यहां मासूमों के सिर पर नाच रही मौत
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सरकार उसके मंत्री लाख दावा कर लें मगर शिक्षा विभाग भगवान भरोसे चल रहा है। कई स्कूल ऐसे हैं जो अब गिरे तब गिरे हाल में हैं। यहां मासूमों का भविष्य जरूर संवर रहा है मगर उनकी सुरक्षा की चिंता किसी को नहीं है। गरीब मां-बाप की मजबूरी है। यहां नहीं पढ़ाएं तो कहां पढ़ाएं लेकिन जिनके जिनके कंधों पर व्यवस्था बनाने और उसे अमलीजामा पहनाने की जिम्मेदारी है वे सब कुछ जानकर भी अनजान बने हुए हैं। अमर उजाला ऐसे स्कूलों के हाल की तस्वीर आपके सामने रख रहा है। पहली कड़ी में राजकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जवाहर ज्योति दमुवाढूंगा के हाल पर पेश है नवीन सक्सेना की रिपोर्ट-
हल्द्वानी। राजकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जवाहर ज्योति दमुवाढूंगा के कक्षा कक्षों का लिंटर कब धराशायी हो जाए, कुछ नहीं पता। 196 बच्चों की जान खतरे में डाल कर यहां कक्षाएं लगाई जा रही हैं।
इस स्कूल को 2006 में उच्चीकृत कर राजकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बना दिया गया लेकिन जर्जर भवन को लावारिस छोड़ दिया गया। वर्ष 1995 में निर्मित इस स्कूल में सात कक्षा कक्ष हैं लेकिन सभी इतने खस्ताहाल हैं कि किसका लिंटर कब गिर जाए कुछ नहीं कहा जा सकता। 25 सितंबर को कक्षा नौ में पढ़ाई के दौरान लिंटर से कुंडा निकलने से चलता हुआ पंखा भी गिर चुका है। एक छात्रा मोनिका टम्टा के हाथ में चोट भी आई थी। छात्रा के पिता गिरीश प्रसाद टम्टा ने इसकी शिकायत विभाग के अधिकारियों के साथ ही सिटी मजिस्ट्रेट से भी की थी मगर किसी ने इस घटना को गंभीरता से नहीं लिया। कक्षा कक्षों का लिंटर ही नहीं दीवारों में भी दरारें पड़ी हुई हैं। बरसात होने पर कमरों में लिंटर चारों ओर से टपकते हैं।
स्कूल लड़कियों का दाखिले लड़कों के
हल्द्वानी। प्रदेश की भाजपा सरकार एक ओर बेटी पढ़ाओ बेटी बढ़ाओ को बढ़ावा देने के लिए कई कार्यक्रमों पर जोर दे रही है, लेकिन शिक्षा विभाग का अपना अलग ही नियम है। राजकीय उच्चतर माध्यमिक कन्या विद्यालय जवाहर ज्योति दमुवाढूंगा भले ही कागजों में कन्या विद्यालय है मगर यहां छात्रों को भी प्रवेश दे दिया गया। छठी से आठवीं तक की कक्षाओं में लड़कों के भी दाखिले हैं। इस बारे में प्रधानाचार्य रिद्धी चौधरी का कहना है कि अभिभावकों के दबाव में लड़कों के प्रवेश करने पड़ते हैं।
स्कूल भवन जर्जर होने के बारे में विभागीय अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। मजबूरी वश बच्चों को इसी भवन में बैठा कर पढ़ाया जा रहा है। बच्चों को इन कमरों में न बैठाएं तो फिर कहां बैठाकर पढ़ाएं, इसकी भी तो कोई व्यवस्था नहीं है।
रिद्धी चौधरी, प्रधानाचार्य
स्कूल में जो कक्षा कक्ष जर्जर हैं उनमें बच्चों को बैठाने से मना किया गया है। विद्यालय में नए भवन के निर्माण का प्रोजेक्ट राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान में स्वीकृत हो गया है। मुख्यालय से बजट आवंटित होते ही इसका निर्माण शुरू हो जाएगा।
- हरेंद्र मिश्रा, खंड शिक्षा अधिकारी हल्द्वानी