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रिक्शा स्टेंडों को पर्वतीय शैली में संवारने की पहल शुरू
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नैनीताल के तल्लीताल व मल्लीताल रिक्शा स्टैंड कुछ इस तरह बनेगा।
- फोटो : NAINITAL
नैनीताल। भविष्य में नैनीताल आने वाले सैलानियों का स्वागत कुमाऊंनी संस्कृति से होगा। रिक्शा स्टेंड से ही उन्हें कुमाऊंनी संस्कृति का दीदार होगा।
जिलाधिकारी धीराज सिंह गर्ब्याल ने तल्लीताल और मल्लीताल के रिक्शा स्टेंडों को पर्वतीय शैली में संवारने की पहल शुरू कर दी है। विभागीय अधिकारियों और आर्किटेक्टों से व्यापक विचार विमर्श के बाद डीएम ने भविष्य में नजर आने वाले रिक्शा स्टेंडों के प्रस्तावित डिजाइन के बारे में जानकारी दी।
डिजाइन के अनुसार रिक्शा स्टेंड की छत पहाड़ी शैली की ढलावदार पाथरों (पत्थरों) की है, जबकि सामने खिड़की और मुंडेरें भी पर्वतीय शैली में नजर आ रहे हैं। यही नहीं रिक्शा स्टेंड में बैठने वाले सैलानियों के लिए आकर्षक बेंच भी लगाई जाएंगी। साथ ही निर्माण कार्य में ईंट के बजाय पत्थरों का उपयोग होगा।
सैलानियों को आसपास के नजारे देख अहसास होना चाहिए कि वह पर्वतीय क्षेत्र में हैं। यही छोटे-छोटे प्रयास हमारी संस्कृति को संवारने में मील का पत्थर साबित हो सकते हैं।
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धीराज सिंह गर्ब्याल, डीएम
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जिलाधिकारी धीराज सिंह गर्ब्याल ने तल्लीताल और मल्लीताल के रिक्शा स्टेंडों को पर्वतीय शैली में संवारने की पहल शुरू कर दी है। विभागीय अधिकारियों और आर्किटेक्टों से व्यापक विचार विमर्श के बाद डीएम ने भविष्य में नजर आने वाले रिक्शा स्टेंडों के प्रस्तावित डिजाइन के बारे में जानकारी दी।
डिजाइन के अनुसार रिक्शा स्टेंड की छत पहाड़ी शैली की ढलावदार पाथरों (पत्थरों) की है, जबकि सामने खिड़की और मुंडेरें भी पर्वतीय शैली में नजर आ रहे हैं। यही नहीं रिक्शा स्टेंड में बैठने वाले सैलानियों के लिए आकर्षक बेंच भी लगाई जाएंगी। साथ ही निर्माण कार्य में ईंट के बजाय पत्थरों का उपयोग होगा।
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सैलानियों को आसपास के नजारे देख अहसास होना चाहिए कि वह पर्वतीय क्षेत्र में हैं। यही छोटे-छोटे प्रयास हमारी संस्कृति को संवारने में मील का पत्थर साबित हो सकते हैं।
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धीराज सिंह गर्ब्याल, डीएम