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मॉल हादसा: श्रम विभाग दर्ज कराएगा मुकदमा
Updated Wed, 28 Mar 2018 02:15 AM IST
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हल्द्वानी। आवास विकास के सामने ठंडी सड़क स्थित निर्माणाधीन मॉल में हुए हादसे में तीन मजदूरों की मौत के मामले में भले ही पुलिस कुछ नहीं कर पा रही है लेकिन श्रम विभाग ने अपने स्तर से जांच पड़ताल शुरू कर दी है। विभाग संविदा श्रम अधिनियम के उल्लंघन के मामले में मॉल स्वामियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करेगा और विभाग की ओर से मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। मृतक मजदूरों के वारिसों को मुआवजा दिलाने के लिए चार दिनों के भीतर श्रम न्यायालय में पीठासीन अधिकारी के समक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। श्रम न्यायालय से वारिसों और मॉल मालिकों को नोटिस जारी होंगे।
उपश्रमायुक्त कुमाऊं अनिल पेटवाल ने बताया कि निर्माणाधीन मॉल में हादसे की जानकारी का स्वत: संज्ञान लेते हुए यह जांच शुरू की गई है कि इसमें श्रम अधिनियमों का पालन नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि सहायक श्रमायुक्त कुमाऊं डीसी बिष्ट, श्रम प्रवर्तन अधिकारी मीनाक्षी कांडपाल के नेतृत्व में जांच टीम गठित की गई है। टीम मंगलवार दोपहर जब मॉल का निरीक्षण करने पहुंची तो वहां मौके पर एक भी मजदूर नहीं मिला। उपश्रमायुक्त ने बताया कि किसी भी निर्माणस्थल पर अगर 20 से अधिक श्रमिक काम करते हैं तो संविदा श्रम अधिनियम के अंतर्गत उसका पंजीयन श्रम विभाग में कराना जरूरी है। उन्होंने बताया कि श्रम विभाग की टीम इस बात की जांच कर रही है कि मॉल निर्माण में कितने श्रमिक काम कर रहे थे। श्रम अधिनियमों का कहां-कहां उल्लंघन किया गया है। उन्होंने बताया कि कर्मचारी प्रतिकर कानून 1923 के अंतर्गत श्रम न्यायालय के पीठासीन अधिकारी द्वारा मुआवजा तय किया जाएगा। मृतक श्रमिक के वारिसों को अधिकतम पांच लाख रुपये मुआवजा दिलाने का प्रावधान है।
संविदा श्रम अधिनियम उल्लंघन के मामले में कार्रवाई होगी
जांच टीम ने निर्माणाधीन मॉल हादसे की शुरू की जांच पड़ताल
मृतक तीन मजदूरों के वारिसों को मुआवजा दिलाया जाएगा
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उपश्रमायुक्त कुमाऊं अनिल पेटवाल ने बताया कि निर्माणाधीन मॉल में हादसे की जानकारी का स्वत: संज्ञान लेते हुए यह जांच शुरू की गई है कि इसमें श्रम अधिनियमों का पालन नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि सहायक श्रमायुक्त कुमाऊं डीसी बिष्ट, श्रम प्रवर्तन अधिकारी मीनाक्षी कांडपाल के नेतृत्व में जांच टीम गठित की गई है। टीम मंगलवार दोपहर जब मॉल का निरीक्षण करने पहुंची तो वहां मौके पर एक भी मजदूर नहीं मिला। उपश्रमायुक्त ने बताया कि किसी भी निर्माणस्थल पर अगर 20 से अधिक श्रमिक काम करते हैं तो संविदा श्रम अधिनियम के अंतर्गत उसका पंजीयन श्रम विभाग में कराना जरूरी है। उन्होंने बताया कि श्रम विभाग की टीम इस बात की जांच कर रही है कि मॉल निर्माण में कितने श्रमिक काम कर रहे थे। श्रम अधिनियमों का कहां-कहां उल्लंघन किया गया है। उन्होंने बताया कि कर्मचारी प्रतिकर कानून 1923 के अंतर्गत श्रम न्यायालय के पीठासीन अधिकारी द्वारा मुआवजा तय किया जाएगा। मृतक श्रमिक के वारिसों को अधिकतम पांच लाख रुपये मुआवजा दिलाने का प्रावधान है।
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संविदा श्रम अधिनियम उल्लंघन के मामले में कार्रवाई होगी
जांच टीम ने निर्माणाधीन मॉल हादसे की शुरू की जांच पड़ताल
मृतक तीन मजदूरों के वारिसों को मुआवजा दिलाया जाएगा