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करंट से रिटायर्ड फौजी की जान गई
Updated Sat, 04 Aug 2018 02:21 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
हल्द्वानी। चांदनी चौक घुड़दौड़ा में निर्माणाधीन मकान में शुक्रवार सुबह करंट लगने से रिटायर्ड फौजी की मौत हो गई।
अल्मोड़ा जिले के लमगड़ा जैती निवासी रिटायर्ड फौजी मदन सिंह (37) चांदनी चौक घुड़दौड़ा रामपुर रोड में जमीन खरीदकर मकान बनवा रहे थे। शुक्रवार सुबह 11 बजे मदन को पानी की मोटर चलाते वक्त करंट लग गया। करंट लगते ही वे पानी के टैंक में गिर गए। उधर, से गुजर रहे गांव निवासी नीरज बहुगुणा ने यह देख शोर मचा दिया। उस समय मदन की सांस चल रही थी। नीरज ने पड़ोसियों के सहयोग से उन्हें एसटीएच पहुंचाया। लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। नीरज का कहना था कि फौजी की मौत किस प्रकार हुई, उसे मालूम नहीं। पड़ोसियों ने बताया कि मदन तीन भाइयों में दूसरे नंबर के थे। अप्रैल में तीन कुमाऊं रेजीमेंट से मदन रिटायर हुए थे। उनकी शादी करीब दस साल पहले आशा से हुई थी लेकिन कोई संतान नहीं हुई। मकान बनवाने के लिए उन्होंने चांदनी चौक घुड़दौड़ा गांव में किराए का कमरा भी लिया था। मदन के साथी ने बताया कि उन्होंने चार साल तक राष्ट्रपति भवन में ड्यूटी की थी। मेडिकल चौकी पुलिस ने पूछताछ के बाद शव का पोस्टमार्टम कराया।
बसने से पहले उजड़ गया आशियाना
हल्द्वानी। मदन की पत्नी आशा का आशियाना बसने से पहले ही उजड़ गया। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद मदन ने सपना देखा था कि वे अपने परिवार के साथ नए घर में हंसी खुशी रहेंगे। लेकिन उनका ये सपना पूरा नहीं हो पाया। मौत की जानकारी मिलने पर बड़े भाई धन सिंह और छोटे भाई संजय सिंह परिवार के साथ मोर्चरी आए थे। परिजनों का रोते रोते बुरा हाल हो गया।
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अल्मोड़ा जिले के लमगड़ा जैती निवासी रिटायर्ड फौजी मदन सिंह (37) चांदनी चौक घुड़दौड़ा रामपुर रोड में जमीन खरीदकर मकान बनवा रहे थे। शुक्रवार सुबह 11 बजे मदन को पानी की मोटर चलाते वक्त करंट लग गया। करंट लगते ही वे पानी के टैंक में गिर गए। उधर, से गुजर रहे गांव निवासी नीरज बहुगुणा ने यह देख शोर मचा दिया। उस समय मदन की सांस चल रही थी। नीरज ने पड़ोसियों के सहयोग से उन्हें एसटीएच पहुंचाया। लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। नीरज का कहना था कि फौजी की मौत किस प्रकार हुई, उसे मालूम नहीं। पड़ोसियों ने बताया कि मदन तीन भाइयों में दूसरे नंबर के थे। अप्रैल में तीन कुमाऊं रेजीमेंट से मदन रिटायर हुए थे। उनकी शादी करीब दस साल पहले आशा से हुई थी लेकिन कोई संतान नहीं हुई। मकान बनवाने के लिए उन्होंने चांदनी चौक घुड़दौड़ा गांव में किराए का कमरा भी लिया था। मदन के साथी ने बताया कि उन्होंने चार साल तक राष्ट्रपति भवन में ड्यूटी की थी। मेडिकल चौकी पुलिस ने पूछताछ के बाद शव का पोस्टमार्टम कराया।
बसने से पहले उजड़ गया आशियाना
हल्द्वानी। मदन की पत्नी आशा का आशियाना बसने से पहले ही उजड़ गया। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद मदन ने सपना देखा था कि वे अपने परिवार के साथ नए घर में हंसी खुशी रहेंगे। लेकिन उनका ये सपना पूरा नहीं हो पाया। मौत की जानकारी मिलने पर बड़े भाई धन सिंह और छोटे भाई संजय सिंह परिवार के साथ मोर्चरी आए थे। परिजनों का रोते रोते बुरा हाल हो गया।
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