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Uttarakhand News: यूसीसी की सांविधानिकता पर सुनवाई 23 सितंबर को, जानिये मामला

Tue, 19 Aug 2025 03:21 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल Published by: हीरा मेहरा Updated Tue, 19 Aug 2025 03:21 PM IST
सार

नैनीताल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से लागू किए गए समान नागरिक संहिता यूसीसी 2025 की संवैधानिकता सहित कानून के प्रावधानोें को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई की।

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Hearing on the case of the provisions of the law including the constitutionality of UCC on September 23
उत्तराखंड हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नैनीताल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से लागू किए गए समान नागरिक संहिता यूसीसी 2025 की संवैधानिकता सहित कानून के प्रावधानोें को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई के बाद मामले की अगली सुनवाई के लिए 23 सितंबर की तिथि नियत की है।

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मुख्य न्यायाधीश जी नरेंद्र एवं न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार यूसीसी को चुनौती देने वाली लगभग आधा दर्जन से अधिक याचिकाएं हाईकोर्ट में दायर की गई हैं। जिसमें भीमताल निवासी सुरेश सिंह नेगी ने यूसीसी में लिव इन रिलेशनशिप के प्रावधान को जबकि मुस्लिम, पारसी आदि के वैवाहिक पद्धति की यूसीसी में अनदेखी किये जाने सहित अन्य प्रावधानों को चुनौती दी गई है।

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देहरादून के एलमसुद्दीन सिद्दीकी ने याचिका दायर कर अल्पसंख्यकों के रीति-रिवाजों की अनदेखी किये जाने का उल्लेख किया। नेगी की याचिका में कहा गया कि जहां सामान्य शादी के लिए लड़के की उम्र 21 व लड़की की 18 वर्ष होनी आवश्यक है जबकि लिव इन रिलेशनशिप में दोनों की उम्र 18 वर्ष निर्धारित की गई है, ऐसे में उनके व बच्चे कानूनी या वैध माने जाएंगे या नहीं। अगर कोई व्यक्ति अपनी लिव इन रिलेशनशिप से छुटकारा पाना चाहता है तो वह एक साधारण प्रार्थना पत्र रजिस्ट्रार को देकर 15 दिन के भीतर अपने पार्टनर को छोड़ सकता है जबकि साधारण विवाह में तलाक लेने के लिए पूरी न्यायिक प्रक्रिया अपनानी पड़ती है और दशकों के बाद तलाक होता है वह भी पूरा भरण पोषण देकर।

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आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने नागरिकों को संविधान प्रदत्त अधिकारों में यूसीसी के माध्यम से हस्तक्षेप कर उनका हनन किया है। याचिकाकर्ता का कहना था कि यूसीसी लागू होने के बाद लोग शादी न करके लिव इन रिलेशनशिप में ही रहना पसंद करेंगे और जब पार्टनर के साथ सम्बंध अच्छे नहीं रहेंगे तो उसे छोड़ देंगे। उन्होंने कहा कि कानूनन वर्ष 2010 के बाद शादी का रजिस्ट्रेशन कराना आवश्यक है, नहीं करने पर तीन माह की सजा या 10 हजार का जुर्माना देना होगा, यूसीसी में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।

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