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कार्बेट पार्क के दस किमी के दायरे में स्टोन क्रशर लगाने के मामले में जवाब तलब

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 05 Jan 2021 12:53 AM IST
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Response summoned in case of stone crusher within ten km radius of Corbett Park
प्रतीकात्मक फोटो।
नैनीताल। कार्बेट पार्क के दस किमी के दायरे में स्टोन क्रशर लगाने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और मनराल स्टोन क्रशर को तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में राज्य सरकार ने शपथपत्र दायर कर कोर्ट को बताया था कि मनराल स्टोन क्रशर निर्माण कार्य नहीं करेगा। यदि राज्य सरकार के शपथपत्र के विपरीत निर्माण कार्य किया जा रहा है तो याचिकाकर्ता संबंधित अधिकारियों के खिलाफ झूठा शपथपत्र दायर करने पर कार्रवाई की मांग कर सकता है।
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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमठ एवं न्यायमूर्ति आलोक वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार रामनगर निवासी पूर्व सैनिक आनंद नेगी और सर्वजीत सिंह ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि ग्राम सक्खनपुर रामनगर में कॉर्बेट पार्क की सीमा पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विपरीत और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मंजूरी लिए बिना मनराल स्टोन क्रशर लगाया जा रहा है।
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याचिकाकर्ता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में पूर्व में पेश की गई जीपीएस एक्सपर्ट की ओर से मापी गई दूरी संबंधी रिपोर्ट के अनुसार मनराल स्टोन क्रशर कॉर्बेट पार्क से मात्र छह किलोमीटर की दूरी पर लगाया गया है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को यह भी बताया कि उक्त स्टोन क्रशर को लगाने की मंजूरी पहले ही निरस्त की जा चुकी है। इसके बावजूद प्रतिबंधित क्षेत्र में क्रशर का संचालन भी शुरू कर दिया गया है।
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क्या है सुप्रीम कोर्ट का आदेश
याचिकाकर्ता का कहना था कि 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि कॉर्बेट पार्क की सीमा के विभिन्न बिंदुओं से मनराल स्टोन क्रशर की दूरी नापने और अन्य सभी आपत्तियों पर विचार करने के बाद ही मनराल स्टोन क्रशर को मंजूरी दिए जाने पर विचार किया जाए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत नेशनल पार्क की 10 किलोमीटर की सीमा के अंदर प्रदूषणकारी उद्योग स्थापित नहीं किए जा सकते।
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