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एमबीपीजी कॉलेज में दाखिले को लेकर बवाल

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sat, 13 Nov 2021 01:48 AM IST
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Ruckus regarding admission in MBPG college
हल्द्वानी। स्नातक प्रथम वर्ष में प्रवेश से वंचित सभी छात्रों को दाखिले दिए जाने की मांग को लेकर एमबीपीजी कॉलेज में शुक्रवार को बवाल हो गया। आठ घंटे तक कॉलेज परिसर में अराजकता का माहौल रहा। गुस्साए छात्रों ने प्रवेश प्रक्रिया जबरन बंद करवाने के साथ ही कॉलेज के दफ्तर और कक्षाएं बंद करवा दीं, परीक्षा विभाग में तोड़फोड़ की।
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दो छात्र डीजल लेकर कॉलेज की तीसरी मंजिल की छत पर चढ़ गए और आत्मदाह करने की कोशिश की। इससे कॉलेज परिसर में भगदड़ मच गई। एक छात्र की जहर खाने की धमकी से बवाल बढ़ गया। प्राचार्य कक्ष के सामने बवाल कर रहे छात्रों को पुलिस ने लाठियां बरसाकर खदेड़ा तो वे कॉलेज के मुख्य गेट पर धरने पर बैठ गए। छात्रों ने सीओ की गाड़ी को कॉलेज में अंदर आने से रोक दिया। इस पर पुलिस को फिर छात्रनेताओं पर हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। छात्रों ने नेशनल हाईवे पर जाम लगा दिया। पुलिस की लाठियों से एक दर्जन से अधिक छात्र चोटिल हो गए। एक छात्र गौरव सम्मल को उसके साथियों ने निजी अस्पताल में भर्ती कराया। बाद में गुस्साए छात्रों ने प्राचार्य को कक्ष में ही बंधक बना दिया और तीन घंटे बाद शाम पांच बजे मुक्त किया।
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कॉलेज परिसर में शुक्रवार को बीए प्रथम वर्ष में ऑफलाइन प्रवेश आवेदन फॉर्म जमा कराने के लिए सुबह छह बजे से हजारों छात्र-छात्राओं की कतारें लग गईं थीं। सुबह आठ बजे कॉलेज का गेट खुला तो छात्रों का हुजूम कॉलेज परिसर में घुस गया। प्राचार्य के पहुंचने पर सुबह करीब नौ बजे कुछ छात्र नेता उनके कक्ष में पहुंचे और सभी को दाखिला देने की मांग करने लगे, लेकिन प्राचार्य ने सीटों के सापेक्ष ही प्रवेश दिए जाने की बात कह कर असमर्थता जता दी। इस पर प्राचार्य और छात्रों के बीच नोकझोंक हो गई। गुस्साए छात्रनेताओं ने प्राचार्य कक्ष से बाहर नारेबाजी कर हंगामा शुरू कर दिया। इसके कुछ देर बाद गुस्साए छात्रों ने कॉलेज में प्रवेश प्रक्रिया बंद करवाने के साथ ही दफ्तर बंद करवा दिया।
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परीक्षा विभाग में काम होता देख भड़के छात्रों ने कंप्यूटर पर कुर्सियां पटक दीं और तोड़फोड़ कर दी। कई बार कॉलेज परिसर में भगदड़ मची। इसके बाद बवाल इतना बढ़ा कि दो छात्र कॉलेज की छत पर डीजल लेकर चढ़ गए और आत्मदाह करने की कोशिश करने लगे जिन्हें प्राध्यापक डॉ. विनय जोशी और डॉ. सीएस नेगी ने छात्रों की मदद से रोका और डीजल की बोतल छीन ली। इसके बाद गुस्साए छात्रों ने प्राचार्य कक्ष के सामने बवाल शुरू कर दिया। एनएसयूआई जिलाध्यक्ष विशाल सिंह भोजक और उनके समर्थकों की पुलिस से झडप हो गई। बवाल बढ़ने पर पुलिस ने छात्रों पर लाठियां बरसाकर उन्हें खदेड़ दिया। दोपहर साढ़े 12 बजे सीओ पहुंचे तो गेट पर धरना दे रहे छात्रों ने सीओ की गाड़ी अंदर नहीं घुसने दी जिस पर पुलिस को फिर हल्का बल प्रयोग कर छात्रों को हटाना पड़ा। दोपहर करीब एक बजे सिटी मजिस्ट्रेट ऋचा सिंह, एसपी सिटी डॉ. जगदीश चंद्र, सीओ सिटी शांतनु पाराशर ने कॉलेज में प्राचार्य से वार्ता करने के बाद छात्रों को शांत करने की कोशिश की। अपराह्न करीब डेढ़ बजे एसपी सिटी की गाड़ी के माइक से प्राचार्य डॉ. बीआर पंत ने छात्रों को प्रवेश प्रक्रिया के बारे में जानकारी देने की कोशिश की मगर गुस्साए छात्रों ने एक नहीं सुनी। जिस पर प्रशासन के अधिकारी वापस चले गए।
प्राचार्य को बंधक बनाया
हल्द्वानी। एबीवीपी के गुस्साए छात्रों ने करीब दो बजे प्राचार्य डॉ. पंत को कक्ष के अंदर बंधक बना दिया और बाहर से अपने ताले डाल दिए। उनके साथ कई प्राध्यापक भी अंदर बंद हो गए। छात्रनेता प्राचार्य से इस बात से नाराज थे कि पुलिस ने कॉलेज के अंदर किसके कहने पर छात्रों पर लाठियां बरसाईं। तीन घंटे बाद शाम पांच बजे बाद प्राचार्य को छात्रों ने मुक्त किया।
प्रभारी प्राचार्य डॉ. बीआर पंत का कहना है कि पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर बीए में प्रवेश के लिए ऑफलाइन आवेदन फॉर्म जमा होने थे लेकिन आवेदन फॉर्म जमा होने की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही छात्रनेताओं ने बवाल शुरू कर दिया। परीक्षा में तोड़फोड़ की। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस प्रशासन को सूचित करना पड़ा। छात्रनेता सभी को दाखिला देने की मांग कर रहे हैं जो संभव नहीं है। सीटों से अधिक प्रवेश नहीं दिए जा सकते। कॉलेज में बवाल करने और आत्मदाह की कोशिश करने, तोड़फोड़ करने के मामले में छह छात्रनेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए पुलिस को तहरीर दी है।

एसपी सिटी डॉ. जगदीश चंद्र का कहना है कि महाविद्यालय में बवाल कर छात्रों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठियां फटकारनी पड़ीं। कॉलेज प्रशासन से वार्ता कर छात्रों को समझाने की कोशिश की गई लेकिन छात्र नहीं माने। महाविद्यालय प्रशासन ने पुलिस की मदद मांगी थी जिस पर फोर्स भेजी गई। छात्रों का आंदोलन चलने तक फोर्स तैनात रहेगी।
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