{"_id":"5734dba64f1c1b9b3791aa46","slug":"mining-in-nainital-lake","type":"story","status":"publish","title_hn":"झील का 40 फीसदी हिस्सा लील गया सूखा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
झील का 40 फीसदी हिस्सा लील गया सूखा
ब्यूराे/अमर उजाला, नैनीताल।
Updated Fri, 13 May 2016 01:08 AM IST
विज्ञापन
नैनीताल झील में खनन
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नैनीताल। हाल में हुई बारिश के बाद भी नैनीझील के जलस्तर में कोई भरपाई नहीं हुई है। एक ओर जहां अक्तूबर से अब तक न के बराबर बारिश और जाड़ों में बर्फबारी नहीं होना बड़ा कारण है। वहीं, पिछले दिनों हुई 40 एमएम बारिश का पानी झील के जलस्तर को एक इंच भी नहीं बढ़ा सका। झील के करीब 40 फीसदी हिस्से में सूखे का असर साफ तौर पर दिखने लगा है। वर्तमान में नैनीझील का जलस्तर पांच फीट नीचे है। इसके अलावा झील के आसपास हुए निर्माण ने भी इसके अस्तित्व पर संकट खड़ा कर दिया है।
विज्ञापन
नैनीताल और आसपास के क्षेत्रों में पांच से 11 मई के बीच करीब 40 एमएम बारिश हुई है, लेकिन पिछले दिनों जंगलों में लगी आग और पूरी तरह से सूख चुकी जमीन ने बारिश के पानी को पूरी तरह सोख लिया। इस कारण बारिश का यह पानी झील तक रिसकर पहुंच ही नहीं सका। लोनिवि के झील नियंत्रण कक्ष के मुताबिक सात मई को झील का जलस्तर माइनस पांच फीट था। बारिश होने के बाद भी जलस्तर जस की तस है। वैसे तो हर साल मई-जून में जलस्तर में एक से डेढ़ फीट की कमी दर्ज की जाती है, लेकिन इस बार हालात ज्यादा गंभीर हैं।
विज्ञापन
पर्यावरणविदों और प्रकृति प्रेमियों के मुताबिक इस झील के अस्तित्व के लिए खतरा हम भी हैं। झील को रिचार्ज करने वाले अधिकांश मुख्य स्रोतों के ऊपर कंकरीट के जंगल तो बने ही हैं, इसके अलावा इनके जलस्रोतों को बेतरतीब ढंग से मलबा फेंक कर भी नष्ट किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि हम अभी भी नहीं जागे और स्थिति इसी तरह की रही तो आने वाले कुछ वर्षों में नैनीझील सीजनल बन जाएगी जो कि बरसात और जाड़े के समय ही लबालब दिखा करेगी।
विज्ञापन