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हत्यारोपी पुलिस के हटने का आधे घंटे तक किया इंतजार
Updated Sat, 07 Jul 2018 02:12 AM IST
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हल्द्वानी। हत्यारोपी रिटायर्ड फौजी मोहन सिंह रावत ने मोबाइल व्यवसायी कुश बख्शी को गोली मारने से पहले यातायात निरीक्षक के घटनास्थल से हटने का आधे घंटे तक इंतजार किया था। पुलिस ने हत्यारोपी की बंदूक के साथ 12 बोर की सात जिंदा और एक खोखा कारतूस बरामद किए हैं।
मोबाइल व्यवसायी गौरव कुश बख्शी की हत्या से पहले यातायात निरीक्षक महेश चंद्रा कालाढूंगी रोड पर चेकिंग कर रहे थे। उन्होंने कुश की दुकान के सामने लगे शोकेश को रोड से उठाया। इसके बाद एक ई रिक्शा सहित तीन वाहनों का चालान किया। रोड से अतिक्रमण हटाने के बाद यातायात निरीक्षक आगे निकल गए। इस बीच बंदूक धारी पूर्व सैनिक मोहन सिंह रावत रोड पर टहलता रहा। पुलिस फोर्स के हटते ही पूर्व सैनिक दुकान में घुसा और उसने बंदूक से गोली चला दी। दुकानदार मौके पर ही ढेर हो गया। यातायात निरीक्षक का कहना था कि वे गोली की आवाज सुनते ही मौके पर तत्काल पहुंचे थे। उस समय आम लोग पूर्व सैनिक की धुनाई कर रहे थे लेकिन किसी ने घायल व्यवसायी को अस्पताल लेकर जाने की जहमत नहीं उठाई। पुलिस ने मौके से पूर्व सैनिक की लाइसेंसी बंदूक के साथ सात जिंदा और एक खोखा कारतूस बरामद किया। लोगों का कहना था कि यदि पूर्व सैनिक को पकड़ा नहीं जाता तो बड़ी घटना हो सकती थी। पूर्व सैनिक के पास गोली चलाने के लिए पर्याप्त कारतूस मौजूद थे।
संवेदनहीनता का वीडियो वायरल
व्यवसायी को गोली लगने पर उसे अस्पताल में भेजने की जगह कुछ संवेदनहीन लोग मोबाइल में आरोपी के पिटाई की वीडियो बनाते रहे। घायलों को अस्पताल लेकर जाने की संवेदना किसी ने नहीं दिखाई। सिर्फ एक दूसरे को 108 एंबुलेंस बुलाने की बात कर रहे थे। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है।
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सरेआम पिटाई से क्षुब्ध हो गया था पूर्व सैनिक
हल्द्वानी। हत्यारोपी पूर्व सैनिक को कोतवाली पुलिस ने अदालत के समक्ष पेश किया। अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में लेकर जेल भेज दिया। पूछताछ से पता चला कि मोबाइल ठीक कराने के लिए दिन में दुकान पर पहुंचे पूर्व सैनिक को लोगों ने पीटा था और इस वजह से उसने बदला लेने की ठान ली थी।
कोतवाली पुलिस ने गौरव कुश बख्शी की हत्या के मामले में बड़े भाई लव बख्शी ने तहरीर दी। पुलिस ने धारा 302 के तहत हत्या का मुकदमा दर्ज कर आरोपी मोहन सिंह रावत को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी बागेश्वर जिले के काफलीगैर बुहाला गांव का रहने वाला है। मुकदमे की विवेचना कोतवाल केआर पांडे कर रहे हैं। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह एचएमटी फैक्ट्री में दो माह से गार्ड की नौकरी कर रहा था। बृहस्पतिवार को दिन में 11 बजे उसने मोबाइल की बैटरी कुश बख्शी से ली थी। बैटरी चार्ज नहीं हो रही थी। इस बीच दुकानदार ने दो बार उसे मोबाइल मरम्मत के नाम पर दौड़ाया। दोनों के बीच विवाद बढ़ने पर उसने गुस्सा में आकर मोबाइल पटक दिया। मोबाइल से दुकानदार के पिता की फ्रेम में लगे फोटो का शीशा टूट गया। आरोप लगाया कि दुकानदार के साथ पड़ोसियों ने उसकी जमकर पिटाई की। उसके कपड़े फट गए। कोई बचाने के लिए आगे नहीं आया। इसके बाद उसने अपनी बेइज्जती का बदला लेने के लिए शाम को घटना को चेतावनी देकर अंजाम दिया। पुलिस को यह भी बताया कि वह 18 साल तक असम राइफल्स में रहा था। 2009 में वह सेना से सेवानिवृत्त हुआ था। उसके तीन बच्चे हैं।
व्यवसायी की हत्या रोकी जा सकती थी
हल्द्वानी। कालाढूंगी रोड स्थित दुकान में पूर्व सैनिक मोहन सिंह रावत और दुकानदार के बीच विवाद की शिकायत किसी ने कोतवाली पुलिस से नहीं की। मारपीट की घटना के बाद पड़ोसियों ने चुप्पी साध ली। यही चुप्पी दुकानदार के लिए जानलेवा बन गई।
एसएसपी जन्मेजय खंडूरी केे कार्यालय में घटना के बारे में व्यापारी शिकायत करने के लिए आए थे। व्यापारियों ने सवाल उठाया कि आरोपी पूर्व सैनिक कैसे बंदूक लेकर टहल रहा था। एसएसपी का कहना था कि दिन में विवाद होने पर कोतवाली पुलिस से शिकायत करनी चाहिए थी। लोग कालाढूंगी मंदिर के समीप तैनात पुलिसकर्मियों से भी शिकायत कर सकते थे। समय से शिकायत मिलने पर पुलिस आरोपी सैन्य कर्मी को पूछताछ के लिए थाने में बुला सकती थी। इससे घटना टाली जा सकती थी।
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मोबाइल व्यवसायी गौरव कुश बख्शी की हत्या से पहले यातायात निरीक्षक महेश चंद्रा कालाढूंगी रोड पर चेकिंग कर रहे थे। उन्होंने कुश की दुकान के सामने लगे शोकेश को रोड से उठाया। इसके बाद एक ई रिक्शा सहित तीन वाहनों का चालान किया। रोड से अतिक्रमण हटाने के बाद यातायात निरीक्षक आगे निकल गए। इस बीच बंदूक धारी पूर्व सैनिक मोहन सिंह रावत रोड पर टहलता रहा। पुलिस फोर्स के हटते ही पूर्व सैनिक दुकान में घुसा और उसने बंदूक से गोली चला दी। दुकानदार मौके पर ही ढेर हो गया। यातायात निरीक्षक का कहना था कि वे गोली की आवाज सुनते ही मौके पर तत्काल पहुंचे थे। उस समय आम लोग पूर्व सैनिक की धुनाई कर रहे थे लेकिन किसी ने घायल व्यवसायी को अस्पताल लेकर जाने की जहमत नहीं उठाई। पुलिस ने मौके से पूर्व सैनिक की लाइसेंसी बंदूक के साथ सात जिंदा और एक खोखा कारतूस बरामद किया। लोगों का कहना था कि यदि पूर्व सैनिक को पकड़ा नहीं जाता तो बड़ी घटना हो सकती थी। पूर्व सैनिक के पास गोली चलाने के लिए पर्याप्त कारतूस मौजूद थे।
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संवेदनहीनता का वीडियो वायरल
व्यवसायी को गोली लगने पर उसे अस्पताल में भेजने की जगह कुछ संवेदनहीन लोग मोबाइल में आरोपी के पिटाई की वीडियो बनाते रहे। घायलों को अस्पताल लेकर जाने की संवेदना किसी ने नहीं दिखाई। सिर्फ एक दूसरे को 108 एंबुलेंस बुलाने की बात कर रहे थे। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है।
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सरेआम पिटाई से क्षुब्ध हो गया था पूर्व सैनिक
हल्द्वानी। हत्यारोपी पूर्व सैनिक को कोतवाली पुलिस ने अदालत के समक्ष पेश किया। अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में लेकर जेल भेज दिया। पूछताछ से पता चला कि मोबाइल ठीक कराने के लिए दिन में दुकान पर पहुंचे पूर्व सैनिक को लोगों ने पीटा था और इस वजह से उसने बदला लेने की ठान ली थी।
कोतवाली पुलिस ने गौरव कुश बख्शी की हत्या के मामले में बड़े भाई लव बख्शी ने तहरीर दी। पुलिस ने धारा 302 के तहत हत्या का मुकदमा दर्ज कर आरोपी मोहन सिंह रावत को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी बागेश्वर जिले के काफलीगैर बुहाला गांव का रहने वाला है। मुकदमे की विवेचना कोतवाल केआर पांडे कर रहे हैं। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह एचएमटी फैक्ट्री में दो माह से गार्ड की नौकरी कर रहा था। बृहस्पतिवार को दिन में 11 बजे उसने मोबाइल की बैटरी कुश बख्शी से ली थी। बैटरी चार्ज नहीं हो रही थी। इस बीच दुकानदार ने दो बार उसे मोबाइल मरम्मत के नाम पर दौड़ाया। दोनों के बीच विवाद बढ़ने पर उसने गुस्सा में आकर मोबाइल पटक दिया। मोबाइल से दुकानदार के पिता की फ्रेम में लगे फोटो का शीशा टूट गया। आरोप लगाया कि दुकानदार के साथ पड़ोसियों ने उसकी जमकर पिटाई की। उसके कपड़े फट गए। कोई बचाने के लिए आगे नहीं आया। इसके बाद उसने अपनी बेइज्जती का बदला लेने के लिए शाम को घटना को चेतावनी देकर अंजाम दिया। पुलिस को यह भी बताया कि वह 18 साल तक असम राइफल्स में रहा था। 2009 में वह सेना से सेवानिवृत्त हुआ था। उसके तीन बच्चे हैं।
व्यवसायी की हत्या रोकी जा सकती थी
हल्द्वानी। कालाढूंगी रोड स्थित दुकान में पूर्व सैनिक मोहन सिंह रावत और दुकानदार के बीच विवाद की शिकायत किसी ने कोतवाली पुलिस से नहीं की। मारपीट की घटना के बाद पड़ोसियों ने चुप्पी साध ली। यही चुप्पी दुकानदार के लिए जानलेवा बन गई।
एसएसपी जन्मेजय खंडूरी केे कार्यालय में घटना के बारे में व्यापारी शिकायत करने के लिए आए थे। व्यापारियों ने सवाल उठाया कि आरोपी पूर्व सैनिक कैसे बंदूक लेकर टहल रहा था। एसएसपी का कहना था कि दिन में विवाद होने पर कोतवाली पुलिस से शिकायत करनी चाहिए थी। लोग कालाढूंगी मंदिर के समीप तैनात पुलिसकर्मियों से भी शिकायत कर सकते थे। समय से शिकायत मिलने पर पुलिस आरोपी सैन्य कर्मी को पूछताछ के लिए थाने में बुला सकती थी। इससे घटना टाली जा सकती थी।