फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Nainital News ›   Sitarganj prison killed two inmates, two recruitment

सितारगंज जेल के दो कैदियों की मौत, दो भर्ती

Sat, 12 Dec 2015 01:16 AM IST
ब्यूरो /अमर उजाला, हल्द्वानी/ सितारगंज। (नैनीताल)।
ब्यूरो /अमर उजाला, हल्द्वानी/ सितारगंज। (नैनीताल)। Updated Sat, 12 Dec 2015 01:16 AM IST
विज्ञापन

 ठंड बढ़ने के साथ ही हार्ट के मरीजों की परेशानी बढ़ने लगी है। संपूर्णानंद शिविर जेल (खुली जेल) के दो कैदियों की मौत हो गई। कैदी रतन सिंह को बृहस्पतिवार की सुबह हार्ट अटैक आने पर बंदी रक्षक उसे सुशीला तिवारी अस्पताल में लाए जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

विज्ञापन


इसी प्रकार शुक्रवार को भी बलात्कार मामले में सितारगंज शिविर के कैदी विजय कश्यप की भी अस्पताल लाते समय रास्ते में मौत हो गई। दो अन्य कैदियों को सुशीला तिवारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। आशंका है कि ठंड के चलते उम्रदराज कैदियों को हार्ट की परेशानी बढ़ रही है।
विज्ञापन


जेलर जयंत पांगती ने बताया कि 30 दिसंबर 1989 को उधमसिंह नगर जिले के शांतिपुरी -4 निवासी  रिटायर्ड फौजी रतन सिंह का देवनगर शक्तिफार्म गांव के मोहन सिंह से रास्ते को लेकर विवाद हो गया था।इस घटना में मोहन सिंह की हत्या हुई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


17 जनवरी 1992 को नैनीताल एडीजे कोर्ट ने हत्या की धारा 302 के तहत रतन को दोषी मानते हुए उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद रतन सिंह ने 2001 में हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए 29 अप्रैल 2008 को गैर इरादतन हत्या (आईपीसी की धारा 304 पार्ट वन) के तहत दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा में बदलाव कर उसे दस साल की सजा सुनाई थी।

जिसके बाद जुलाई 2008 से वह सजा भुगत रहा था। जेल अधीक्षक टीडी जोशी के अनुसार देहरादून जेल से दस माह पहले रतन सिंह को सितारगंज जेल में लाया गया था। बृहस्पतिवार की सुबह कैदी को दूसरी बार हार्ट अटैक पड़ गया। उसे लकवा भी हुआ था।

 आनन फानन में बंदी रक्षक उसे लेकर सुशीला तिवारी अस्पताल आए। शाम को डाक्टरों ने कैदी को मृत घोषित कर दिया। इसके पहले भी कैदी को हार्ट अटैक पड़ा था। उसे हत्या के मामले में दस साल की सजा हुई थी। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार जमीनी विवाद में रिटायर्ड फौजी के हाथों अपराध हो गया था।

 बेटे वीरेंद्र का कहना है कि उसके  पिता को अगले साल जनवरी में छूटने की संभावना थी। कैदी का तहसीलदार ने पंचायतनामा की कार्रवाई की। पोस्टमार्टम के बाद परिजन शव को लेकर चले गए। इसी जेल के तीन कैदियों प्रभु दयाल, आन सिंह और विजय कश्यप की हालत बिगड़ने पर बंदीरक्षक उनको लेकर सुशीला तिवारी अस्पताल आए।

यहां डाक्टरों ने कैदी विजय कश्यप को मृत घोषित कर दिया। बाकी दो कैदियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जेल अधीक्षक का कहना है कि विजय कश्यप को बलात्कार के मामले में सात साल की सजा हुई थी।

राजपुरा नयीबस्ती निवासी कैदी को देहरादून जेल से 15 मार्च 2015 को सितारगंज भेजा गया था। तीन दिनों से उसके थूक से खून निकल रहा था। इसी कारण उसको अस्पताल भेजा गया लेकिन उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। इस मामले में विजय के परिजनों को सूचना भेजी गई है।  


कैदी रतन सिंह बिष्ट  के छोटे पुत्र वीरेंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि पहली बार अटैक पड़ने पर डाक्टर ने विशेष दवा देने की सलाह दी थी। आरोप है कि जेल प्रशासन ने दवा महंगी होने के कारण नहीं खरीदी। उसने खुद दवा देने की कोशिश की थी लेकिन बंदी रक्षकों ने बाहर की दवा देने से मना कर दिया था। इस मामले में वह इलाज की जांच के लिए प्रार्थनापत्र देंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed