फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Nainital News ›   Beggars can also be found in municipal

भिखारी भी ले सकता है नगर निगम की दुकानें

Sat, 31 Jan 2015 01:41 AM IST
निशांत खनी/अमर उजाला,हल्द्वानी
निशांत खनी/अमर उजाला,हल्द्वानी Updated Sat, 31 Jan 2015 01:41 AM IST
विज्ञापन
आर्थिक कंगाली से जूझ रहा हल्द्वानी नगर निगम बेहद दरियादिल है। दरियादिली ही निगम की आमदनी बढ़ाने के स्रोतों में सबसे बड़ा रोड़ा बन गई है। नगर निगम की दुकानें मात्र 66 रुपए महीने किराएदारी पर आवंटित हैं। इतने किराये में तो कोई भिखारी भी किराये पर दुकानें ले सकते हैं।
विज्ञापन


बाजार में जहां एक-एक करोड़ रुपए दुकान की पगड़ी और नैनीताल रोड पर 10 से 12 हजार रुपए स्कवायर फिट जमीन है वहीं नगर निगम ने दुकानें फोकट में आवंटित की हैं। इसमें भी समय पर दुकानों का किराया नहीं आता है।
विज्ञापन


हल्द्वानी एवं काठगोदाम क्षेत्र में नगर निगम की 1123 दुकानें व्यापारियों को आवंटित हैं। दुकानों से सालाना 42 लाख रुपए किराया आता है। पिछले दो सालों से दुकानों का करीब 90 लाख रुपए किराया बकाया है। इसमें 43 लाख रुपए इसी साल की बकाएदारी है। मंगल पड़ाव सब्जी मंडी में आवंटित करीब 35 दुकानों से नगर निगम को मात्र 800-800 रुपए सालाना किराया आता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

यानि 66 रुपए मासिक और दो रुपए बीस पैसे प्रतिदिन। दुकान किराए से अधिक व्यापारी रोजाना चाय पीने में उड़ा जाते हैं। न्यूनतम किराया देने में भी व्यापारी आनाकानी करते हैं। हालांकि, 2011 के बाद आवंटित कई दुकानों का किराया अधिकतम छह हजार रुपए मासिक तक है।

पांच साल में रिवाइज होता है किराया
नियमानुसार नगर निगम की दुकानों का किराया प्रत्येक पांच साल में रिवाइज होता है। इसमें साढ़े बारह फीसदी किराया वृद्धि होती है। यानि जिन दुकानों का किराया वर्तमान में 66 रुपए मासिक है पांच साल बाद साढ़े बारह फीसदी के हिसाब से उनमें मात्र आठ रुपए वृद्धि होगी, जबकि मार्केट में महंगाई और नगर निगम के खर्चों में इस अनुपात में कई गुना वृद्धि हो जाएगी।

मार्केट के हिसाब से किराया वसूलने की थी योजना
नगर निगम के चुनाव से पहले तत्कालीन प्रशासक निधिमणि त्रिपाठी ने नगर निगम की आवंटित दुकानों का किराया मार्केट के हिसाब से तय किया था। दुकानों के साइज और लोकेशन के हिसाब से व्यापारियों से किराया वसूला जाना था, लेकिन व्यापारियों ने इसका विरोध किया। मार्केट के हिसाब से दुकान किराया वसूला जाता, इससे पहले नगर निगम के चुनाव हो गए और किराया बढ़ाने का प्रस्ताव फाइल में गुम हो गया।

कर्मचारियों को आवंटित दुकानों पर ही लाखों का बकाया
नगर निगम अपने कर्मचारियों पर भी मेहरबान रहा है। नगर निगम के कई कर्मचारियों और उनके रिश्तेदारों को भी दुकानें आवंटित हैं। बकाएदारों में कर्मचारी भी शामिल हैं। नगर निगम सूत्रों के मुताबिक कर्मचारियों को आवंटित दुकानों का ही करीब 21 लाख रुपए बकाया है। इसकी वसूली के लिए कभी प्रयास नहीं हुए हैं। किराएदारों से बकाया वसूली शुरू होने से कर्मचारियों ने अपने नाम कटवाने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया है।

रिफ्यूजी क्वार्टरों का रिकार्ड नहीं
भारत-पाकिस्तान बंटवारे के बाद पाकिस्तान से आए रिफ्यूजी (शरणार्थियों) को कालाढूंगी रोड स्थित सत्यनारायण धर्मशाला के पास क्वार्टर और महिला अस्पताल के समाने दुकानें आवंटित की गई। क्वार्टर और दुकानों का रिकार्ड नगर निगम के पास नहीं है। तल्ली हल्द्वानी के राजेंद्र सिंह की आरटीआई में इसका खुलासा हुआ है। नगर निगम ने रिफ्यूजी क्वार्टर और दुकानों की जानकारी होने से इनकार किया है।


दुकानों की लोकेशन के हिसाब से किराया प्रति स्कवायर फिट निर्धारित करने की पालिसी तैयार हो चुकी है। पालिसी बोर्ड में स्वीकृत होने के बाद लागू की जाएगी। किराया वृद्धि होने से निगम की आमदनी बढ़ेगी। - डा. जोगेंद्र सिंह रौतेला, मेयर

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed