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रोडवेज की 50, केमू की 100 बसें रुकीं
अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
Updated Thu, 18 Aug 2016 01:42 AM IST
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सड़क बंद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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नैनीताल और भीमताल मार्ग बंद होने से पहाड़ को जाने वाली बस और टैक्सी सेवा ठप रही। इसके चलते हजारों यात्री सफर नहीं कर सकें। नैनीताल में हाईकोर्ट, कमिश्नर, डीएम दफ्तर से लेकर कई विभागों के महत्वपूर्ण कार्यालय है। इन कार्यालयों में हल्द्वानी से बड़ी संख्या में कर्मचारी जाते हैं।
इसके अलावा दूसरे विभागों के लोग, सामान्य लोग भी सरकारी कामकाज के लिए जाते हैं। नैनीताल और भीमताल रोड बंद होने से यह करीब 10-12 हजार लोग यात्रा नहीं कर सके। कई अन्य रास्ते भी बंद थे। ऐसे में शिक्षकों ने सोशल मीडिया ग्रुप के माध्यम से अपने साथियों और लोगों को भी रास्ता बंद होने के लिए सचेत किया।
रोडवेज की भीमताल, अल्मोड़ा, रानीखेत, पिथौरागढ़ आदि जगहों के लिए करीब 50 बसों का बेड़ा संचालित किया जाता है। बुधवार को दोगांव के पास आए मलबे के कारण यह बसें नहीं चल सकीं। शाम को केवल एक बस भीमताल के लिए भेजी गई। वहीं, केमू भी दूरस्थ पहाड़ों में बस सेवा संचालित करता है।
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इसके अलावा डाक भी ले जाने की जिम्मेदारी होती है। केमू अध्यक्ष सुरेश डसीला कहते हैं कि दूरस्थ पहाड़ों के लिए बस सेवा सुबक 4:30 बजे संचालित होने लगती हैं। रास्ता बंद होने से करीब 100 बसों का संचालन प्रभावित हुआ। दोपहर बाद जब भीमताल का रास्ता खुला तो भीमताल आदि छोटी दूरी के लिए बसें चलाई गईं।
इधर, टैक्सी की सेवा भी प्रभावित हुई। केवल पहाड़ जाने के लिए टनकपुर का रास्ता ही खुला था। ऐसे में बाहर से आने वाले लोग बड़ी संख्या में इसी रास्ते से पिथौरागढ़ आदि जगहों के लिए निकले। बड़ी संख्या में यात्री हल्द्वानी में ही फंस गए, जो अपने रिश्तेदारों के यहां ठहरे और दिन भर रास्ता खुलने का इंतजार करते रहे।
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इसके अलावा दूसरे विभागों के लोग, सामान्य लोग भी सरकारी कामकाज के लिए जाते हैं। नैनीताल और भीमताल रोड बंद होने से यह करीब 10-12 हजार लोग यात्रा नहीं कर सके। कई अन्य रास्ते भी बंद थे। ऐसे में शिक्षकों ने सोशल मीडिया ग्रुप के माध्यम से अपने साथियों और लोगों को भी रास्ता बंद होने के लिए सचेत किया।
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रोडवेज की भीमताल, अल्मोड़ा, रानीखेत, पिथौरागढ़ आदि जगहों के लिए करीब 50 बसों का बेड़ा संचालित किया जाता है। बुधवार को दोगांव के पास आए मलबे के कारण यह बसें नहीं चल सकीं। शाम को केवल एक बस भीमताल के लिए भेजी गई। वहीं, केमू भी दूरस्थ पहाड़ों में बस सेवा संचालित करता है।
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इसके अलावा डाक भी ले जाने की जिम्मेदारी होती है। केमू अध्यक्ष सुरेश डसीला कहते हैं कि दूरस्थ पहाड़ों के लिए बस सेवा सुबक 4:30 बजे संचालित होने लगती हैं। रास्ता बंद होने से करीब 100 बसों का संचालन प्रभावित हुआ। दोपहर बाद जब भीमताल का रास्ता खुला तो भीमताल आदि छोटी दूरी के लिए बसें चलाई गईं।
इधर, टैक्सी की सेवा भी प्रभावित हुई। केवल पहाड़ जाने के लिए टनकपुर का रास्ता ही खुला था। ऐसे में बाहर से आने वाले लोग बड़ी संख्या में इसी रास्ते से पिथौरागढ़ आदि जगहों के लिए निकले। बड़ी संख्या में यात्री हल्द्वानी में ही फंस गए, जो अपने रिश्तेदारों के यहां ठहरे और दिन भर रास्ता खुलने का इंतजार करते रहे।