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शरई कानून में बदलाव बर्दाश्त नहीं

Sat, 05 Nov 2016 12:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो हल्द्वानी
अमर उजाला ब्यूरो हल्द्वानी Updated Sat, 05 Nov 2016 12:55 AM IST
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Sharia law changes does not tolerate
शरई कानून में बदलाव बर्दाश्त नहीं - फोटो : अमर उजाला

तीन तलाक और कॉमन सिविल कोड के मुद्दे पर हल्द्वानी में शुक्रवार को उलेमा-ए-अहले सुन्नत की कयादत में जुलूस निकाला गया। उसके बाद राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा। उलेमा ने केंद्र सरकार पर मौलिक अधिकारों के हनन करने का आरोप लगाते हुए स्पष्ट कहा कि शरई कानून में कोई भी बदलाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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जुमे की नमाज के बाद सभी क्षेत्रों के लोग ताज चौराहे पर एकत्र हुए। यहां हुई सभा में जामा मस्जिद के पेश इमाम मुफ्ती शाहिद रजा, मुफ्ती नईमुद्दीन, मौलाना सय्यद इरफान रसूल, कारी अब्दुल हसन आदि ने खिताब किया।
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कहा कि भारतीय संविधान में सभी समुदायों को अपने धार्मिक मामलों को अपने धर्म के अनुसार मानने का अधिकार दिया गया है, लेकिन केंद्र सरकार मौलिक अधिकारों का हनन कर रही है।
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भाजपा के सत्ता में आने के बाद से ही कभी लव जेहाद तो कभी गौ हत्या, घर वापसी जैसे मुद्दों पर सांप्रदायिक नफरत फैलाने का काम किया जा रहा है। विकास में पिछड़ी केंद्र सरकार ने अब अपनी नाकामी को छिपाने के लिए तीन तलाक और कॉमन सिविल कोड जैसे मुद्दे उछालकर बेजरूरत बहस शुरू कर दी है, जिससे लोगों में आक्रोश पनप रहा है।

कहा, शरई कानून में बदलाव किसी भी सूरत में मंजूर नहीं। कुरान और हदीस में हर मसले का हल है, इसलिए इसमें कोई बदलाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही यह भी कहा कि मुसलमानों की हमदर्द होने का दावा करने वाली देश की सियासी पार्टियों ने इस मामले में साथ नहीं दिया तो उनका सामूहिक रूप से बायकाट किया जाएगा।

सभा के बाद हजारों की तादाद में लोग जुलूस लेकर मीरा मार्ग, सिंधी चौराहा होते हुए एसडीएम कोर्ट पहुंचे। वहां जामा मस्जिद के इमाम मुफ्ती शाहिद रजा ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट केके मिश्रा को सौंपा।

इस मौके पर मौलाना अब्दुल गफूर नईमी, मौलाना मोहम्मद अकरम इसहाकी, मुफ्ती नईम अजहरी, मौलाना शाहिद रजा, मौलाना जाहिद रजा, कारी मोहम्मद बाबर अली, मौलाना अहमद रजा, मौलाना जलीस अहमद, दर्जा मंत्री अब्दुल मतीन सिद्दीकी, सुहेल सिद्दीकी, बसपा प्रत्याशी शकील अहमद, जरियाब सिद्दीकी, हाजी अब्दुल वाजिद, रईसुल हसन, हसनेन रजा खतीबी, जमीर अहमद, शोएब सिद्दीकी, शानू खान, अखलाक खां, सुल्तान पाशा, शकील सलमानी आदि मौजूद थे।

बार-बार हुई शांति की अपील
उलेमा ने स्पष्ट कर दिया था कि जुलूस ताज चौराहे से एसडीएम कोर्ट तक शांतिपूर्वक ले जाया जाएगा। इसलिए बार-बार लोगों से शांति की अपील की जाती रही। इस दौरान लोग हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर चल रहे थे।

जुलूस से वापसी में भी उलेमा ने शांतिपूर्वक घर लौटने को कहा। जुलूस के बाद पुलिस-प्रशासन ने राहत की सांस ली। इस बीच सीओ एएस ह्यांकी के नेतृत्व में बनभूलपुरा, काठगोदाम और मुखानी थाने समेत शहर भर की पुलिस फोर्स तैनात रही।

108 एंबुलेंस को दिया रास्ता

जुलूस के दौरान एसडीएम कोर्ट के बाहर लोगों की भीड़ जुटने से एक तरफ का ट्रैफिक पूरी तरह जाम हो गया था। इस बीच 108 एंबुलेंस आई तो लोगों ने रास्ता बनाकर 108 को निकाला।

शरई मुद्दे पर भी वोटों की सियासत
विधानसभा चुनाव करीब है। ऐसे में सियासी प्रतिनिधि अल्पसंख्यकों को लुभाने का कोई भी मौका हाथ से नहीं जाने देना चाहते। शरई मुद्दे पर निकाले गए जुलूस में भी ऐसा ही दिखाई दिया।

चूंकि बसपा से शकील अहमद का टिकट फाइनल हो चुका है। सपा से शोएब सिद्दीकी ने टिकट के लिए दावेदारी ठोकी है। सपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए अब्दुल मतीन सिद्दीकी भी अपना जनाधार जुटाने में लगे हैं।


इनके अलावा आम आदमी पार्टी और उक्रांद कार्यकर्ता भी जुलूस में शामिल थे। सभी आगे निकलने और चेहरा दिखाने की होड़ में लगे थे। कई बार तो वे व्यवस्था सुधारने के नाम पर उलेमा से आगे निकल गए। एसडीएम कार्यालय परिसर में भी वे सभी से मिलते-मिलाते दिखे।

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