{"_id":"65c8307456bfeea66b0446eb","slug":"haldwani-violence-malik-became-the-owner-while-taking-care-of-the-land-2024-02-11","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Haldwani Violence: जमीन की देखरेख करते-करते मलिक बन बैठा मालिक, सरकारी भूमि पर कब्जा कर बनाया था धार्मिक स्थल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Haldwani Violence: जमीन की देखरेख करते-करते मलिक बन बैठा मालिक, सरकारी भूमि पर कब्जा कर बनाया था धार्मिक स्थल
Sun, 11 Feb 2024 09:41 AM IST
शाहरुख खान
हरीश पांडे, माई सिटी रिपोर्टर, हल्द्वानी
हरीश पांडे, माई सिटी रिपोर्टर, हल्द्वानी
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 11 Feb 2024 09:41 AM IST
सार
बनभूलपुरा हिंसा का मास्टर माइंड अब्दुल मलिक जमीन की देखरेख करते-करते मालिक बन गया। तत्कालीन कॉलोनियल सरकार ने मोहम्मद यासीन को 1937 में लीज दी थी। कई बार यह जमीन बिकी। मलिक के पिता को उपहार में मिली।
विज्ञापन
Haldwani Violence
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जिस भूमि पर विवाद चल रहा है। उस जमीन पर कई पेच हैं। जमीन किसी और को कृषि कार्य के लिए मिलती है। इसे किसी और को बेचा जाता है। बाद में जमीन अब्दुल मलिक के पिता को उपहार में मिल गई। इसके बाद ये जमीन मलिक के पास आ जाती है।
बनभूलपुरा क्षेत्र में रहने वालों का दावा है कि कॉलोनियल सरकार ने मोहम्मद यासीन को वर्ष 1937 में यह जमीन कृषि के लिए लीज पर दी थी। अब्दुल मलिक और सफिया मलिक इस संपत्ति की देखरेख कर रहे थे। सफिया मलिक के वकील ने नगर निगम के 30 जनवरी को ध्वस्तीकरण संबंधित नोटिस के खिलाफ छह फरवरी को उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।
मलिक के वकील अहरार बेग का कहना है कि अख्तरी बेगम ने इसे मलिक के पिता अब्दुल हनीफ खान को 1994 में मौखिक उपहार (हिबा) के रूप में दे दिया था। उन्होंने कहा कि 2006 में उनके याचिकाकर्ता के पिता अब्दुल हनीफ खान ने उन्हें फ्रीहोल्ड अधिकार देने के लिए नैनीताल जिला प्रशासन से संपर्क किया था, लेकिन उन्हें जिला प्रशासन से कोई जवाब नहीं मिला।
विज्ञापन
उन्होंने 2007 में उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका दायर की। अधिकारियों को फ्रीहोल्ड अधिकार देने के लिए अदालत से निर्देश की मांग गई थी। 18 अगस्त 2007 को उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने एक समाधान के लिए नैनीताल कलेक्टर को निर्देश जारी किए थे। उस आदेश के बावजूद फ्रीहोल्ड अधिकारों पर कार्रवाई नहीं की जा सकी।
विज्ञापन
बनभूलपुरा क्षेत्र में रहने वालों का दावा है कि कॉलोनियल सरकार ने मोहम्मद यासीन को वर्ष 1937 में यह जमीन कृषि के लिए लीज पर दी थी। अब्दुल मलिक और सफिया मलिक इस संपत्ति की देखरेख कर रहे थे। सफिया मलिक के वकील ने नगर निगम के 30 जनवरी को ध्वस्तीकरण संबंधित नोटिस के खिलाफ छह फरवरी को उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।
विज्ञापन
मलिक के वकील अहरार बेग का कहना है कि अख्तरी बेगम ने इसे मलिक के पिता अब्दुल हनीफ खान को 1994 में मौखिक उपहार (हिबा) के रूप में दे दिया था। उन्होंने कहा कि 2006 में उनके याचिकाकर्ता के पिता अब्दुल हनीफ खान ने उन्हें फ्रीहोल्ड अधिकार देने के लिए नैनीताल जिला प्रशासन से संपर्क किया था, लेकिन उन्हें जिला प्रशासन से कोई जवाब नहीं मिला।
विज्ञापन
उन्होंने 2007 में उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका दायर की। अधिकारियों को फ्रीहोल्ड अधिकार देने के लिए अदालत से निर्देश की मांग गई थी। 18 अगस्त 2007 को उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने एक समाधान के लिए नैनीताल कलेक्टर को निर्देश जारी किए थे। उस आदेश के बावजूद फ्रीहोल्ड अधिकारों पर कार्रवाई नहीं की जा सकी।
वकील के अनुसार, पट्टे की समाप्ति के बाद उन्होंने कानून के अनुसार फ्रीहोल्ड अधिकारों के लिए आवेदन किया था। 2013 में उनके पिता अब्दुल हनीफ खान के निधन के बाद संपत्ति सफिया मलिक को हस्तांतरित कर दी गई थी।
यह मदरसा सफिया मलिक और उनके पति ने गरीब बच्चों के लिए धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए चलाया जा रहा था। हालांकि, उनकी बात सुने बिना, नगर निगम ने 27 जनवरी को संपत्ति पर जबरन कब्ज़ा करने की कोशिश की। तीन दिन बाद 30 जनवरी को नगर निगम ने ध्वस्तीकरण नोटिस दिया।
31 जनवरी को अब्दुल मलिक ने 2007 में उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में फ्रीहोल्ड अधिकार पारित करने और हल्द्वानी नागरिक निकाय को भूमि में हस्तक्षेप न करने का निर्देश देने के लिए डीएम से संपर्क किया। छह फरवरी को हल्द्वानी नगर निकाय के आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
अदालत ने आठ फरवरी को मामले की सुनवाई की और अगली सुनवाई 14 फरवरी तय की थी। आरोप लगाया कि अदालत ने अभी तक अपना अंतिम आदेश नहीं दिया है। इसके बाद भी निगम ने जल्दबाजी में यह कार्रवाई की।
नगर आयुक्त पंकज उपाध्याय ने बताया कि अब्दुल मलिक को पर्याप्त समय दिया गया। पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया। इसके बाद ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई।
नगर निगम के पास नजूल की 3966125 वर्गमीटर जमीन
सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई सूचना में नगर निगम ने बताया कि उसके पास 3966125 वर्ग मीटर नजूल भूमि है। यह भूमि पुराने नगर निगम क्षेत्र में है। हालांकि इसमें से कितनी जमीन फ्री होल्ड की गई है, यह जानकारी निगम ने अभी तक नहीं दी है।
सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई सूचना में नगर निगम ने बताया कि उसके पास 3966125 वर्ग मीटर नजूल भूमि है। यह भूमि पुराने नगर निगम क्षेत्र में है। हालांकि इसमें से कितनी जमीन फ्री होल्ड की गई है, यह जानकारी निगम ने अभी तक नहीं दी है।