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वैलेंटाइन के दिन जहर खाकर खत्म हो गई खुशी
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खुशी की फाइल फोटो।
हल्द्वानी। वैलेंटाइन का जहां हर युगल बेसब्री से इंतजार करता है वहीं बागेश्वर की एक महिला ने जहर खाकर किराए के कमरे में जीवन लीला समाप्त कर ली। बताया जा रहा है कि वह नौकरी नहीं मिलने से परेशान थी। उसका पति मुंबई में नौकरी करता है। पुलिस ने कमरे से चूहा मारने की दवा को बरामद की है।
बागेश्वर के पुड़कुनी, पुरकनी निवासी खिला उर्फ खुशी उर्फ खष्टी (20) पुत्री स्व. धर्म सिंह 30 जनवरी को हल्द्वानी आई थी। उसने रामपुर रोड पर गली नंबर पांच निवासी अशोक कुमार राठौर के मकान की तीसरी मंजिल पर तीन हजार रुपये प्रतिमाह किराए पर कमरा लिया था। मकान मालिक के अनुसार उसने बताया था कि वह रोडवेज के पास एक दुकान में सिलाई सीख रही है। शुक्रवार की सुबह कमरे से आवाज नहीं निकलने पर किराएदार ने मकान मालकिन दीपा राठौर को सूचना दी। सुबह साढ़े आठ बजे मकान मालकिन ने दरवाजा खोला तो खुशी विस्तर पर औंधे मुंह लेटी हुई थी। उसका शरीर ठंडा पड़ गया था। उसने उल्टियां भी की थी।
कोतवाल संजय कुमार, एसएसआई कश्मीर सिंह और चौकी प्रभारी कैलाश सिंह नेगी मौके पर पहुंचे और घटना की जानकारी खुशी के भाई हरीश और पति कमल पपोला को दी। परिजनों ने बताया कि खुशी की शादी तीन दिसंबर 2018 को बागेश्वर के जिले के रीमा निवासी कमल पपोला से शादी हुई थी। कमल मुंबई में नौकरी करता है।
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मेरा आखिरी दिन है किसी को मत बताना
मोबाइल कॉल की रिकार्डिंग देखने पर पुलिस को यह जानकारी मिली है कि खुशी ने अपने परिवार के सदस्य को रात में कॉल की थी। कहा था कि आज मेरा आखिरी दिन है। किसी को मत बताना।
एसएसआई कश्मीर सिंह के अनुसार खुशी के परिजनों ने बताया कि खुशी काफी सीधी लड़की थी। उसने तनाव के कारणों के बारे में चर्चा नहीं की थी।
खुशी के मोबाइल में 40 मिस्ड कॉल पड़े थे। एक एक कॉल को पुलिस ने चेक किया। पुलिस की जांच से पता चला कि खुशी अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती थी। उसने नौकरी के लिए प्रयास किया था लेकिन उसे कही काम नहीं मिल सका। उसके पर्स में भी पैसे नहीं बचे थे। ससुराल और मायका छोड़ने के बाद वह खुद को अकेला समझ रही थी। शायद इसी कारण वह डिप्रेशन में चली गई थी।
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बागेश्वर के पुड़कुनी, पुरकनी निवासी खिला उर्फ खुशी उर्फ खष्टी (20) पुत्री स्व. धर्म सिंह 30 जनवरी को हल्द्वानी आई थी। उसने रामपुर रोड पर गली नंबर पांच निवासी अशोक कुमार राठौर के मकान की तीसरी मंजिल पर तीन हजार रुपये प्रतिमाह किराए पर कमरा लिया था। मकान मालिक के अनुसार उसने बताया था कि वह रोडवेज के पास एक दुकान में सिलाई सीख रही है। शुक्रवार की सुबह कमरे से आवाज नहीं निकलने पर किराएदार ने मकान मालकिन दीपा राठौर को सूचना दी। सुबह साढ़े आठ बजे मकान मालकिन ने दरवाजा खोला तो खुशी विस्तर पर औंधे मुंह लेटी हुई थी। उसका शरीर ठंडा पड़ गया था। उसने उल्टियां भी की थी।
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कोतवाल संजय कुमार, एसएसआई कश्मीर सिंह और चौकी प्रभारी कैलाश सिंह नेगी मौके पर पहुंचे और घटना की जानकारी खुशी के भाई हरीश और पति कमल पपोला को दी। परिजनों ने बताया कि खुशी की शादी तीन दिसंबर 2018 को बागेश्वर के जिले के रीमा निवासी कमल पपोला से शादी हुई थी। कमल मुंबई में नौकरी करता है।
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मेरा आखिरी दिन है किसी को मत बताना
मोबाइल कॉल की रिकार्डिंग देखने पर पुलिस को यह जानकारी मिली है कि खुशी ने अपने परिवार के सदस्य को रात में कॉल की थी। कहा था कि आज मेरा आखिरी दिन है। किसी को मत बताना।
एसएसआई कश्मीर सिंह के अनुसार खुशी के परिजनों ने बताया कि खुशी काफी सीधी लड़की थी। उसने तनाव के कारणों के बारे में चर्चा नहीं की थी।
खुशी के मोबाइल में 40 मिस्ड कॉल पड़े थे। एक एक कॉल को पुलिस ने चेक किया। पुलिस की जांच से पता चला कि खुशी अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती थी। उसने नौकरी के लिए प्रयास किया था लेकिन उसे कही काम नहीं मिल सका। उसके पर्स में भी पैसे नहीं बचे थे। ससुराल और मायका छोड़ने के बाद वह खुद को अकेला समझ रही थी। शायद इसी कारण वह डिप्रेशन में चली गई थी।