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Exclusive: पहली बार दिखा मुर्गे के पंजे के आकार का मशरूम, अब वन विभाग पूरे उत्तराखंड में तलाशेगा यह प्रजाति

Tue, 27 Aug 2024 12:59 PM IST
हीरा मेहरा दीपक कापड़ी, संवाद
दीपक कापड़ी, संवाद Published by: हीरा मेहरा Updated Tue, 27 Aug 2024 12:59 PM IST
सार

उत्तराखंड में पहली बार लिसुरस गार्डनेरी मशरूम मिलने पर वन विभाग इसे पूरे राज्य में तलाशेगा। यह प्रजाति भारत सहित एशिया और अफ्रीका में पाई जाती है।

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Leisure Gardneri mushroom found for the first time in Uttarakhand
Leisure Gardneri mushroom - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तराखंड में पहली बार लिसुरस गार्डनेरी मशरूम मिलने पर वन विभाग इसे पूरे राज्य में तलाशेगा। यह प्रजाति भारत सहित एशिया और अफ्रीका में पाई जाती है लेकिन दिलचस्प बात यह है कि इसके फोटोग्राफिक साक्ष्य दूसरों के पास नहीं है। विश्व के प्रसिद्ध फोटोग्राफर इस उपलब्धि के बाद बाद आश्चर्यचकित हैं।

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वन शिक्षक टीम के सदस्य मनोज सिंह ने चमोली जिले के घने देवदार के जंगल से इसका नमूना एकत्र किया है। विश्व के प्रसिद्ध फोटोग्राफ टेलर लॉकवुड इससे आश्चर्यचकित हैं। उन्होंने आगे के अध्ययन के लिए उनसे इसका नमूना मांगा है। लॉकवुड ने वर्ष 2013 में चीन में इस आकर्षक स्टिंकहॉर्न की तस्वीर खींची थी। तब से इसे दुनिया के किसी अन्य क्षेत्र में एकत्र नहीं किया गया था। अनुसंधान टीमों के पास इस अनोखे मशरूम के फोटोग्राफिक साक्ष्य और नमूने दोनों हैं जो लोगों को नमूने का अध्ययन करने और इसमें छिपे तथ्यों को जानने की अनुमति दे सकते हैं।

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फॉरेस्ट रिसर्च विंग उत्तराखंड के मनोज सिंह ने कहा कि वह पांच अगस्त को चमोली जिले के एक गांव के देवदार के जंगल को पार कर रहे थे, यहां उन्हें एल गार्डनरी मिला। इसके बाद उन्होंने एक वयस्क पौधे के नमूने को प्लग किया और अधिकारियों को इसके बारे में सूचित किया। जांच में यह लिसुरसागर्डनेरी मशरूम मिला जो विलुप्त प्रजाति है। लिसुरसगार्डनेरी मशरूम मुर्गे के पंजे के समान होने के कारण काफी आकर्षक दिखता है।
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चार से छह भुजाओं से बना होता है
मशरूम विशेषज्ञ डॉ. हर्ष ने बताया कि मशरूम में सबसे पहले तीन सेमी तक का एक सफेद अंडा" निकलता है जो एक तना और एक सिर बनाता है। तना बेलनाकार होता है। यह 15 सेमी तक लंबा और दो सेमी मोटा खोखला होता है। यह सफेद, गांठदार और झुर्रीदार होता है और आधार पर एक वोल्वा में समाप्त होता है। इसका सिर चार से छह भुजाओं से बना होता है जो आमतौर पर अपने सिरों पर जुड़े होते हैं। इसकी भुजाएं सफेद गांठदार होती हैं और प्रत्येक में एक रोगाणुहीन बेसल भाग होता है जो बीजाणु कीचड़ से ढका नहीं होता है। ऊपरी आंतरिक सतह बारीक मखमली, स्पष्ट रूप से गांठदार और गहरे भूरे रंग के बीजाणु कीचड़ से ढकी होती है। यह जमीन पर नम, छायादार स्थानों पर उगती है। यह पहली बार है कि नमूना चमोली के हिमालयी क्षेत्र से एकत्र किया गया है क्योंकि आज तक इस प्रजाति फोटोग्राफिक साक्ष्य नहीं थे।

मशरूम की पारिस्थितिकी सैप्रोबिक है जो विभिन्न आवासों में अकेले या सामूहिक रूप से बढ़ती है। यह श्रीलंका, इंडोनेशिया, भारत और चीन, दक्षिण अफ्रीका और कांगो में पाई जाती है। लिसुरस गार्डनेरी की भुजाएं शीर्ष पर जुड़ी हुई हैं और कभी मुक्त नहीं होती हैं। लिसुरस गार्डनेरी की पहचान इसकी भुजाओं की उपजाऊ सतह से की जा सकती है जो दिखने में काफी झबरा होती हैं और केवल बांह के ऊपरी हिस्से को ढकती है। इससे आधार खुला रह जाता है। भुजाएं भी आमतौर पर शीर्ष पर एकसाथ जुड़ी होती हैं।
-संजीव चतुर्वेदी, सीसीएफ

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