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चित्रशिला की गंदगी ने छीना सुख चैन
कैलाश पाठक हल्द्वानी।
Updated Fri, 20 May 2016 01:42 AM IST
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चित्रशिला
- फोटो : अमर उजाला
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रानीबाग क्षेत्र के लोग चित्रशिला घाट में व्याप्त गंदगी से बेहद परेशान हैं। इसके अलावा कई कालोनियों में आज तक पानी के कनेक्शन नहीं होने से लोग परेशान हैं। वहीं गाव को सप्लाई होने वाली स्थानीय पेयजल लाइन का पुनर्गठन नहीं किए जाने से क्षेत्रवासियों को पानी का गंभीर संकट झेलना पड़ रहा है। असमान वितरण व्यवस्था भी इसके लिए जिम्मेदार है।
गौला में गंदगी के चलते स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि पूरे हल्द्वानी वासी दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। इस बार जंगलों में लगी आग के कारण भी पेयजल संकट गहराया है। पूर्व में जंगलों में आग लगने पर क्षेत्रवासी सहयोग करते थे लेकिन जब से जंगलों से उनके हक हकूक खत्म कर दिए गए, लोगों का भी जंगलों से मोह भंग हो गया है। क्षेत्रवासियों की तमाम समस्याएं हैं लेकिन उनकी समस्या का समाधान आज तक नहीं हुआ है।
फोटो
रानीबाग के इंदिरानगर निवासी पूर्व सैनिक जन सहयोग समिति अध्यक्ष किशन सिंह बिष्ट कहते हैं कि आधी कालोनी वासियों के पास पेयजल कनेक्शन नहीं है। इंदिरानगर इलाके के लोगों ने गौला नदी के पार प्राकृतिक जल स्रोत से पाइप बिछाए हैं। हवा में झूलते यह पाइप कई बार टूट जाते हैं और नदी में बह जाते हैं। सरकार ने पट्टे दिए हैं लेकिन उनको फ्री होल्ड नहीं किए जाने से परेशानी हो रही है।
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पूर्व प्रधान शोभा नौगाई का कहना है कि पेयजल संकट दूर करने के लिए ट्यूबवेल लगाया जाए। इंदिरानगर के अलावा शीतलापुरी तोक में भी पेयजल का गंभीर संकट है। वैकल्पिक व्यवस्था किया जाना नितांत जरूरी है।
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बीडीसी सदस्य महेश भंडारी कहते हैं कि इंदिरानगर के लिए गौला से नई पाइप लाइन बिछाई जानी चाहिए। क्षेत्र की टूटी-फूटी सड़कों की भी मरम्मत कराई जानी चाहिए।
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शिक्षक दीपक नौगाई कहते हैं कि चित्रशिला घाट में पूरे क्षेत्र के शव जलाए जाते हैं लेकिन नगर निगम घाट की नियमित सफाई नहीं कराता है। जिस कारण अधजले शव, अधजली लकड़ियां नदी के किनारे फैली रहती हैं, जिनसे दुर्गंध उठती रहती है। संक्रामक बीमारियों का खतरा बना है। चित्रशिला घाट के लिए प्रस्तावित विद्युत शवदाह गृह जल्द से जल्द स्वीकृत किया जाना चाहिए।
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वार्ड मेंबर रेवती बिष्ट कहती हैं गौला की गंदगी हर सप्ताह साफ की जानी चाहिए। प्रसिद्ध धार्मिक स्थल होने के कारण इलाके में पेयजल की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए। क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या पेयजल और गौला नदी में हो रही गंदगी है।
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गौला में गंदगी के चलते स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि पूरे हल्द्वानी वासी दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। इस बार जंगलों में लगी आग के कारण भी पेयजल संकट गहराया है। पूर्व में जंगलों में आग लगने पर क्षेत्रवासी सहयोग करते थे लेकिन जब से जंगलों से उनके हक हकूक खत्म कर दिए गए, लोगों का भी जंगलों से मोह भंग हो गया है। क्षेत्रवासियों की तमाम समस्याएं हैं लेकिन उनकी समस्या का समाधान आज तक नहीं हुआ है।
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रानीबाग के इंदिरानगर निवासी पूर्व सैनिक जन सहयोग समिति अध्यक्ष किशन सिंह बिष्ट कहते हैं कि आधी कालोनी वासियों के पास पेयजल कनेक्शन नहीं है। इंदिरानगर इलाके के लोगों ने गौला नदी के पार प्राकृतिक जल स्रोत से पाइप बिछाए हैं। हवा में झूलते यह पाइप कई बार टूट जाते हैं और नदी में बह जाते हैं। सरकार ने पट्टे दिए हैं लेकिन उनको फ्री होल्ड नहीं किए जाने से परेशानी हो रही है।
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पूर्व प्रधान शोभा नौगाई का कहना है कि पेयजल संकट दूर करने के लिए ट्यूबवेल लगाया जाए। इंदिरानगर के अलावा शीतलापुरी तोक में भी पेयजल का गंभीर संकट है। वैकल्पिक व्यवस्था किया जाना नितांत जरूरी है।
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बीडीसी सदस्य महेश भंडारी कहते हैं कि इंदिरानगर के लिए गौला से नई पाइप लाइन बिछाई जानी चाहिए। क्षेत्र की टूटी-फूटी सड़कों की भी मरम्मत कराई जानी चाहिए।
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शिक्षक दीपक नौगाई कहते हैं कि चित्रशिला घाट में पूरे क्षेत्र के शव जलाए जाते हैं लेकिन नगर निगम घाट की नियमित सफाई नहीं कराता है। जिस कारण अधजले शव, अधजली लकड़ियां नदी के किनारे फैली रहती हैं, जिनसे दुर्गंध उठती रहती है। संक्रामक बीमारियों का खतरा बना है। चित्रशिला घाट के लिए प्रस्तावित विद्युत शवदाह गृह जल्द से जल्द स्वीकृत किया जाना चाहिए।
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वार्ड मेंबर रेवती बिष्ट कहती हैं गौला की गंदगी हर सप्ताह साफ की जानी चाहिए। प्रसिद्ध धार्मिक स्थल होने के कारण इलाके में पेयजल की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए। क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या पेयजल और गौला नदी में हो रही गंदगी है।