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बेड़ू पाको बारो मासा के सहारे बने चेयरमैन

Wed, 21 Nov 2018 01:47 AM IST
Updated Wed, 21 Nov 2018 01:47 AM IST
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बेड़ू पाको बारो मासा के सहारे बने चेयरमैन
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रामनगर (नैनीताल)। नगर पालिका में चेयरमैन पद पर हैट्रिक लगाने वाले कांग्रेस प्रत्याशी मोहम्मद अकरम पर्वतीय बहुल क्षेत्र में काफी लोकप्रिय हैं। वह कुमाऊंनी बोली के भी अच्छे वक्ता हैं, इसके साथ ही उन्होंने नए जमाने को देखते हुए बेड़ू पाको बारो मासा गाना...अपनी जनसभा में गाकर और अपनी आवाज टेप कर प्रचार गाड़ी में चलाने के अलावा सोशल मीडिया पर भी इसी गाने को गाकर पर्वतीय समाज में अच्छी पैठ बनाई। इस कारण भाजपा और निर्दलीय उम्मीदवार को मिले मतों का जोड़ तक मोहम्मद अकरम के आंकड़े के आसपास भी नहीं पहुंच पाया।
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मोहम्मद अकरम पर्वतीय क्षेत्रों में जनसभा के दौरान कुमाऊंनी भाषा का ज्यादा प्रयोग करते थे, जिससे लोग उनकी तरफ आकर्षित होते चले जा रहे थे। इसके साथ ही वह हमेशा रामलीलाओं में भी शिरकत किया करते थे और भगवानों के विषय में अपने संबोधन में अच्छी खासी जानकारी दिया करते थे। इससे लोग उनसे प्रभावित हुए। वह हमेशा अपने को अल्मोड़ा जिले का बताते हुए पहाड़ी समाज से जुड़ा बताते हैं।
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बेड़ूू पाको बारो मासा... के सहारे अकरम बने चेयरमैन
गाने गाकर पर्वतीय क्षेत्रों में अकरम ने बनाई अच्छी पैठ


ऐसा समर्थन की विपक्षी चारों खाने चित
रामनगर (नैनीताल)। कांग्रेस के प्रत्याशी को जिस तरह से जनता का आशीर्वाद मिला है, उससे देखकर नहीं लगता कि भाजपा व निर्दलीय प्रत्याशी यदि एकजुट होकर पर भी चुनाव लड़तीं तो नहीं हरा पातीं।
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कांग्रेस प्रत्याशी को हर वर्ग का वोट मिला है। एक ओर जहां भाजपा में रुचि गिरी शर्मा को टिकट दिए जाने से घमासान मचा हुआ था तो वहीं भाजपा से बागी होकर चुनाव लड़ने वाली ममता गोस्वामी ने भी चुनाव मैदान में उतरकर ताल ठोक दी थी। ऐसे में लगा कि शायद निर्दलीय प्रत्याशी कहीं भाजपा प्रत्याशी से अधिक वोट न हासिल कर ले। हालांकि शुरू से ही निर्दलीय प्रत्याशी ममता को भाजपा प्रत्याशी रुचि गिरि के वोट काटने वाले के रूप में देखा जा रहा था। लेकिन यह मिथक साबित हुआ। भाजपा प्रत्याशी को 8064 वोट मिले तो निर्दलीय प्रत्याशी ममता गोस्वामी को 3078 मिले। दोनों प्रत्याशियों को वोटों को जोड़ा जाए तो 11142 होते हैं, जबकि कांग्रेस के प्रत्याशी अकरम को 13425 वोट मिले हैं। ऐसे में साफ है कि यदि दोनों मिलकर भी चुनाव लड़तीं तो भी कांग्रेस प्रत्याशी को नहीं हरा पातीं। कांग्रेस प्रत्याशी को हर वार्ड से अच्छे वोट मिले हैं, ऐसे में साफ है कि हर वर्ग को रिझाने में कांग्रेस प्रत्याशी सफल हुए।
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