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विश्व हृदय दिवस: छोटी उम्र में बढ़ रही दिल की धड़कन की चिंता, हल्द्वानी के सरकारी अस्पतालों में सुविधा नहीं

Tue, 29 Sep 2026 11:56 AM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, हल्द्वानी
अमर उजाला नेटवर्क, हल्द्वानी Published by: Heera Updated Tue, 29 Sep 2026 11:56 AM IST
सार

पहले दिल के मरीज आमतौर पर 40 की उम्र के बाद देखे जाते थे, लेकिन अब युवा और बच्चे भी दिल की बीमारी के कारण अस्पताल भर्ती हो रहे हैं। विडंबना यह है कि हल्द्वानी के सरकारी अस्पतालों में न कार्डियोलॉजिस्ट है और न एंजियोप्लास्टी की सुविधा।

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Haldwani Government hospitals have no cardiologists, angioplasty facilities.
हार्ट अटैक

विस्तार

अमूमन 40 की उम्र के बाद दिल के मरीज ज्यादा देखे जाते थे लेकिन अब युवा और बच्चे भी दिल की बीमारी के कारण अस्पताल भर्ती होने लगे हैं। विडंबना है कि हल्द्वानी के सरकारी अस्पतालों में न तो कार्डियोलॉजिस्ट है और एंजियोप्लास्टी की सुविधा है। सुशीला तिवारी राजकीय मेडिकल कॉलेज में स्थापित कैथ लैब हार्ट दिवस पर भी सुचारु नहीं हो सकी।

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हल्द्वानी के अस्पतालों में हर रोज 50 से अधिक बच्चे दिल की बीमारी के कारण या तो भर्ती हो रहे हैं या फिर उनकी ओपन हार्ट सर्जरी हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों में भी किसी भी प्रकार का तनाव और गलत खानपान आगे चलकर हृदय विकार के रूप में सामने आ रहा है। यही कारण है कि अब बच्चों में भी दिल के रोगी काफी ज्यादा आ रहे हैं।

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15 फीसदी रोगी 40 साल से कम उम्र के
कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. गौरव यादव के अनुसार, 40 साल की उम्र से कम हृदय रोगियों की संख्या 15 फीसदी तक पहुंच चुकी है। उनके पास हर रोज एक साल से कम उम्र से लेकर 17 साल तक के 25 बच्चे दिल की बीमारी के इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रकाश पंत के अनुसार कम उम्र में अचानक मौत के पीछे सडन कार्डियक अरेस्ट के अलावा हृदय की मांसपेशियों में सिकुड़न या जन्मजात हृदय संबंधी विकार भूमिका निभा सकते हैं। उनके पास करीब 40 बच्चे रोजाना हृदय संबंधी बीमारी के इलाज और जांच के लिए पहुंच रहे हैं। उन्होंने बताया कि बच्चों में होंठ, जीभ, नाखून, उंगलियों या शरीर के कुछ हिस्सों में बार-बार नीलापन, सांस फूलना, जल्दी थक जाना, दौड़ने या खेलने पर असामान्य परेशानी होने पर तुरंत दिखाएं।

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कोविड के बाद बढ़ी है ब्लड जमने की क्षमता
हृदय एवं वक्ष सर्जन डॉ. विकास सिंह ने बताया कि दो तीन साल में वह 35 बच्चों की ओपन हार्ट सर्जरी कर चुके हैं। कुछ बच्चों में बीमारी जन्मजात होती है जबकि कुछ में लक्षण बाद में सामने आते हैं। उन्होंने बताया कि कोविड के बाद ब्लड जमने की क्षमता बढ़ी है। इससे हार्ट पर विपरीत असर पड़ता है। उनका कहना है कि ज्यादा चलते रहिए, अनियंत्रित रक्तचाप को नियंत्रित करें और कोलेस्ट्रॉल की जांच करवाएं।

बदलती जीवनशैली बन रही दिल की दुश्मन
यहां बीडी पांडे जिला चिकित्सालय में हार्ट संबंधी मरीजों की संख्या बढ़ रही है। अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सुधांशु सिंह का कहना है कि आज कम उम्र के लोग भी हृदय रोगों की चपेट में आ रहे हैं। इसकी बड़ी वजह तनावपूर्ण जीवन, जंक फूड, मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और व्यायाम की कमी है। उनका कहना है कि हृदय रोगों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका समय रहते जोखिम कारकों की पहचान और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना है। उनके अनुसार, हार्टअटैक के मामलों में गोल्डन ऑवर सबसे अहम होता है। मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाने और तत्काल थ्रोम्बोलाइसिस शुरू करने से जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। समय पर इलाज मिलने से अब तक करीब 90 हार्ट अटैक पीड़ितों की जान बचाई जा चुकी है।

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