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हिमालय दिवस: हर साल विश्व के ग्लेशियरों से पिघल रही है 20 हजार टन बर्फ, पर्यावरण असंतुलन ने बढ़ाई चिंता

Wed, 09 Sep 2026 01:22 PM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़
अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़ Published by: Heera Updated Wed, 09 Sep 2026 01:22 PM IST
सार

पर्यावरण असंतुलन और मानवीय दबाव के चलते हिमालयी ग्लेशियरों से बर्फ पिघलने की रफ्तार तेज हो गई है। वैज्ञानिकों ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि विश्व के ग्लेशियरों से हर साल 20 हजार टन बर्फ पिघल रही है, जिससे ग्लेशियर तेजी से गायब हो रहे हैं।

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Every year 20 thousand tons of ice is melting from the world glaciers
हिमालय - फोटो : amar ujala

विस्तार

 

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पर्यावरण असंतुलन और मानवीय दबाव हिमालय पर बुरा असर डाल रहा है। वैज्ञानिकों ने इसकी पुष्टि की है। इन कारणों के चलते हिमालयी ग्लेशियरों से बर्फ पिघलने की रफ्तार बेहद तेज हो गई है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि विश्व के ग्लेशियरों से हर साल 20 हजार टन बर्फ पिघल रही है और ये तेजी से गायब हो रहे हैं।

अल्मोड़ा के जीबी पंत हिमालयी पर्यावरण संस्थान के वैज्ञानिकों ने इसकी पुष्टि की है। पर्यावरण से जुड़े वैज्ञानिकों ने भी इस पर गहरी चिंता जताई है। वैज्ञानिकों के मुताबिक वर्ष 1985 से 2002 तक ग्लेशियरों से बर्फ पिघलने की रफ्तार तीन गुना बढ़ी है। इसके बाद इसकी रफ्तार और तेज होने की संभावना है। जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयन पर्यावरण संस्थान के पूर्व निदेशक प्रो. सुनील नौटियाल ने कहा कि आज पर्यावरण असंतुलन के नकारात्मक प्रभाव सामने आ रहे हैं।

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विश्व भर में जनसंख्या बढ़ने, भौतिक संसाधनों के उपयोग और हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ते मानवीय दबाव से तापमान बढ़ गया है। इसका प्रभाव ग्लेशियरों पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पूर्व में किए गए शोध में सामने आया कि वर्ष 1975 से 1985 के बीच ग्लेशियरों में हर साल सात अरब टन बर्फ पिघल रही थी, अब इसकी रफ्तार तीन गुना से अधिक बढ़ गई है। वर्ष 2000 से 2010 तक हर साल ग्लेशियरों से 20 अरब टन बर्फ पिघल रही थी, जो अब भी जारी है। बीते 40 वर्षों में ग्लेशियरों से 440 अरब टन बर्फ पिघल चुकी है, जो चिंताजनक है।

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पिथौरागढ़ का ओम पर्वत भी बर्फ पिघलने से नजर आने लगा काला
पिथौरागढ़ जिले के धारचूला में उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित विश्व प्रसिद्ध ओम पर्वत से बर्फ पिघल चुकी है और यह काला नजर आ रहा है। हालात यह है कि वर्तमान में इसकी पहचान ओम की आकृति पूरी तरह गायब हो चुकी है। ऐसे में स्थानीय लोग भी हैरत में हैं। पिछले वर्ष भी ओम पर्वत से कुछ समय के लिए बर्फ पूरी तरह गायब हो गई थी और इस दौरान ओम की आकृति दिखाई देना बंद हो गया था। वर्ष 2024 में भी इस घटना के पीछे विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों ने कम बर्फबारी, बढ़ते तापमान, वाहनों के प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैसे कारण बताए थे।

दो दशक में एक किलोमीटर पीछे खिसका मिलम ग्लेशियर
पिथौरागढ़ जिले के हिमालयी क्षेत्र में विश्व प्रसिद्ध मिलम ग्लेशियर में भी बर्फ पिघलने की रफ्तार तेज है। अंदाजा लगाया जा सकता है, बीते दो दशक में यह ग्लेशियर बर्फ पिघलने से एक किलोमीटर पीछे खिसक चुका है। यह ग्लेशियर मल्ला जोहार में है। मल्ला जोहार विकास समिति के अध्यक्ष श्रीराम सिंह धर्मसक्तू ने बताया कि मिलम ग्लेशियर पीछे खिसक रहा है। इसका कारण हिमालय में बढ़ता तापमान और तेजी से पिघलती बर्फ है। संवाद

 

हिमालयी क्षेत्रों में तापमान बढ़ने से इस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं। पर्यावरण असंतुलन, मानवीय दखल इसके प्रमुख कारण हैं। हिमालय को संरक्षित करने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। -डॉ. नवीन जोशी, वरिष्ठ वैज्ञानिक, यूकॉस्ट, देहरादून

 

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