों का कहना था कि एनजीटी के आदेश के बाद भी रात को लोडिंग व अनलोडिंग की जाती है।

टीम आने की सूचना पर टैंकर से छिड़काव किया जा रहा है जबकि आम दिनों में धूल से जीना मुहाल हो जाता है। उन्होंने क्रशर को बंद करने की मांग की। इधर, क्रशर के समर्थन के ग्रामीण भी पहुंच गए और उन्होंने मानकों के अनुसार ही क्रशर संचालन की बात कही।

इसको लेकर दोनों में जमकर बहस हो गई। पक्ष-विपक्ष ग्रामीणों ने जमकर हंगामा काटा इससे सीपीसीबी टीम को जांच करना मुश्किल हो गया। टीम के सदस्यों ने बताया कि 12 सितंबर तक जांच रिपोर्ट एनजीटी को सौंपेंगे। इस दौरान डीके जोशी क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी आदि मौजूद थे। 

ग्रामीणों ने दिखाया राख का भंडार
हल्द्वानी। ग्रामीणों ने सीपीसीबी की टीम को क्रशर परिसर में ही एक विशालकाय गड्ढे में राख का ढेर दिखाते हुए कहा कि टीम की वजह से ऊपर से रेता बजरी डाल दिए गए हैं, फिर भी राख की मोटी परत दिखाई दे रही थी। उनका आरोप था कि रेता में राख मिलाने के साथ गड्डे भरने में इस्तेमाल किया जाता है। 


मशीनों की आवाज से घरों में आई दरारें
हल्द्वानी। क्रशर के पीछे से सटे फत्ता बंगर के ग्रामीणों ने बताया कि क्रशर में जब दो-तीन मशीनें एक साथ चलती है तो घर कांपने लगते हैं हालत यह है कि हर घर के लिंटर, दीवारों में दरार आ जाती है। वहीं नवजात शिशु, बच्चों, बुजुर्गों को दिल घबराने जैसी बीमारियां हो जाती है। उन्होंने एक सुर में कहा कि क्रशर ने सरकारी गूलों पर भी कब्जा कर लिया है इसकी वजह से खेती नहीं होती है। अगर क्रशर नहीं हटाया गया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।

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