{"_id":"5dfbb7f48ebc3e87ff46c8e2","slug":"high-court-said-that-without-following-rules-and-regulations-do-not-bring-any-plan-in-action-nainital-news-hld3661753186","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाईकोर्ट ने कहा कनूनी प्रक्रिया का पालन किए बगैर कोई भी कार्रवाई अमल में न लाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाईकोर्ट ने कहा कनूनी प्रक्रिया का पालन किए बगैर कोई भी कार्रवाई अमल में न लाएं
विज्ञापन
प्रतीकात्मक फोटो
नैनीताल। हाईकोर्ट ने देहरादून विकासनगर के लाल तप्पड़ में प्रशासन की ओर से तालाब व नदियों की भूमि से अतिक्रमण हटाने के मामले पर दायर याचिका पर सुनवाई के बाद जिला प्रशासन को आदेश दिया है कि बिना कानूनी प्रक्रिया का पालन किए कोई भी कार्रवाई अमल में न लाई जाए। कोर्ट ने कहा है कि सभी लोगों को नोटिस जारी कर पहले उनकी आपत्तियों का निस्तारण करें और उसके बाद अग्रिम कार्यवाही करें।
न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार देहरादून निवासी कुलदीप कौर व अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि पूर्व में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पूरे राज्य से तालाबों, नदियों व नाले खालों से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था। उसी आदेश का पालन करते हुए जिला प्रशासन ने 9 दिसंबर को 200 मकानों को तोड़ने की प्रक्रिया शुरू की।
याचिका में कहा कि वे 1989 से वहां पर रह रहे हैं, लेकिन प्रशासन नदी की भूमि बताकर खाली कर रहा है और उन्हें सुनवाई तक का मौका भी नहीं दिया जा रहा है। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने जिला प्रशासन को आदेश दिया है कि कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बगैर कोई भी कार्रवाई अमल में न लाई जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन
न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार देहरादून निवासी कुलदीप कौर व अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि पूर्व में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पूरे राज्य से तालाबों, नदियों व नाले खालों से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था। उसी आदेश का पालन करते हुए जिला प्रशासन ने 9 दिसंबर को 200 मकानों को तोड़ने की प्रक्रिया शुरू की।
विज्ञापन
याचिका में कहा कि वे 1989 से वहां पर रह रहे हैं, लेकिन प्रशासन नदी की भूमि बताकर खाली कर रहा है और उन्हें सुनवाई तक का मौका भी नहीं दिया जा रहा है। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने जिला प्रशासन को आदेश दिया है कि कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बगैर कोई भी कार्रवाई अमल में न लाई जाए।
विज्ञापन