{"_id":"5d60418e8ebc3e015a220dc5","slug":"if-you-feel-at-stake-you-will-not-leave-home-haldwani-news-hld3539494136","type":"story","status":"publish","title_hn":"जान दांव पर लगे तो लगे, घर नहीं छोड़ेंगे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जान दांव पर लगे तो लगे, घर नहीं छोड़ेंगे
विज्ञापन
नैनीताल। बलियानाले के मुहाने पर बसे 27 अन्य परिवारों के मकान खतरे की जद में आ गए हैं। इन परिवारों को रईस होटल क्षेत्र से दूसरे स्थानों पर विस्थापित किया जाना है, लेकिन स्थानीय लोग किसी भी हाल में अपना घर छोड़ने को तैयार नहीं है। उनका कहना है कि जान दांव पर लगती है तो लग जाए, लेकिन वह घर छोड़कर किसी दूसरे स्थान पर नहीं जाएंगे।
बलियानाले में अरसे से भूस्खलन हो रहा है। इस वर्ष भी बारिश शुरू होने के साथ यहां भूस्खलन हो रहा है। बीते दिनों मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने खुद ही नाले की निगरानी की जिम्मेदारी संभाली है। इसके बाद जायका और जीएसआई की टीमें भूस्खलन रोकने को लेकर सर्वे कर रहीं हैं। यह जांच एजेंसियां सर्वे कर रिपोर्ट देंगी कि नाले का ट्रीटमेंट किस तरह से करना उचित होगा। इसरो की टीम भी यहां ड्रोन सर्वे कर चुकी है। बीते सप्ताह जीएसआई की सर्वे रिपोर्ट आई, जिसमें पूर्व में विस्थापित किए जा चुके 67 परिवारों के अलावा 27 अन्य घरों को खतरा बताया गया।
डीएम के निर्देश पर विस्थापन की कार्रवाई शुरू की गई। इससे पहले एसडीएम विनोद कुमार ने रईस होटल क्षेत्र में जाकर स्थानीय लोगों से चर्चा की, लेकिन अधिकतर लोगों ने दूसरी जगह जाने से इनकार कर दिया है। कहा कि वह किसी भी हाल में घर छोड़ कर नहीं जाएंगे। प्रशासन ने जान-माल का खतरा बताया, तब भी लोग नहीं मानें।
विज्ञापन
बता दें कि प्रशासन की ओर से खतरे के जद में आए भवनों में रहने वालों को किसी दूसरे स्थान पर सरकारी खर्च पर विस्थापित किया जाना है। अगर कोई किराये के मकान में रहना चाहता है तो सरकार की ओर से हर महीने चार हजार रुपये दिए जाएंगे।
तहसीलदार भगवान सिंह चौहान ने बताया कि बुधवार को एसडीएम सदर समेत प्रशासन की टीम ने मौके पर जाकर खतरे की जद में आने वाले भवन स्वामियों को चेताया कि आपके आवासों को खतरा हो सकता है। साथ ही विस्थापित होने के संबंध में उनसे राय मांगी, लेकिन अधिकतर लोग घर छोड़ने को तैयार नहीं है।
विज्ञापन
बलियानाले में अरसे से भूस्खलन हो रहा है। इस वर्ष भी बारिश शुरू होने के साथ यहां भूस्खलन हो रहा है। बीते दिनों मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने खुद ही नाले की निगरानी की जिम्मेदारी संभाली है। इसके बाद जायका और जीएसआई की टीमें भूस्खलन रोकने को लेकर सर्वे कर रहीं हैं। यह जांच एजेंसियां सर्वे कर रिपोर्ट देंगी कि नाले का ट्रीटमेंट किस तरह से करना उचित होगा। इसरो की टीम भी यहां ड्रोन सर्वे कर चुकी है। बीते सप्ताह जीएसआई की सर्वे रिपोर्ट आई, जिसमें पूर्व में विस्थापित किए जा चुके 67 परिवारों के अलावा 27 अन्य घरों को खतरा बताया गया।
विज्ञापन
डीएम के निर्देश पर विस्थापन की कार्रवाई शुरू की गई। इससे पहले एसडीएम विनोद कुमार ने रईस होटल क्षेत्र में जाकर स्थानीय लोगों से चर्चा की, लेकिन अधिकतर लोगों ने दूसरी जगह जाने से इनकार कर दिया है। कहा कि वह किसी भी हाल में घर छोड़ कर नहीं जाएंगे। प्रशासन ने जान-माल का खतरा बताया, तब भी लोग नहीं मानें।
विज्ञापन
बता दें कि प्रशासन की ओर से खतरे के जद में आए भवनों में रहने वालों को किसी दूसरे स्थान पर सरकारी खर्च पर विस्थापित किया जाना है। अगर कोई किराये के मकान में रहना चाहता है तो सरकार की ओर से हर महीने चार हजार रुपये दिए जाएंगे।
तहसीलदार भगवान सिंह चौहान ने बताया कि बुधवार को एसडीएम सदर समेत प्रशासन की टीम ने मौके पर जाकर खतरे की जद में आने वाले भवन स्वामियों को चेताया कि आपके आवासों को खतरा हो सकता है। साथ ही विस्थापित होने के संबंध में उनसे राय मांगी, लेकिन अधिकतर लोग घर छोड़ने को तैयार नहीं है।