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शारदा द्वीप में कोरिया की नाव से गश्त करेंगे वन कर्मी

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 13 Oct 2020 02:06 AM IST
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Forest personnel will patrol Korea's boat in Sharda Island
प्रतीकात्मक।
हल्द्वानी। भारत-नेपाल सीमा पर चंपावत जिले के शारदा द्वीप में गश्त के लिए अब उत्तराखंड वन विभाग कोरिया ब्रांड की हवा वाली नाव (इनफ्लेटेबल राफ्ट) का उपयोग करेगा। इसकी कीमत लगभग दो लाख रुपये है। इसके जल्द पहुंचने की उम्मीद है। यदि नेपाल की सीमा बंद हो भी जाती है तो भी गश्त करने वाले कर्मचारियों को शारदा द्वीप जाने के लिए कोई समस्या नहीं होगी।
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शारदा नदी के बीच में स्थित शारदा द्वीप में लगभग 1630 हेक्टेयर भूमि में प्राकृतिक वन है। हल्द्वानी वन प्रभाग का क्षेत्र चंपावत जिले में अंतरराष्ट्रीय सीमा नेपाल तक है। वन अधिकारियों के मुताबिक अब तक शारदा द्वीप पर गश्त करने के लिए पहला विकल्प नेपाल के कंचनपुर जिले के ब्रह्मदेव गांव को पार करने का था। दूसरे विकल्प के तौर पर शारदा नदी को पार कर वन कर्मियों को द्वीप पर पहुंचाया जा सकता है। कोरोना के चलते नेपाल ने सीमा को सील कर दिया। इससे शारदा द्वीप पर गश्त करने की दिक्कतों को देखते हुए वन विभाग ने इस द्वीप पर नियमित गश्त करने का फैसला किया है। हल्द्वानी वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी कुंदन कुमार ने बताया कि द्वीप पर आने-जाने के लिए एक विशेष नाव की व्यवस्था की जा रही है।
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इसे रखने में नहीं होती दिक्कत
हल्द्वानी। शारदा द्वीप पर गश्त करने के लिए वन विभाग ने नदी को पार करने को पहले मोटर बोट पर विचार किया लेकिन शारदा नदी के तल में विशाल शिलाखंड होने से नाव के ब्लेड टूटने का खतरा था। गश्त के बाद नाव को सुरक्षित रखने की भी समस्या थी। मोटर बोट के संचालन की लागत भी अधिक आ रही थी। इसे देखते हुए हवा वाली नाव को अधिक सुविधाजनक माना गया। इस नाव की विशेषता यह है कि इसमें गश्त करने के बाद हवा निकाल दी जाती है और उसे रेंज कार्यालय में भी सुरक्षित रखा जा सकता है।
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कर्मचारियों को दिया जा रहा है प्रशिक्षण
हल्द्वानी। हल्द्वानी वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी कुंदन कुमार ने बताया कि वन कर्मियों को नाव संचालित करने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। इस नाव में एक बार में सात से आठ कर्मचारी गश्त को जा सकते हैं। कर्मचारियों को सुरक्षा के लिए लाइफ जैकेट, हेलमेट, घुटने और कोहनी के बैंड आदि दिए जाएंगे।
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