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बासमती धान को नहीं मिल रहे हैं खरीददार

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Mon, 19 Oct 2020 01:51 AM IST
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Basmati paddy is not getting buyers
प्रतीकात्मक फोटो।
हल्द्वानी। बासमती के निर्यात में भारी गिरावट आने से बासमती धान के दाम औंधे मुंह गिर गए हैं। पिछले साल तक 3500 रुपये प्रति क्विंटल बिकने वाले 1121 बासमती धान को 1500 रुपये क्विंटल में भी खरीदार नहीं मिल रहे हैं। इससे किसानों के सामने फसल बेचने का संकट खड़ा हो गया है। उधर, सरकारी तौल केंद्रों ने धान को ये कहते हुए लेने से मना कर दिया कि इस धान से चावल की रिकवरी नहीं होती है।
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भारत ईरान, सऊदी अरब समेत अरब देशों को बासमती चावल का निर्यात करता है। अमेरिका की ओर से ईरान में लगाए गए प्रतिबंध के कारण ईरान बासमती चावल नहीं ले रहा है। उधर कोरोना संक्रमण के चलते सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था में भी भारी उथल-पुथल मची है। उसका तेल निर्यात घट गया है। इसलिए सऊदी अरब ने भी आयात बंद कर दिया है। ऐसा ही हाल अन्य देशों का भी है।
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उधर, भारत के घरेलू बाजार में बासमती की डिमांड पहले से ही बहुत कम रही है। राइस मिलर्स हरीश कर्नाटक का कहना है कि भारत की 1121 बासमती प्रसिद्ध है। इसमें बासमती की तरह दिखने वाले मधुमती, सुनंदा, 1509 आदि प्रजातियों की मिलावट होती थी। उन्होंने कहा कि पिछले साल उन्होंने 1121 बासमती चावल 3300 रुपये क्विंटल में खरीदा था। इस बार निर्यात नहीं होने से ये बासमती धान 1500 रुपये प्रति क्विंटल में भी नहीं बिक रहा है।
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क्या बोले किसान -
- बासमती और उससे मिलते जुलते धान के दाम हर साल अच्छे मिलते थे। इस बार बाजार में सभी धान के दाम गिर गए हैं। बासमती धान को तो खरीदार ही नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में हम अपना धान कहां बेचें। - हेम बेलवाल, गौलापार
- पहले टाटा, चंदन, मधुमती, 1121 और 1509 धान बाजार में 2500 सौ रुपये से 3300 रुपये में आराम से बिक जाता था। यहां तक की बंजारे घर से ये धान खरीदकर के ले जाते थे। इस बार धान बिक नहीं रहा है। - भोपाल सिंह संभल, लक्ष्मपुर
- बासमती, मुधमती, सुनंधा आदि बासमती से मिलते जुलते धान को खरीदने के लिए पंजाब, यूपी और हरियाणा से बंजारे आते थे। वे खेत में ही धान का सौदा कर लेते थे। इस बार मंडी और खुलेबाजार में बासमती धान को कोई खरीदने को तैयार नहीं है। सरकार भी उनकी नहीं सुन रही है। - तपिश बडौला, गौलापार
पिछले साल इस तरह मिले थे भाव (रेट प्रति क्विंटल में)
- 1121 का भाव 3300 रुपये,
- 1509 किस्म धान का भाव 2800 रुपये
- मेनका, मधुमती, टाटा, 2366 व सुगंधा का भाव 2500 रुपये
क्या बोले, राइस मिलर्स
एक क्विंटल बासमती धान से 30 किलोग्राम ही चावल निकलता है, जबकि मोटे धान से एक क्विंटल धान से 60 किलोग्राम चावल निकल जाता है। ये धान खरीदकर अगर खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग को दिया जाए तो उन्हें बहुत नुकसान उठाना पड़ता है। उधर, निर्यात बंद है ऐसे में बासमती धान के खरीददार नहीं मिल रहे हैं। - हरीश कर्नाटक, राइस मिलर्स
बासमती चावल निर्यातक बोले
ईरान, सऊदी अरब में हमारी कंपनी हर साल सैकड़ों टन बासमती चावल का निर्यात करती थी। अमेरिका की ओर से ईरान में प्रतिबंध लगा दिया गया है। सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था खराब है। इस कारण निर्यात बंद है। - अरुण अग्रवाल, एमडी केएलए
रिकवरी नहीं आती, इसलिए नहीं खरीदती है सरकार
संभागीय खाद्य नियंत्रक ललित मोहन रयाल ने बताया कि सरकार एक क्विंटल धान से 67 किलोग्राम चावल की रिकवरी मिल से करती है। बासमती और बासमती से मिलते जुलते धान से चावल की रिकवरी करीब 30 प्रतिशत तक होती है। ऐसे में सरकारी तौल केंद्र में ये धान नहीं खरीदा जाता है।
खुले बाजार में मोटे धान के नहीं मिल रहे हैं खरीदार
हल्द्वानी। खुले बाजार में किसानों को मोटा धान खरीदने वाले खरीदार नहीं मिल रहे हैं। उधर सरकारी तौल केंद्रों में धान ने अब तक के सभी रिकार्ड तोड़ दिए हैं। 18 दिन में धान खरीद 6.31 लाख क्विंटल पहुंच गई है।

इस साल खुलेबाजार में किसानों का मोटा और ग्रेड-ए धान 1200 रुपये क्विंटल तक बिक रहा है। उधर सरकारी तौल केंद्रों में कॉमन धान 1868 रुपये और ग्रेड ए 1888 रुपये प्रति क्विंटल में बिक रहा है। खुलेबाजार में किसानों का धान नहीं बिकने के कारण वह सरकारी तौल केंद्रों में धान लेकर आ रहे हैं। आरएफसी ललित मोहन रयाल ने बताया कि किसानों के खातों में 72 घंटों के अंदर धान की पेमेंट की जा रही है। सरकारी तौल केंद्रों पर 18 दिन में 6.31 लाख क्विंटल धान खरीद हो गई है।
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