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Nainital News: विलुप्ति की कगार है धरती का एक अद्भुत जीव

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sat, 15 Feb 2025 01:53 AM IST
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An amazing creature of the earth is on the verge of extinction
पेंगोलिन। फाइल फोटो सौ वन विभाग - फोटो : फाइल फोटो सौ वन विभाग
विश्व पैंगोलिन दिवस आज
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हल्द्वानी। हर साल फरवरी के तीसरे शनिवार को पूरी दुनिया में विश्व पैंगोलिन दिवस मनाया जाता है। भारत में पैंगोलिन को सल्लू सांप भी कहा जाता है। दुर्भाग्यवश यह अब विलुप्ति के कगार पर है। इसके संरक्षण के लिए विश्व पैंगोलिन दिवस के उपलक्ष्य में उत्तराखंड वानिकी प्रशिक्षण संस्थान की ओर से शनिवार को क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा और हेरिटेज स्कूल लामाचौड़ के बच्चों का भ्रमण कार्यक्रम भी होगा।
उत्तराखंड वानिकी प्रशिक्षण संस्थान के उप निदेशक सूरज तिवारी कहते हैं कि छिपकली की तरह बनावट वाला पैंगोलिन बिना दांत वाला स्तनधारी जंतु है। इसके शरीर पर लकड़ी जैसे कठोर शल्क होते हैं। यह रात में सक्रिय रहने वाला जीव है। जीभ 25 सेमी तक लंबी और चिपचिपी होती है, जिसकी मदद यह एक दिन में हजारों चींटियों का शिकार कर लेता है। मुख्यतः चींटियां और दीमक खाकर जीवित रहने वाला यह जीव भूमिगत सुरंगों में रहता है। जब इस पर कोई अन्य जीव आक्रमण करता है, तो यह पूरी तरह सिकुड़ कर अपने शरीर को फुटबाल की गेंद की तरह गोल बना लेता है।
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यह मानवों पर कभी हमला नहीं करता, लेकिन अपराधी इसे अपने स्वार्थ के लिए मार डालते हैं। बताया कि वन्यजीव तस्करी दुनिया का चौथा सबसे बड़ा संगठित अपराध है। ड्रग्स, मानव तस्करी और नकली सामान की तस्करी के बाद इसका नंबर आता है। पैंगोलिन के शरीर पर फर के बजाय कठोर शल्क होते हैं, जो इसके अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुके हैं। ये शल्क पारंपरिक दवाओं और आभूषणों में इस्तेमाल किए जाते हैं, जिससे यह दुनिया का सबसे अधिक तस्करी किया जाने वाला स्तनधारी बन गया है।
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भारत में पैंगोलिन की दो प्रजातियाँ पाई जाती हैं। भारतीय पैंगोलिन शिवालिक पहाड़ियों से लेकर मैदानी क्षेत्रों में पाया जाता है। कुछ भूभाग जैसे पूर्वोत्तर आदि में चीनी पैंगोलिन भी मिलता है। भारत में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत पैंगोलिन को अनुसूची-I में शामिल किया गया है, जिससे इसे बाघ जितनी कानूनी सुरक्षा प्राप्त है। इसका शिकार और तस्करी गंभीर अपराध है, जिसमें कठोर सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है। इस हेतु जब तक समाज के लोग जागरूक नहीं होंगे, इसका संरक्षण एक चुनौती बना रहेगा। माई सिटी रिपोर्टर
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