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महिला पर बाघ का हमला
Updated Sun, 28 Jan 2018 02:43 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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बिंदुखत्ता (नैनीताल)। आरक्षित वन क्षेत्र डाली में घास काटने गई एक महिला को बाघ ने मार डाला। दो महीने के अंदर गौला के जंगल में बाघ के हमले में जान गंवा देने की यह तीसरी घटना है। महिला की मौत के बाद नाराज ग्रामीणों ने बाघ को पकड़ने की मांग की है। ग्रामीणों ने इसके लिए जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा।
बौड़ खत्ता निवासी कुंदन सिंह बेलवाल की 50 वर्षीय पत्नी लछिमा देवी शुक्रवार को महिलाओं के साथ वन आरक्षित क्षेत्र डॉली के जंगल में घास काटने गई थी। इस दौरान एक बाघ ने हमला कर लछिमा को उठा लिया। बाघ महिला को घसीटता हुआ चार सौ मीटर तक ले गया। बाघ के हमले से घबराई महिलाओं ने शोर मचाया। इसके बाद फोन के जरिये महिलाओं ने गांव के लोगों और महिला के परिजनों को सूचना दी।
ग्रामीणों के मुताबिक दो माह भीतर गौला के जंगल में बाघ के हमले की यह तीसरी घटना है। अब तक महिला समेत तीन ग्रामीण इस बाघ का शिकार बन चुके हैं। बाघ के लगातार हमले से अब गांववाले भी दशहत में हैं। गांव वालों का कहना है कि बाघ के कारण उनकी दिनचर्या प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों ने वन विभाग पर भी लापरवाही का आरोप लगाया है। इनका कहना है कि लगातार तीन मौतों के बाद भी वन विभाग बाघ को मारने या पकड़ने की कोई कोशिश नहीं कर रहा है। नाराज गांव वालों को डॉली रेंज के वन क्षेत्राधिकारी एके जोशी और नगर कोतवाल ने बमुश्किल समझा कर शांत किया। बाद में महिला के शव का पंचनामा के बाद पोस्टमार्टम के लिए हल्द्वानी भेजा गया।
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घटना के बाद तहसील में एकत्रित कांग्रेस कार्यकर्ताओं और क्षेत्र के ग्रामीणों ने वन विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर बाघ को नरभक्षी घोषित कर मारने या फिर पकड़ने की मांग की है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष सतीश नैनवाल और पूर्व कैबिनेट मंत्री हरीशचंद्र दुर्गापाल के नेतृत्व में जिलाधिकारी को प्रेषित ज्ञापन की प्रति तहसील कर्मी को सौंपते हुए गौला के जंगल में लगातार ग्रामीणों पर हमला करने वाले बाघ को पकड़ने की मांग की। ज्ञापन सौंपने वालों में कांग्रेस के जिलाध्यक्ष सतीश नैनवाल, पूर्व कैबिनेट मंत्री हरीशचंद्र दुर्गापाल, कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष बलवंत दानू सहित अन्य कई मौजूद थे।
वन विभाग ने डीएनए जांच में जुटा
मौके से बरामद बाल देहरादून वन्य जीव संस्थान में भेजे गए हैं जांच के लिए
अभी यह स्पष्ट नहीं कि हमला करने वाला वन्य जीव बाघ है या तेंदुआ
वन विभाग ने कैमरा ट्रैप भी लगाए, समिति के गठन के लिए केंद्र को लिखा पत्र
हल्द्वानी। आरक्षित वन क्षेत्र डाली में महिला को शिकार बनाने वाले वन्य जीव की वन विभाग डीएनए परीक्षण करा रहा है। मौके से बरामद कुछ बाल इसके लिए देहरादून स्थित वन्य जीव संस्थान को भेजे गए हैं। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि महिला को बाघ ने मारा या तेंदुए ने। इसके साथ ही यह भी पड़ताल की जा रही है कि गौला के जंगल में तीन मौतों के लिए एक ही वन्य जीव जिम्मेदार है या अलग-अलग वन्य जीव हैं।
महिला की मौत के बाद हरकत में आए वन विभाग ने शनिवार को आरक्षित वन क्षेत्र डाली में घटनास्थल के पास कैमरा ट्रैप लगाए हैं। इसके साथ ही घटनास्थल से बाघ या तेंदुए के बाल भी मिले हैं। बाल और मल को डीएनए परीक्षण के लिए देहरादून भेजा गया है। अधिकारियों का कहना है कि डीएनए परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि यह वन्य जीव कौन सा है।
इसी के साथ जंगल में मानव शिकार की तीन घटनाओं के सामने आने के बाद वन विभाग ने अपनी तरफ से यह पड़ताल भी शुरू की है कि तीनों घटनाओं के लिए एक ही वन्य जीव जिम्मेदार है या इन घटनाओं को अलग-अलग वन्य जीवों ने अंजाम दिया है। वन अधिकारियों के मुताबिक तीन घटनाओं में से दो मामलों में शिकार को वन्य जीव ने खाया भी नहीं है। दो घटना स्थलों के बीच की दूरी भी 15 किलोमीटर से अधिक है। दो माह में तीन घटनाओं के सामने आने के बाद वन विभाग ने एक और कार्यवाही करते हुए केंद्र और मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक को समिति के गठन के लिए प्रस्ताव भी भेज दिया है। इस समिति में स्थानीय लोगों को भी शामिल किया जाता है। समिति ही इस मामले की पड़ताल करेगी।
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बौड़ खत्ता निवासी कुंदन सिंह बेलवाल की 50 वर्षीय पत्नी लछिमा देवी शुक्रवार को महिलाओं के साथ वन आरक्षित क्षेत्र डॉली के जंगल में घास काटने गई थी। इस दौरान एक बाघ ने हमला कर लछिमा को उठा लिया। बाघ महिला को घसीटता हुआ चार सौ मीटर तक ले गया। बाघ के हमले से घबराई महिलाओं ने शोर मचाया। इसके बाद फोन के जरिये महिलाओं ने गांव के लोगों और महिला के परिजनों को सूचना दी।
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ग्रामीणों के मुताबिक दो माह भीतर गौला के जंगल में बाघ के हमले की यह तीसरी घटना है। अब तक महिला समेत तीन ग्रामीण इस बाघ का शिकार बन चुके हैं। बाघ के लगातार हमले से अब गांववाले भी दशहत में हैं। गांव वालों का कहना है कि बाघ के कारण उनकी दिनचर्या प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों ने वन विभाग पर भी लापरवाही का आरोप लगाया है। इनका कहना है कि लगातार तीन मौतों के बाद भी वन विभाग बाघ को मारने या पकड़ने की कोई कोशिश नहीं कर रहा है। नाराज गांव वालों को डॉली रेंज के वन क्षेत्राधिकारी एके जोशी और नगर कोतवाल ने बमुश्किल समझा कर शांत किया। बाद में महिला के शव का पंचनामा के बाद पोस्टमार्टम के लिए हल्द्वानी भेजा गया।
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घटना के बाद तहसील में एकत्रित कांग्रेस कार्यकर्ताओं और क्षेत्र के ग्रामीणों ने वन विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर बाघ को नरभक्षी घोषित कर मारने या फिर पकड़ने की मांग की है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष सतीश नैनवाल और पूर्व कैबिनेट मंत्री हरीशचंद्र दुर्गापाल के नेतृत्व में जिलाधिकारी को प्रेषित ज्ञापन की प्रति तहसील कर्मी को सौंपते हुए गौला के जंगल में लगातार ग्रामीणों पर हमला करने वाले बाघ को पकड़ने की मांग की। ज्ञापन सौंपने वालों में कांग्रेस के जिलाध्यक्ष सतीश नैनवाल, पूर्व कैबिनेट मंत्री हरीशचंद्र दुर्गापाल, कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष बलवंत दानू सहित अन्य कई मौजूद थे।
वन विभाग ने डीएनए जांच में जुटा
मौके से बरामद बाल देहरादून वन्य जीव संस्थान में भेजे गए हैं जांच के लिए
अभी यह स्पष्ट नहीं कि हमला करने वाला वन्य जीव बाघ है या तेंदुआ
वन विभाग ने कैमरा ट्रैप भी लगाए, समिति के गठन के लिए केंद्र को लिखा पत्र
हल्द्वानी। आरक्षित वन क्षेत्र डाली में महिला को शिकार बनाने वाले वन्य जीव की वन विभाग डीएनए परीक्षण करा रहा है। मौके से बरामद कुछ बाल इसके लिए देहरादून स्थित वन्य जीव संस्थान को भेजे गए हैं। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि महिला को बाघ ने मारा या तेंदुए ने। इसके साथ ही यह भी पड़ताल की जा रही है कि गौला के जंगल में तीन मौतों के लिए एक ही वन्य जीव जिम्मेदार है या अलग-अलग वन्य जीव हैं।
महिला की मौत के बाद हरकत में आए वन विभाग ने शनिवार को आरक्षित वन क्षेत्र डाली में घटनास्थल के पास कैमरा ट्रैप लगाए हैं। इसके साथ ही घटनास्थल से बाघ या तेंदुए के बाल भी मिले हैं। बाल और मल को डीएनए परीक्षण के लिए देहरादून भेजा गया है। अधिकारियों का कहना है कि डीएनए परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि यह वन्य जीव कौन सा है।
इसी के साथ जंगल में मानव शिकार की तीन घटनाओं के सामने आने के बाद वन विभाग ने अपनी तरफ से यह पड़ताल भी शुरू की है कि तीनों घटनाओं के लिए एक ही वन्य जीव जिम्मेदार है या इन घटनाओं को अलग-अलग वन्य जीवों ने अंजाम दिया है। वन अधिकारियों के मुताबिक तीन घटनाओं में से दो मामलों में शिकार को वन्य जीव ने खाया भी नहीं है। दो घटना स्थलों के बीच की दूरी भी 15 किलोमीटर से अधिक है। दो माह में तीन घटनाओं के सामने आने के बाद वन विभाग ने एक और कार्यवाही करते हुए केंद्र और मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक को समिति के गठन के लिए प्रस्ताव भी भेज दिया है। इस समिति में स्थानीय लोगों को भी शामिल किया जाता है। समिति ही इस मामले की पड़ताल करेगी।