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पूनम हत्याकांड की जांच के लिए 18 टीमें लगाई गई

Fri, 31 Aug 2018 02:24 AM IST
Updated Fri, 31 Aug 2018 02:24 AM IST
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पूनम हत्याकांड की जांच के लिए 18 टीमें लगाई गई
Hatya
हल्द्वानी। पूनम हत्याकांड के कातिलों तक पुलिस अब तक नहीं पहुंच पाई है मगर टीमों को जिस प्रकार की नई जानकारियां मिल रही है उससे पुलिस वाले भी दंग हैं। एसओजी और जिला पुलिस की टीमों ने बृहस्पतिवार को 23 युवक और नौ युवतियों से पूछताछ की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। अय्याशी करने में कई छात्रनेताओं के नाम बताए गए। ये छात्रनेता लड़कियों को नैनीताल और हल्द्वानी शहर के होटलों में ठहराते हैं।
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पुलिस की टीमों ने तीसरे दिन पूछताछ करने के लिए 23 युवक और नौ युवतियों को अलग-अलग समय पर बुलाया था। दस युवकों से बुधवार को ी पूछताछ की गई थी। भोटिया पड़ाव के छात्रनेता ने बताया कि वह दो तीन बार दो लड़कियों को लेकर भीमताल, भुजियाघाट ले गया था। एक कॉलेज के दो नामचीन छात्रनेताओं के नाम भी सामने आए हैं। पूछताछ में छात्रों ने यह भी बताया गया कि एक छात्रा का संदिग्ध अवस्था में वीडियो भी बनाया था। पुलिस के अनुसार बरेली रोड के एक व्यवसायी, ऊंचापुल, गोविंदपुरा, तिकोनिया के धनाढ्य परिवारों से जुड़े लड़कों की करतूतें सामने आई हैं। धनाढ्य परिवारों के ये युवक घर सेे कॉलेज के नाम पर निकलते हैं लेकिन भोटिया पड़ाव कांप्लेक्स में आने के बाद अय्याशी करते हैं। छात्राओं ने भी कई लोगों के राज पुलिस को बताए हैं।
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पुलिस पूछताछ में खुलासा, लड़कियों को नैनीताल और हल्द्वानी के होटलों में ठहराते हैं छात्रनेता
23 युवक और नौ युवतियों से पूछताछ हुई तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आई

सेक्स स्कैंडल के वीडियो की एसटीएफ करेगी जांच
एक छात्रा का संदिग्ध अवस्था में जो वीडियो वायरल हो रहा है उसे भीमताल स्थित होटल में तैयार किया गया था। इनमें तीन छात्र शामिल हैं। एसएसपी जन्मेजय खंडूरी का कहना है कि सेक्स स्कैंडल से जुड़े वीडियो व्हाट्सएप से वायरल किए गए हैं। एसटीएफ को वीडियो जांच के लिए भेजा जाएगा। साइबर लैब से पता चलेगा कि किन लोगों ने वीडियो वायरल किया है। इसी आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
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18 टीमें लगाईं, आईजी कानून व्यवस्था ने डेरा डाला
हल्द्वानी। पूनम हत्याकांड का खुलासा पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ है। जांच के लिए एसटीएफ सहित 18 टीमें लगाई गई हैं। पुुलिस तीन बिंदुओं को केंद्र में रखकर कातिलों की तलाश कर रही है। आईजी कानून व्यवस्था/एसटीएफ दीपम सेठ ने खुद नैनीताल में डेरा डाला है।
सर्किट हाउस में नैनीताल और ऊधमसिंह नगर के पुलिस अधिकारियों की संयुक्त बैठक के बाद आईजी ने बताया कि पूनम हत्याकांड को चुनौती के रूप में लिया गया है। इसी कारण जिला पुलिस ने 15, एसटीएफ ने दो और ऊधमसिंह नगर की एसओजी टीम को जांच में लगाया गया है। जांच के दायरे में तीन बिंदु पारिवारिक पहलू, गिरोह और रंजिश को रखा गया है। उन्होंन बताया कि संदिग्ध मोबाइल नंबरों से लेकर वायरल वीडियो की भी जांच हो रही है। उन्होंने बताया कि वह दो दिन नैनीताल में रहकर पुलिस कार्यों की समीक्षा करेंगं। बैठक में आईजी रेंज पूरन सिंह रावत, एसएसपी जन्मेजय खंडूरी, ऊधमसिंह नगर के एसएसपी सदानंद दांते, एसटीएफ एसएसपी रिद्धिम अग्रवाल, एसपी (आर) यशवंत सिंह चौहान, एसपी सिटी अमित श्रीवास्तव मौजूद थे।

साइबर क्राइम के लिए 800 पुलिसकर्मी प्रशिक्षित
आईजी कानून व्यवस्था/एसटीएफ ने बताया कि प्रदेश की कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने लिए 800 पुलिसकर्मियों को साइबर एक्सपर्ट के रूप में प्रशिक्षित किया गया है। ये पुलिसकर्मी मुस्तैदी से काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 112 नंबर शुरू करने में कुछ दिक्कतें आई हैं। यह जल्द शुरू हो जाएगा। हालांकि आईजी नैनीताल जिले में साइबर क्राइम की घटनाओं और उनके खुलासे पर कुछ नहीं बता पाए।

पड़ोसियों से जानकारी ली
आईजी कानून व्यवस्था दीपम सेठ ने गोरापड़ाव स्थित लक्ष्मीदत्त पांडे के घर जाकर पड़ोसियों से जानकारी ली है। एसएसपी एसटीएफ रिद्धिम अग्रवाल ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया।

62 टावरों से जुडे़ संदिग्ध नंबर जांच के दायरे में
हल्द्वानी। पूनम हत्याकांड की जांच में लगी पुलिस ने दायरा बढ़ा दिया है। अभी केवल गोरा पड़ाव (बरेली रोड) पर लगे मोबाइल टावरों के संदिग्ध नंबरों की जांच हो रही थी, लेकिन पुलिस ने बरेली रोड और शहर के 62 मोबाइल टावरों से संदिग्ध नंबरों की जांच शुरू कर दी है। अब तक 55 हजार मोबाइल नंबरों की जांच हो चुकी है।

पुलिस के अधिकारियों के अनुसार एसओजी ने शहर के सभी मोबाइल टावरों के नंबरों को उठाया है। हर टावर में दस हजार के इर्द गिर्द नंबर हैं। एक लाख 20 हजार नंबरों की तीन दिन से जांच चल रही है। एसओजी की टीमों ने 55 हजार नंबरों को बृहस्पतिवार दोपहर तक छांट लिया था। इनमें काफी लोगों के नंबर संदेह के दायरे में आए हैं। अभी 65 हजार नंबरों की जांच का काम चल रहा है। इनमें लड़कियों के नंबर भी शामिल हैं। इसके साथ ही संदिग्ध नंबरों की बी और सी पार्टी की जांच एसओजी के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है।
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