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हल्द्वानी: सीसीटीवी में पिस्टल दिखी...गोली चली, फिर भी पुलिस को नहीं दी तहरीर; कार्रवाई सिर्फ स्पष्टीकरण तक

Wed, 02 Sep 2026 11:57 AM IST
Heera समीर बिसारिया
समीर बिसारिया Published by: Heera Updated Wed, 02 Sep 2026 11:57 AM IST
सार

हल्द्वानी आरटीओ कार्यालय में अधिकारी द्वारा फायरिंग की घटना में सिर्फ स्पष्टीकरण तक कार्रवाई सीमित रही। आश्चर्यजनक रूप से सीसीटीवी फुटेज में पिस्टल व गोलीबारी साफ दिखने के बावजूद पुलिस को तहरीर नहीं दी गई। 

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In the incident of firing by an officer in Haldwani RTO office action was limited to just clarification
हल्द्वानी आरटीओ कार्यालय में गोली चलने के बाद जांच करती फोरेंसिक टीम। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सरकारी कार्यालय जहां आम आदमी प्रवेश से पहले कई स्तर की औपचारिकताओं से गुजरता है। लेकिन क्या उसी कार्यालय में कोई अधिकारी पिस्टल लेकर बे रोकटोक दाखिल हो सकता है। हल्द्वानी संभागीय परिवहन कार्यालय में मंगलवार को हुई घटना ने इसी सवाल को सबके सामने ला खड़ा किया है। वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के तौर पर कार्यरत एक अधिकारी ने सहकर्मियों के साथ बातचीत के दौरान पिस्टल निकाली और इसी दौरान गोली चल गई। गनीमत रही कि घटना का परिणाम इससे ज्यादा गंभीर नहीं हुआ। लेकिन घटना ने सरकारी दफ्तरों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल जरूर खोल दी।

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बताया जा रहा है कि संबंधित अधिकारी जून माह में ही पिथौरागढ़ से ट्रांसफर एक्ट के तहत हल्द्वानी संभागीय कार्यालय आया था। उसकी तैनाती प्रवर्तन शाखा में थी। मंगलवार को वह सेवा पटल डेस्क पर पहुंचा और वहां सहकर्मियों के साथ बातचीत कर रहा था। इसी दौरान पिस्टल निकाली गई और अचानक गोली चल गई। हालांकि आरटीओ अरविंद पांडे ने किसी कहासुनी और आपसी विवाद से इन्कार किया है। विभाग का कहना है कि गोली गलती से चली। घटना के बाद विभाग ने अधिकारी से तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। जवाब नहीं देने पर विभागीय कार्रवाई की चेतावनी दी गई है लेकिन सवाल यह है कि क्या सरकारी कार्यालय में लोडेड पिस्टल लेकर पहुंचना और उसे कार्यालय के भीतर निकालना महज स्पष्टीकरण तक सीमित मामला है। सबसे बड़ा सवाल सुरक्षा व्यवस्था पर है। क्या आरटीओ कार्यालय में प्रवेश करने वाले लोगों और कर्मचारियों-अधिकारियों की किसी तरह की चेकिंग होती है। क्या असलहे के साथ कार्यालय में प्रवेश को लेकर कोई स्पष्ट प्रोटोकॉल है और अगर है तो मंगलवार को उसका पालन क्यों नहीं हुआ। कोई व्यवस्था ही नहीं है तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा होने पर जिम्मेदारी किसकी होगी।

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अधिकारी चुप, उच्चाधिकारियों को पता ही नहीं
मामले में घटना के बाद विभाग का सूचना तंत्र भी सवालों के घेरे में है। बताया जा रहा है कि वारदात के बाद कई अधिकारी फोन नहीं उठा रहे थे। यहां तक कि परिवहन सचिव उत्तराखंड को भी तत्काल घटना की जानकारी नहीं थी। देर रात जब मामला उनके संज्ञान में आया, उसके बाद विभागीय अधिकारियों ने फोन उठाना शुरू किया। अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि गोली गलती से चली या जानबूझकर। सवाल यह भी है कि सरकारी कार्यालय में हथियार लेकर कौन आ सकता है, सुरक्षा जांच क्यों नहीं हुई, घटना की सूचना उच्चाधिकारियों तक समय पर क्यों नहीं पहुंची और विभाग इस पूरे मामले में वास्तविक जवाबदेही तय करेगा या सिर्फ स्पष्टीकरण लेकर मामला खत्म कर देगा।

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कहासुनी और विवाद की बात सही नहीं है, सामान्य बातचीत के दौरान हादसा होने की बात सामने आई है। जिस पीआर सेक्शन में गोली चली सूचना मिलते ही कुछ ही समय में इसकी जानकारी परिवहन आयुक्त, डीएम और एसएसपी को दे दी गई थी। मामले में संबंधित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी से तीन दिन में स्पष्टिकरण मांगा गया है। अरविंद पांडे, आरटीओ प्रशासन, हल्द्वानी संभागीय परिवहन कार्यालय

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