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दो इनामी मा ओवादियों की तलाश जारी
Updated Tue, 20 Mar 2018 01:52 AM IST
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हल्द्वानी। हंसपुर खत्ता मेें दूसरी बार असलहा बनाने की फैक्ट्री पकड़े जाने के बाद पुलिस और खुफिया एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। खुफिया एजेंसियों का मानना है कि अपने आकाओं को सुरक्षित रखने के लिए इनामी माओवादी पहाड़ को शरण स्थली के रूप में इस्तेमाल करना चाहते हैं। उधर, आईजी पूरन सिंह रावत का कहना है कि ट्रैपिंग कैमरे में नानकमत्ता के एक तस्कर की तस्वीर सामने आई है। इस मामले में रुद्रपुर पुलिस को जंगल में काबिंग करने के निर्देश दिए गए हैं।
हल्द्वानी वन प्रभाग की जौलासाल रेंज के चुगाड़ के कंपार्टमेंट आठ में डीएफओ डॉ. चंद्रशेखर सनवाल ने रविवार को 100 जवानों की फोर्स के साथ घेराबंदी कर देसी हथियार बनाने के लिए इस्तेमाल हो रहे ब्लेड, नाल आदि का जखीरा पकड़ा था। जौलासाल में दो साल में दूसरी बार हथियार बनाने के उपकरण पकड़ने के बाद अधिकारी सतर्क हो गए हैं। पुलिस माओवादी गतिविधियों पर फिर नजर रखने का दावा कर रही है। दरअसल, पच्चास हजार के इनामी देवेंद्र चम्याल और उसकी साथी भगवती भोज की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अधिकारियों को भरोसा था कि उत्तराखंड में माओवादियों का आका खीम सिंह बोरा को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। लेकिन छह माह बाद भी खीम सिंह और उसके साथी भास्कर पांडे का भी पता नहीं चल सका। पुलिस ने फरार भास्कर पांडे को गिरफ्तार करने के लिए पांच हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा है। खीम सिंह बोरा पर 2004 से 50 हजार का इनाम है। पुलिस को जांच से पता चला कि जेल में बंद देवेंद्र माओवादियों के इस्टर्न रीजनल ग्रुप का सदस्य है। खीम सिंह बोरा को सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। हर सदस्य और पदाधिकारी को कोरियर के माध्यम से पैसे मिलते हैं।
खुफिया अधिकारियों की जांच में आया है कि माओवादियों ने पहाड़ को ऑपरेशन के रूप में प्रयोग करने का इरादा छोड़ दिया है लेकिन इसे वह अपने आकाओं की शरणस्थली बनाने की फिराक में हैं। बिहार, छत्तीसगढ़ और झारखंड में पुलिस और अर्धसैनिक बलों का दबाव बढ़ने पर माओवादी पहाड़ की तरफ गोपनीय अड्डों में रह सकते हैं। माओवादियों का मानना है कि संगठन के झांसे में पहाड़ के पढ़े लिखे लोग नहीं आते हैं।
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हंसपुर खत्ता मेें असलहा बनाने की फैक्ट्री मिलने के बाद खुफिया एजेंसियां सक्रिय
दो इनामी माओवादियों तक अब तक नहीं पहुंच पाई है पुलिस
आकाओं को पहाड़ में शरण देने पहाड़ का कर सकते हैं इस्तेमाल
समय-समय पर पुलिस की गठित टीम जंगलों में खोजबीन करती हैं। ढाई महीने से इनामी माओवादियों के अड्डे का पता नहीं चल सका है। प्राथमिक जांच में हंसपुर खत्ता का मामला अपराधियों से जुड़ा पाया गया है।
-पूरन सिंह रावत आईजी रेंज कुमाऊं
हथियारों के साथ घूम रहे दो संदिग्धों की तस्वीरें कैद
हल्द्वानी। जौलासाल के जंगल में हथियारों की फैक्ट्री प्रकरण में वन विभाग के हाथ अहम सुराग लगे हैं। जंगल में लगाए ट्रैपिंग कैमरा में घटना स्थल के करीब हाथ में हथियार लेकर घूम रहे दो संदिग्धों की तस्वीरें कैद हुई हैं। वन अधिकारियों ने इन तस्वीरों के आधार पर बदमाशों की खोज शुरू कर दी है।
वन विभाग ने चुगाड़ और जौलासाल में लगे ट्रैपिंग कैमरा खंगाले तो दो संदिग्ध व्यक्तिों की तस्वीरें मिली हैं। इन तस्वीरों में संदिग्ध हाथ में हथियार लेकर घूम रहे हैं। वन अधिकारियों का मानना है कि इन संदिग्धों का फैक्ट्री से लेना-देना जरूर है। फिलहाल इन तस्वीरों को वन फोर्स को दिया जा रहा है। साथ ही मुखबिर नेटवर्क भी सक्रिय कर दिया गया है। वन विभाग इन शातिर बदमाशों की धरपकड़ में जुट गया है। वहीं जौलासाल रेंजर विनय त्रिपाठी ने भी आसपास का जंगल छाना है।
हथियारों के सौदागर पर घूमी शक की सुई
हल्द्वानी। वन अधिकारियों का कहना है कि प्रथम दृष्टया जांच में सामने आया है कि यहां जंगल में हथियार बना कर जंगल के रास्ते ही उप्र, ऊधमसिंह नगर में सप्लाई किए जाते हैं। पूर्व में भी जांच में ऐसा ही कुछ सामने आया था। वहीं माओवादी गतिविधियों को लेकर भी वन विभाग परेशान है। हंसपुरखत्ते के पास होने की वजह से इस ओर भी जांच की जा रही है।
पुलिस वन विभाग से ट्रैपिंग कैमरे की फुटेज हासिल करेगी। इसी आधार पर असलहा बनाने वालों को पुलिस पकड़ने का प्रयास करेगी। पुलिस तस्करों को पकड़ने के लिए संयुक्त रूप से जंगल में अभियान चलाएगी। इस मामले में वन विभाग के अधिकारियों से वार्ता हुई है।
जन्मेजय खंडूरी, एसएसपी
तीन साल पहले टांडा जंगल में भी पकड़ी गई थी फैक्ट्री
हल्द्वानी। कोतवाली पुलिस ने टांडा जंगल में भी तीन साल पहले असलहा बनाने की फैक्ट्री पकड़ी थी। पकड़े गए तीनों आरोपियों को अदालत से सजा मिली थी। टीपीनगर चौकी के तत्कालीन उपनिरीक्षक उमराव सिंह की अगुवाई में पुलिस ने 18 दिसंबर 2015 को टांडा जंगल में कांबिंग कर दो लोगों को पकड़ लिया था। मौके से भट्ठी का चरखा, ट्रेगर, चार 315 बोर की नाल, छीनी, घोड़ा, ट्रेगर डाई और बाइक मिली थी। रामपुर जिले के अल्लीपुर निवासी मुराद और शेर सिंह पुलिस के हत्थे चढ़े थे। मुख्य आरोपी रामपुर जिले के अल्लीपुर टांडा निवासी गुच्छन ने अदालत में समर्पण कर दिया था। कोर्ट ने 10 जुलाई 2017 को तीनों को तीन-तीन साल के कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई थी।
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हल्द्वानी वन प्रभाग की जौलासाल रेंज के चुगाड़ के कंपार्टमेंट आठ में डीएफओ डॉ. चंद्रशेखर सनवाल ने रविवार को 100 जवानों की फोर्स के साथ घेराबंदी कर देसी हथियार बनाने के लिए इस्तेमाल हो रहे ब्लेड, नाल आदि का जखीरा पकड़ा था। जौलासाल में दो साल में दूसरी बार हथियार बनाने के उपकरण पकड़ने के बाद अधिकारी सतर्क हो गए हैं। पुलिस माओवादी गतिविधियों पर फिर नजर रखने का दावा कर रही है। दरअसल, पच्चास हजार के इनामी देवेंद्र चम्याल और उसकी साथी भगवती भोज की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अधिकारियों को भरोसा था कि उत्तराखंड में माओवादियों का आका खीम सिंह बोरा को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। लेकिन छह माह बाद भी खीम सिंह और उसके साथी भास्कर पांडे का भी पता नहीं चल सका। पुलिस ने फरार भास्कर पांडे को गिरफ्तार करने के लिए पांच हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा है। खीम सिंह बोरा पर 2004 से 50 हजार का इनाम है। पुलिस को जांच से पता चला कि जेल में बंद देवेंद्र माओवादियों के इस्टर्न रीजनल ग्रुप का सदस्य है। खीम सिंह बोरा को सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। हर सदस्य और पदाधिकारी को कोरियर के माध्यम से पैसे मिलते हैं।
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खुफिया अधिकारियों की जांच में आया है कि माओवादियों ने पहाड़ को ऑपरेशन के रूप में प्रयोग करने का इरादा छोड़ दिया है लेकिन इसे वह अपने आकाओं की शरणस्थली बनाने की फिराक में हैं। बिहार, छत्तीसगढ़ और झारखंड में पुलिस और अर्धसैनिक बलों का दबाव बढ़ने पर माओवादी पहाड़ की तरफ गोपनीय अड्डों में रह सकते हैं। माओवादियों का मानना है कि संगठन के झांसे में पहाड़ के पढ़े लिखे लोग नहीं आते हैं।
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हंसपुर खत्ता मेें असलहा बनाने की फैक्ट्री मिलने के बाद खुफिया एजेंसियां सक्रिय
दो इनामी माओवादियों तक अब तक नहीं पहुंच पाई है पुलिस
आकाओं को पहाड़ में शरण देने पहाड़ का कर सकते हैं इस्तेमाल
समय-समय पर पुलिस की गठित टीम जंगलों में खोजबीन करती हैं। ढाई महीने से इनामी माओवादियों के अड्डे का पता नहीं चल सका है। प्राथमिक जांच में हंसपुर खत्ता का मामला अपराधियों से जुड़ा पाया गया है।
-पूरन सिंह रावत आईजी रेंज कुमाऊं
हथियारों के साथ घूम रहे दो संदिग्धों की तस्वीरें कैद
हल्द्वानी। जौलासाल के जंगल में हथियारों की फैक्ट्री प्रकरण में वन विभाग के हाथ अहम सुराग लगे हैं। जंगल में लगाए ट्रैपिंग कैमरा में घटना स्थल के करीब हाथ में हथियार लेकर घूम रहे दो संदिग्धों की तस्वीरें कैद हुई हैं। वन अधिकारियों ने इन तस्वीरों के आधार पर बदमाशों की खोज शुरू कर दी है।
वन विभाग ने चुगाड़ और जौलासाल में लगे ट्रैपिंग कैमरा खंगाले तो दो संदिग्ध व्यक्तिों की तस्वीरें मिली हैं। इन तस्वीरों में संदिग्ध हाथ में हथियार लेकर घूम रहे हैं। वन अधिकारियों का मानना है कि इन संदिग्धों का फैक्ट्री से लेना-देना जरूर है। फिलहाल इन तस्वीरों को वन फोर्स को दिया जा रहा है। साथ ही मुखबिर नेटवर्क भी सक्रिय कर दिया गया है। वन विभाग इन शातिर बदमाशों की धरपकड़ में जुट गया है। वहीं जौलासाल रेंजर विनय त्रिपाठी ने भी आसपास का जंगल छाना है।
हथियारों के सौदागर पर घूमी शक की सुई
हल्द्वानी। वन अधिकारियों का कहना है कि प्रथम दृष्टया जांच में सामने आया है कि यहां जंगल में हथियार बना कर जंगल के रास्ते ही उप्र, ऊधमसिंह नगर में सप्लाई किए जाते हैं। पूर्व में भी जांच में ऐसा ही कुछ सामने आया था। वहीं माओवादी गतिविधियों को लेकर भी वन विभाग परेशान है। हंसपुरखत्ते के पास होने की वजह से इस ओर भी जांच की जा रही है।
पुलिस वन विभाग से ट्रैपिंग कैमरे की फुटेज हासिल करेगी। इसी आधार पर असलहा बनाने वालों को पुलिस पकड़ने का प्रयास करेगी। पुलिस तस्करों को पकड़ने के लिए संयुक्त रूप से जंगल में अभियान चलाएगी। इस मामले में वन विभाग के अधिकारियों से वार्ता हुई है।
जन्मेजय खंडूरी, एसएसपी
तीन साल पहले टांडा जंगल में भी पकड़ी गई थी फैक्ट्री
हल्द्वानी। कोतवाली पुलिस ने टांडा जंगल में भी तीन साल पहले असलहा बनाने की फैक्ट्री पकड़ी थी। पकड़े गए तीनों आरोपियों को अदालत से सजा मिली थी। टीपीनगर चौकी के तत्कालीन उपनिरीक्षक उमराव सिंह की अगुवाई में पुलिस ने 18 दिसंबर 2015 को टांडा जंगल में कांबिंग कर दो लोगों को पकड़ लिया था। मौके से भट्ठी का चरखा, ट्रेगर, चार 315 बोर की नाल, छीनी, घोड़ा, ट्रेगर डाई और बाइक मिली थी। रामपुर जिले के अल्लीपुर निवासी मुराद और शेर सिंह पुलिस के हत्थे चढ़े थे। मुख्य आरोपी रामपुर जिले के अल्लीपुर टांडा निवासी गुच्छन ने अदालत में समर्पण कर दिया था। कोर्ट ने 10 जुलाई 2017 को तीनों को तीन-तीन साल के कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई थी।