Forest Fire: पिछले साल की तुलना में बढ़ीं वनाग्नि की घटनाएं, आने वाले दिन और चुनौतीपूर्ण होने की आशंका
Forest Fires in Uttarakhand: मौजूदा हालात आने वाले समय में प्रचंड गर्मी का संकेत दे रहे हैं, क्योंकि अप्रैल माह से ही धरती तपने लगी है। जाहिर है, गर्मी की यह मार वनों को अभी और झुलसाएगी।
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उत्तराखंड के कुमाऊं के जंगलों में लगी आग थमने का नाम नहीं ले रही है। हालात ऐसे हैं कि आग को बुझाने के लिए सेना को उतारना पड़ा है। वायुसेना के हेलीकॉप्टर ने शनिवार से भीमताल झील से पानी भरकर जंगलों में पानी डालने का काम करना शुरू कर दिया है। शनिवार की सुबह वायुसेना के हेलीकॉप्टर ने भीमताल झील से पानी भरकर नैनीताल के जंगलों में लगी आग पर डाला। अगर पिछले साल के वनाग्नि की घटनाओं पर गौर करें तो अभी तक 245 से अधिक घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जोकि पिछले साल के आंकड़ों से 89 अधिक हैं।
आने वाले दिन इसलिए और चुनौतीपूर्ण
पारिस्थितिकी के बदलते हालात आने वाले समय में प्रचंड गर्मी का संकेत दे रहे हैं, क्योंकि अप्रैल माह से ही धरती तपने लगी है। जाहिर है, गर्मी की यह मार वनों को अभी और झुलसाएगी। इस बार मामला इसलिए भी गंभीर है, क्योंकि पिछले वर्ष नवंबर से अप्रैल तक वनाग्नि की कुल 156 घटनाएं घटीं और इस बार अभी अप्रैल खत्म नहीं हुआ और 245 से अधिक घटनाएं सामने आ चुकी हैं। मई में तापमान में और बढ़ोतरी होगी। जिससे वनों की मिट्टी की नमी घटेगी और सतही तापक्रम बढ़ने से सतह आग को भड़काने में मददगार साबित होगा। इसलिए आने वाले समय में ऐसी और भी घटनाएं सामने आ सकती हैं।
इंसान भी जंगलों की आग के जिम्मेदार
जानकार जंगलों के ज्यादा सुलगने की वजह तापमान में वृद्धि और खरपतवार जलाना को मान रहे हैं। उनका कहना है कि तमाम क्षेत्रों में सिविल क्षेत्र से आरक्षित वन क्षेत्र में आग पहुंच रही है। जंगलों में आग की एक अन्य वजह शहद के लिए जंगलों में जाकर मधुमक्खी का छत्ता काटना है।
जरा सी चूक में जल उठ रहे जंगल
बताया जाता है कि जंगलों से लगे आसपास के गांवों के लोग जंगलों में जाकर मधुमक्खी का छत्ता काटते हैं। इसके लिए आग जलाकर छत्ते पर धुआं लगाया जाता है। छत्ता काटने के लिए जलाई गई आग जंगल में छोड़ने से जंगल में आग भड़क जाती है।
प्रदेश में एक नवंबर 2023 से अप्रैल 2024 तक वनाग्नि के मामले
वर्ष घटनाएं प्रभावित क्षेत्र हेक्टेयर में
2022 446 593.19
2023 156 214.2
2024 245 256.57