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ले जाओ, जितना ले जा सकते हो

Mon, 30 Oct 2017 01:27 AM IST
Updated Mon, 30 Oct 2017 01:27 AM IST
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ले जाओ, जितना ले जा सकते हो
हल्द्वानी। गौला को लूटने की तैयारी की जा रही है। नदी के गेटों से उप खनिज की निकासी वजन (क्विंटल) में नहीं कर घनत्व (घनमीटर) में की जाएगी। एक-एक गेट पर सैकड़ों खनन वाहनों में उप खनिज की घनमीटर में माप करना मुश्किल या कहें असंभव होगा, जिससे सीधे तौर पर उपखनिज चोरी को बढ़ावा मिलेगा। सूत्रों के मुताबिक निचले अधिकारी जहां इसका विरोध कर रहे हैं वहीं देहरादून में बैठे आला अफसरों ने घनमीटर में निकासी देने का मन बना लिया है। संभावना है कि सोमवार को होने वाली बैठक में इसकी अधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी।
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गौला में 11 गेटों से 7,450 डंपर, टिपर, ट्रक आदि और दो गेटों से घोड़े बुग्गियों से उप खनिज निकासी होती है। नदी से निकाले जाने वाले उप खनिज पर रायल्टी वसूलने के लिए इन वाहनों की तुलाई खनन गेटों पर लगे धर्मकांटों में होती है। इस साल नंधौर हल्द्वानी उज्ज्वल धर्मकांटा समिति ने स्टोन क्रशरों की तकनीकी औपचारिकताएं पूरी नहीं करने के बाद भी वित्तीय निविदा के लिए योग्य करार दिए जाने के विरोध में उच्च न्यायालय में अपील की है। वहीं खनन शुरू न होने पर राजस्व नुकसान को बचाने के लिए उच्च न्यायालय ने वन विकास निगम को अपनी सुविधानुसार खनन शुरू करने के आदेश दिए। इस पर वन विकास निगम ने खुद धर्मकांटा संचालन करने से इनकार कर दिया है जबकि कोई भी कंपनी पूरे खनन सत्र के लिए ही संचालन लेने को तैयार हैं एक माह के लिए नहीं। अब यहीं से खेल शुरू हुआ है। सूत्रों के मुताबिक गौला के खनन गेटों से उप खनिज निकासी के लिए इस बार उप खनिज की माप क्विंटल में नहीं बल्कि घन मीटर में की जाए। घनमीटर में उपखनिज की माप करना वन, वन निगम के कर्मियों के लगभग असंभव ही है, जो सीधे उप खनिज चोरी को बढ़ावा देगा।
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घन मीटर में इस तरह मिलेगा चोरी को बढ़ावा
1- एक वाहन पर चढ़ कर उप खनिज के ढेर पर चढ़ कर लंबाई, चौड़ाई, ऊंचाई लेना फिर गणना करना और रायल्टी वसूलने में वन कर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ेगी। वो भी तब जब एक गेट पर 800 से 1200 तक वाहन पंजीकृत हैं और वन, वन निगम पर फील्ड एवं तकनीकी स्टाफ की कमी है।
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2- कंप्यूटराइज्ड धर्मकांटों में सिर्फ पांच से 10 मिनट में तुलाई हो जाती है अब फील्ड स्टाफ माप करेगा तो 20 से 30 मिनट लग जाएगा ऐसे सुबह से शाम 300-400 वाहनों में ही हो जाएगा दूसरे वाहनों का नंबर नहीं आएगा।
3- हर वाहन की लंबाई, चौड़ाई, ऊंचाई अलग-अलग हैं ऐसे में हर वाहन की उप खनिज निकासी की घन मीटर में एक निश्चित सीमा भी निर्धारित नहीं की जा सकती है।
4- वाहन में उप खनिज कम व ज्यादा भरने से घनमीटर भी प्रभावित होगा ऐसे में एक सीमा बनाना भी चोरी को बढ़ावा देना होगा।
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