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पिथौरागढ़ में जंगलों की आग से धारी में दो मकान खाक
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जंगलों में लगी आग की फैली धुंध के बाद धारचूला नगर का नजारा।
- फोटो : PITHORAGARH
पिथौरागढ़। जिला मुख्यालय के धारी गांव के जंगलों में लगी आग की चपेट में आकर दो मकान जल गए। तीसरे मकान को आग की चपेट में आने से बचा लिया गया।
ग्रामीणों ने घंटों की मशक्कत के बाद आग बुझाई। जंगलों की आग से पूरा शहर धुंध की चपेट में है। जिले में आग की घटनाएं इतनी अधिक हैं कि वन विभाग के 77 क्रू स्टेशन भी नाकाफी साबित हो रहे हैं।
जंगल की आग रविवार रात धारी जोशी ग्राम के तोक धारी बेड्डी तक पहुंच गई। इससे महेंद्र भट्ट, गिरीश चंद्र भट्ट के मकान में आग लग गई। आग से दोनों मकान जल गए।
गिरीश भट्ट का मकान भी आग की चपेट में आ गया था, लेकिन ग्रामीणों ने किसी तरह आग पर काबू पाया। गिरीश भट्ट ने बताया कि वह बड़ौली में रहते हैं। ग्रामीणों ने पांच घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
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आग की चपेट में आए मकानों में कोई नहीं रहता है। ग्रामीणों ने बताया कि अगर अग्निशमन की टीम भी मौके पर पहुंचती तो आग पर काबू नहीं पाती।
आग लगने की जानकारी हरीश चंद्र भट्ट ने दी। इसके बाद ग्रामीण पांच किलोमीटर पैदल चलकर घटनास्थल पर पहुंचे और आग पर काबू पाया।
इधर अस्कोट, कनालीछीना समेत दार्चुला नेपाल के जंगलों में लगी आग के कारण जौलजीबी, बलुवाकोट, कालिका और धारचूला नगर तक धुंध छाई रही।
वन रेंजर सुनील कुमार ने बताया कि नेपाल के दार्चुला जिले में लगातार जंगल में आग लगने और बारिश नहीं होने के सीमावर्ती इलाकों में इसका असर हो रहा है।
उन्होंने क्षेत्र के सरपंचों और कर्मियों को सजग रहने के निर्देश दिए हैं। इधर बंगापानी क्षेत्र में भी धुंध से दिन में अंधेरे जैसा लग रहा है। थल क्षेत्र में चारों ओर के जंगल पिछले 15 दिनों से जल रहे हैं।
इससे पूरा थल धुएं से भर गया है। आसमान में सूरज केवल लाल बिंदु की तरह दिखाई दे रहा है। आग की चपेट में आकर जिले में एक महिला की मौत हुई है।
धधक रहे जंगलों की सुध लेने वाला कोई नहीं
अस्कोट (पिथौरागढ़)। ओगला, भागीचौरा, जौरासी, अस्कोट, बेड़ा, गर्घा, कूटा के जंगलों में आग से पर्यावरण दूषित होने के साथ ही पारिस्थितिकी संतुलन भी बिगड़ रहा है। प्रदूषण से जहां लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है।
धुंध के कारण लोगों को स्वास्थ्य संबंधित दिक्कतें होने लगी हैं और आंखों के रोग होने की आशंका बढ़ गई है। ग्रामीण पहले ही जंगली जानवरों के आतंक से त्रस्त थे।
अब जंगलों में आग लगने से जंगली जानवरों के बस्ती में आने की आशंका बढ़ गई है। कांग्रेस नेता प्रदीप पाल ने वन विभाग से आग रोकने की मांग की है।
गैस चेंबर में बदल रहा है डीडीहाट
डीडीहाट (पिथौरागढ़)। एक माह से डीडीहाट के आसपास के जंगलों में धधकी आग से उठे धुएं के कारण पूरा क्षेत्र गैस चैंबर में बदल हो गया है। पमस्यारी, घनधूरा, चिरकटिया, मिर्थी, नारायणनगर, दूनाकोट क्षेत्र के जंगल एक माह से आग की चपेट में हैं।
जंगल के जलने से निकले धुएं ने पूरे नगर के आसपास के इलाके को गैस चैंबर में बदल दिया है। लोगों ने सुबह, शाम घूमना बंद कर दिया हैं। डॉक्टरों ने भी लोगों को अधिक से अधिक समय घरों पर ही रहने को कहा है।
जिले में 210 हेक्टेयर जंगल आग की चपेट में आ चुके हैं। 125 से अधिक आग की घटनाएं पूरे जिले में हो चुकी हैं। जिले में आग की घटनाओं की रोकथाम के लिए 77 क्रू स्टेशन बनाए गए हैं। इनमें 425 फायर वाचर कार्यरत हैं। अच्छी घास उगाने के चक्कर में लोग आग लगा रहे हैं। इन स्थानों पर स्थानीय लोगों को साथ लेकर आग की घटनाओं की रोकथाम के लिए कार्य किया जा रहा है।
- एनसी पंत, एसडीओ, वन विभाग।
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ग्रामीणों ने घंटों की मशक्कत के बाद आग बुझाई। जंगलों की आग से पूरा शहर धुंध की चपेट में है। जिले में आग की घटनाएं इतनी अधिक हैं कि वन विभाग के 77 क्रू स्टेशन भी नाकाफी साबित हो रहे हैं।
जंगल की आग रविवार रात धारी जोशी ग्राम के तोक धारी बेड्डी तक पहुंच गई। इससे महेंद्र भट्ट, गिरीश चंद्र भट्ट के मकान में आग लग गई। आग से दोनों मकान जल गए।
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गिरीश भट्ट का मकान भी आग की चपेट में आ गया था, लेकिन ग्रामीणों ने किसी तरह आग पर काबू पाया। गिरीश भट्ट ने बताया कि वह बड़ौली में रहते हैं। ग्रामीणों ने पांच घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
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आग की चपेट में आए मकानों में कोई नहीं रहता है। ग्रामीणों ने बताया कि अगर अग्निशमन की टीम भी मौके पर पहुंचती तो आग पर काबू नहीं पाती।
आग लगने की जानकारी हरीश चंद्र भट्ट ने दी। इसके बाद ग्रामीण पांच किलोमीटर पैदल चलकर घटनास्थल पर पहुंचे और आग पर काबू पाया।
इधर अस्कोट, कनालीछीना समेत दार्चुला नेपाल के जंगलों में लगी आग के कारण जौलजीबी, बलुवाकोट, कालिका और धारचूला नगर तक धुंध छाई रही।
वन रेंजर सुनील कुमार ने बताया कि नेपाल के दार्चुला जिले में लगातार जंगल में आग लगने और बारिश नहीं होने के सीमावर्ती इलाकों में इसका असर हो रहा है।
उन्होंने क्षेत्र के सरपंचों और कर्मियों को सजग रहने के निर्देश दिए हैं। इधर बंगापानी क्षेत्र में भी धुंध से दिन में अंधेरे जैसा लग रहा है। थल क्षेत्र में चारों ओर के जंगल पिछले 15 दिनों से जल रहे हैं।
इससे पूरा थल धुएं से भर गया है। आसमान में सूरज केवल लाल बिंदु की तरह दिखाई दे रहा है। आग की चपेट में आकर जिले में एक महिला की मौत हुई है।
धधक रहे जंगलों की सुध लेने वाला कोई नहीं
अस्कोट (पिथौरागढ़)। ओगला, भागीचौरा, जौरासी, अस्कोट, बेड़ा, गर्घा, कूटा के जंगलों में आग से पर्यावरण दूषित होने के साथ ही पारिस्थितिकी संतुलन भी बिगड़ रहा है। प्रदूषण से जहां लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है।
धुंध के कारण लोगों को स्वास्थ्य संबंधित दिक्कतें होने लगी हैं और आंखों के रोग होने की आशंका बढ़ गई है। ग्रामीण पहले ही जंगली जानवरों के आतंक से त्रस्त थे।
अब जंगलों में आग लगने से जंगली जानवरों के बस्ती में आने की आशंका बढ़ गई है। कांग्रेस नेता प्रदीप पाल ने वन विभाग से आग रोकने की मांग की है।
गैस चेंबर में बदल रहा है डीडीहाट
डीडीहाट (पिथौरागढ़)। एक माह से डीडीहाट के आसपास के जंगलों में धधकी आग से उठे धुएं के कारण पूरा क्षेत्र गैस चैंबर में बदल हो गया है। पमस्यारी, घनधूरा, चिरकटिया, मिर्थी, नारायणनगर, दूनाकोट क्षेत्र के जंगल एक माह से आग की चपेट में हैं।
जंगल के जलने से निकले धुएं ने पूरे नगर के आसपास के इलाके को गैस चैंबर में बदल दिया है। लोगों ने सुबह, शाम घूमना बंद कर दिया हैं। डॉक्टरों ने भी लोगों को अधिक से अधिक समय घरों पर ही रहने को कहा है।
जिले में 210 हेक्टेयर जंगल आग की चपेट में आ चुके हैं। 125 से अधिक आग की घटनाएं पूरे जिले में हो चुकी हैं। जिले में आग की घटनाओं की रोकथाम के लिए 77 क्रू स्टेशन बनाए गए हैं। इनमें 425 फायर वाचर कार्यरत हैं। अच्छी घास उगाने के चक्कर में लोग आग लगा रहे हैं। इन स्थानों पर स्थानीय लोगों को साथ लेकर आग की घटनाओं की रोकथाम के लिए कार्य किया जा रहा है।
- एनसी पंत, एसडीओ, वन विभाग।