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शिकायतकर्ता के प्रत्यावेदन पर डीएम को निर्णय लेने के निर्देश
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नैनीताल। हाईकोर्ट ने बाजपुर जगन्नाथपुर की ग्राम प्रधान रमनीक शर्मा के ओबीसी प्रमाणपत्र के जांच की मांग के मामले में याचिकाकर्ता के प्रत्यावेदन पर जल्द निर्णय लेने के निर्देश जिलाधिकारी ऊधमसिंह नगर को देते हुए याचिका को निस्तारित कर दिया है।
न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ के समक्ष ममाले की सुनवाई हुई। बाजपुर निवासी सरताज जहां ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि ग्राम पंचायत जगन्नाथपुर में प्रधान पद ओबीसी महिला के लिए आरक्षित किया गया था। चुनाव में रमनीक शर्मा पत्नी विशाल शर्मा प्रधान पद पर निर्वाचित हुईं थीं। याचिकाकर्ता के साथ ही एक अन्य ने डीएम के साथ ही पंचायती राज विभाग को ग्राम प्रधान के ओबीसी प्रमाणपत्र की जांच की मांग की थी। जांच कराने के बाद डीएम ने प्रधान को नोटिस जारी कर कहा था कि जट सिख जाति को उत्तराखंड में ओबीसी की अनुसूची में शामिल नहीं किया गया है और रमनीक शर्मा को 2008 में निर्गत ओबीसी प्रमाणपत्र की वैधता समाप्त हो चुकी है। इसके बाद रमनीक का ओबीसी प्रमाणपत्र अवैध करार दे दिया गया।
जांच रिपोर्ट में कहा गया कि रमनीक ने ओबीसी महिला के लिए आरक्षित पद का अनुचित लाभ प्राप्त किया है। जब इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई तो शिकायतकर्ता सरताज जहां ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता के प्रत्यावेदन पर जल्द निर्णय लेने के निर्देश डीएम को देते हुए याचिका को निस्तारित कर दिया है।
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न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ के समक्ष ममाले की सुनवाई हुई। बाजपुर निवासी सरताज जहां ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि ग्राम पंचायत जगन्नाथपुर में प्रधान पद ओबीसी महिला के लिए आरक्षित किया गया था। चुनाव में रमनीक शर्मा पत्नी विशाल शर्मा प्रधान पद पर निर्वाचित हुईं थीं। याचिकाकर्ता के साथ ही एक अन्य ने डीएम के साथ ही पंचायती राज विभाग को ग्राम प्रधान के ओबीसी प्रमाणपत्र की जांच की मांग की थी। जांच कराने के बाद डीएम ने प्रधान को नोटिस जारी कर कहा था कि जट सिख जाति को उत्तराखंड में ओबीसी की अनुसूची में शामिल नहीं किया गया है और रमनीक शर्मा को 2008 में निर्गत ओबीसी प्रमाणपत्र की वैधता समाप्त हो चुकी है। इसके बाद रमनीक का ओबीसी प्रमाणपत्र अवैध करार दे दिया गया।
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जांच रिपोर्ट में कहा गया कि रमनीक ने ओबीसी महिला के लिए आरक्षित पद का अनुचित लाभ प्राप्त किया है। जब इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई तो शिकायतकर्ता सरताज जहां ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता के प्रत्यावेदन पर जल्द निर्णय लेने के निर्देश डीएम को देते हुए याचिका को निस्तारित कर दिया है।
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