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Nainital News: क्रॉनिक मरीजों को भाया आयुर्वेद, गांवों तक पहुंची चिकित्सा
Wed, 23 Sep 2026 01:43 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Wed, 23 Sep 2026 01:43 AM IST
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हल्द्वानी।
बदलती जीवनशैली के बीच लंबे समय से चली आ रही बीमारियों से जूझ रहे मरीजों का भरोसा एक बार फिर आयुर्वेद की ओर बढ़ रहा है। हड्डी-जोड़ों के दर्द से लेकर त्वचा और पाचन संबंधी समस्याओं तक मरीज पंचकर्म, अग्निकर्म और अन्य आयुर्वेदिक उपचारों का रुख कर रहे हैं।
खास बात यह है कि आयुर्वेद की पहुंच अब शहरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि गांव-गांव खुली डिस्पेंसरी के जरिए लोगों को उपचार मिल रहा है। पाइल्स और भगंदर के इलाज में क्षारसूत्र चिकित्सा ने भी अपनी अलग पहचान बनाई है। एम्स दिल्ली और एम्स ऋषिकेश में भी क्षारसूत्र चिकित्सा की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। हालांकि हल्द्वानी और कुमाऊं में आयुर्वेद के सामने सबसे बड़ी चुनौती उपचार आयुष विभाग के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है।
वरिष्ठ आयुर्वेद डॉक्टर प्रदीप मेहरा ने बताया कि आयुर्वेद की ओपीडी में बड़ी संख्या ऐसे मरीजों की पहुंच रही है जिन्हें लंबे समय से बीमारी है। हड्डी-जोड़ों की समस्या, त्वचा रोग, पाचन संबंधी परेशानी और अन्य क्रॉनिक डिजीज में मरीज पंचकर्म, अग्निकर्म और अन्य आयुर्वेदिक उपचारों के लिए पहुंच रहे हैं। आयुष अस्पताल में ओपीडी 270 से अधिक पहुंच चुकी है।
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आयुर्वेद से आयुष तक बढ़ा दायरा
आयुर्वेद अब अकेली चिकित्सा पद्धति के रूप में नहीं, बल्कि आयुष व्यवस्था के व्यापक ढांचे का हिस्सा है। आयुर्वेद के साथ योग, यूनानी, होम्योपैथी, सिद्ध और प्राकृतिक चिकित्सा को मिलाकर आयुष विभाग बनाया गया है। ऐसे में विभाग के सामने सभी चिकित्सा पद्धतियों के लिए समान रूप से बुनियादी ढांचा विकसित करना चुनौती भी है। हालांकि हल्द्वानी में कुमाऊं का एकमात्र 50 बेड का आयुष अस्पताल में पदों का सृजन न हो पाने के कारण मरीजों की भर्ती शुरू नहीं हो सकी है। इसकी फाइल शासन स्तर पर लंबित है।
आयुर्वेद चिकित्सा और सुविधा में इजाफा हो रहा है। जहां एलोपैथी नहीं वहां गांव-गांव में आयुर्वेद की डिस्पेंसरी खुल चुकी हैं। नैनीताल जिले में ही 36 राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल, 2 आयुष विंग, 50 बेड का एक अस्पताल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में 13 आयुष विंग हैं। जिले में आयुर्वेद विभाग के अपने 18 भवन हैं। जल्द ही नए पंचकर्म सेंटर भी खुलने वाले हैं। -डॉ. बबीता कन्याल, जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी
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बदलती जीवनशैली के बीच लंबे समय से चली आ रही बीमारियों से जूझ रहे मरीजों का भरोसा एक बार फिर आयुर्वेद की ओर बढ़ रहा है। हड्डी-जोड़ों के दर्द से लेकर त्वचा और पाचन संबंधी समस्याओं तक मरीज पंचकर्म, अग्निकर्म और अन्य आयुर्वेदिक उपचारों का रुख कर रहे हैं।
खास बात यह है कि आयुर्वेद की पहुंच अब शहरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि गांव-गांव खुली डिस्पेंसरी के जरिए लोगों को उपचार मिल रहा है। पाइल्स और भगंदर के इलाज में क्षारसूत्र चिकित्सा ने भी अपनी अलग पहचान बनाई है। एम्स दिल्ली और एम्स ऋषिकेश में भी क्षारसूत्र चिकित्सा की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। हालांकि हल्द्वानी और कुमाऊं में आयुर्वेद के सामने सबसे बड़ी चुनौती उपचार आयुष विभाग के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है।
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वरिष्ठ आयुर्वेद डॉक्टर प्रदीप मेहरा ने बताया कि आयुर्वेद की ओपीडी में बड़ी संख्या ऐसे मरीजों की पहुंच रही है जिन्हें लंबे समय से बीमारी है। हड्डी-जोड़ों की समस्या, त्वचा रोग, पाचन संबंधी परेशानी और अन्य क्रॉनिक डिजीज में मरीज पंचकर्म, अग्निकर्म और अन्य आयुर्वेदिक उपचारों के लिए पहुंच रहे हैं। आयुष अस्पताल में ओपीडी 270 से अधिक पहुंच चुकी है।
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आयुर्वेद से आयुष तक बढ़ा दायरा
आयुर्वेद अब अकेली चिकित्सा पद्धति के रूप में नहीं, बल्कि आयुष व्यवस्था के व्यापक ढांचे का हिस्सा है। आयुर्वेद के साथ योग, यूनानी, होम्योपैथी, सिद्ध और प्राकृतिक चिकित्सा को मिलाकर आयुष विभाग बनाया गया है। ऐसे में विभाग के सामने सभी चिकित्सा पद्धतियों के लिए समान रूप से बुनियादी ढांचा विकसित करना चुनौती भी है। हालांकि हल्द्वानी में कुमाऊं का एकमात्र 50 बेड का आयुष अस्पताल में पदों का सृजन न हो पाने के कारण मरीजों की भर्ती शुरू नहीं हो सकी है। इसकी फाइल शासन स्तर पर लंबित है।
आयुर्वेद चिकित्सा और सुविधा में इजाफा हो रहा है। जहां एलोपैथी नहीं वहां गांव-गांव में आयुर्वेद की डिस्पेंसरी खुल चुकी हैं। नैनीताल जिले में ही 36 राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल, 2 आयुष विंग, 50 बेड का एक अस्पताल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में 13 आयुष विंग हैं। जिले में आयुर्वेद विभाग के अपने 18 भवन हैं। जल्द ही नए पंचकर्म सेंटर भी खुलने वाले हैं। -डॉ. बबीता कन्याल, जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी