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Nainital News: जोशीमठ मामले की जांच के लिए गठित कमेटी में दो और सदस्यों को शामिल करें

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Fri, 13 Jan 2023 08:30 AM IST
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Include two more members in the committee formed to investigate the Joshimath case
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने जोशीमठ में हो रहे भू धंसाव मामले की जांच के लिए गठित कमेटी में दो स्वतंत्र विशेषज्ञ सदस्यों को भी शामिल करने के निर्देश राज्य सरकार को दिए हैं। कमेटी में अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र के कार्यकारी निदेशक पीयूष रौतेला और उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन समिति के निदेशक एमपीएस बिष्ट को शामिल करने को कहा गया है। हाईकोर्ट ने कहा कि मेटी दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश करे। कोर्ट ने जोशीमठ में निर्माण पर लगी रोक के आदेश को प्रभावी रूप से लागू करने को कहा है।
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मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने बृहस्पतिवार को पीसी तिवारी की जनहित याचिका पर सुनवाई की। प्रार्थनापत्र में कहा गया था कि जोशीमठ में लगातार भू धंसाव हो रहा है। घरों और भवनों में दरारें आ रही हैं जिससे यहां के लोग दहशत के साये में जीने को मजबूर हैं। प्रदेश सरकार की ओर से जनता की समस्या को नजरंदाज किया जा रहा है और उनके पुनर्वास के लिए रणनीति तैयार नहीं की गई है। किसी भी समय जोशीमठ का यह इलाका तबाह हो सकता है। प्रशासन ने ऐसे लगभग छह सौ भवन चिह्नित किए हैं जिनमें दरारें आई हैं जो दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं।
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1976 में मिश्रा कमेटी ने चेताया था
याचिका के अनुसार 1976 में मिश्रा कमेटी ने जोशीमठ को लेकर विस्तृत रिपोर्ट सरकार को दी थी जिसमें कहा गया था कि जोशीमठ शहर मिट्टी और रेत व कंकर से बना है यहां मजबूत चट्टान नहीं हैं और कभी भी भू धंसाव हो सकता है। निर्माण कार्य करने से पहले इसकी जांच की जानी आवश्यक है। जोशीमठ के लोगों को ईंधन आदि के लिए जंगल पर निर्भर नहीं होना चाहिए बल्कि वैकल्पिक ऊर्जा के साधनों की व्यवस्था भी करनी चाहिए।
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2010 के शोध में भू धंसाव की आशंका जताई थी
याचिका के अनुसार 25 नवंबर 2010 को पीयूष रौतेला और एमपीएस बिष्ट ने एक शोध जारी कर कहा था कि सेलंग के पास जिस स्थान पर एनटीपीसी टनल का निर्माण कर रही है वह अति संवेदनशील क्षेत्र है। टनल बनाते वक्त एनटीपीसी की मशीन फंस गई थी जिससे पानी का मार्ग अवरुद्ध हो गया और सात-आठ सौ लीटर प्रति सेकेंड के हिसाब से पानी ऊपर से बहने लगा। पानी के सतह पर बहने से और भू धंसाव होगा इसलिए इस क्षेत्र में भारी निर्माण कार्य बिना सर्वे के न किए जाएं।
सरकार और एनटीपीसी का पक्ष
राज्य सरकार और एनटीपीसी की ओर से कहा गया कि सरकार इस मामले को लेकर गंभीर है। वहां पर सभी निर्माण कार्य रोक दिए हैं। प्रभावितों को हर संभव मदद दी जा रही है। भू धंसाव को लेकर सरकार वाडिया इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों की मदद ले रही है।

तैयारी अधूरी, कर्मियों को उपकरण और ट्रेनिंग भी नहीं
उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी और चिपको आंदोलन से जुड़े रहे पीसी तिवारी ने 2021 में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि राज्य सरकार के पास आपदा से निपटने की सभी तैयारियां अधूरी हैं और कोई ऐसा सिस्टम नहीं है जो आपदा की पूर्व सूचना दे सके। उत्तराखंड में 5600 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम का पूर्वानुमान लगाने वाले यंत्र नहीं लगे हैं और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रिमोट सेंसिंग इंस्टीट्यूट काम नहीं कर रहे हैं। हाइड्रो प्रोजेक्ट टीम के कर्मचारियों के सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं है कर्मचारियों को कोई ट्रेनिंग तक नहीं दी गई। सुरक्षा के नाम पर केवल हेलमेट दिए गए हैं।
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