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राज्य बनने के बाद भी विकास को छटपटा रही ब्रिटिशकालीन पर्यटन नगरी
Updated Sat, 10 Nov 2018 12:04 AM IST
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। उत्तराखंड राज्य बने 18 साल पूरे हो चुके हैं, लेकिन इन 18 सालों में भी ब्रिटिशकालीन पर्यटन नगरी विकास के नाम पर उपेक्षित ही रही है, जबकि पर्यटन नगरी के हिसाब से राज्य बनने के बाद यहां विकास की उम्मीदें अधिक थी। जिले के नाम पर लोगों के साथ सिर्फ छलावा हुआ है।
रानीखेत चिलियानौला के नाम से इन वर्षों में जरूर नगरपालिका का गठन हुआ है, लेकिन इसमें भी रानीखेत क्षेत्र शामिल नहीं है। युवाओं के लिए खेल स्टेडियम का अभाव आज भी सालता ही रहता है। हर बार युवाओं को खेल के लिए सेना के मैदानों का मुंह ताकना पड़ता है। उत्तराखंड राज्य अब युवा हो चुका है, लेकिन विकास के नाम पर ब्रिटिशकालीन पर्यटन नगरी लगातार रसातल में जा रही है।
रानीखेत क्षेत्र कैंट बोर्ड के अधीन है। कैंट के कड़े कानूनों के चलते यहां नागरिकों को तमाम तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। भवन निर्माण सहित तमाम छोटे छोटे कार्यों के लिए भी लोग कैंट दफ्तर के चक्कर काटते रहते हैं। इसको देखते हुए लोग कैंट की सिविल एरिया को नगर पालिका बनाने की मांग कर रहे थे। हालांकि रानीखेत चिलियानौला नाम से नगरपालिका का गठन हो चुका है, लेकिन कैंट की सिविल एरिया को नगरपालिका में अभी तक विलय नहीं किया गया है।
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जिले की मांग 1955 से चली आ रही है। इसके लिए लोग आए दिन सड़कों पर रहते हैं, राज्य बनने के बाद जिला बनने की उम्मीद थी, 2011 में जिले की घोषणा सिर्फ कोरी साबित हुई। युवाओं के लिए खेल मैदान तक नहीं है। युवाओं ने यहां राजपुरा के छोटे से मैदान को किसी तरह खेलने योग्य बनाया है। 2016 में तत्कालीन सीएम हरीश रावत ने स्टेडियम की घोषणा की, लेकिन चयनित स्थल पर पेड़ों की अधिकता का मामला आड़े आ गया। मामला केंद्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय में लंबित पड़ा है।
कोट...........
राज्य बनने के बाद रानीखेत क्षेत्र का अपेक्षित विकास नहीं हुआ है। हर बार सरकारों ने जिले के नाम पर सिर्फ छलावा किया है। चिलियनौला नगर पालिका बनाई लेकिन उसमे रानीखेत के हिस्से को शामिल नहीं किया। कैंट के जटिल प्रावधानों के चलते यहां लोग भवन बनाने से कतरा रहे हैं। व्यवसाय पूरी तरह चौपट है। व्यापारी पलायन करने को विवश हो रहे हैं। रानीखेत क्षेत्र ब्रिटिशकालीन पर्यटन नगरी है। इसके लिए सरकारों को कुछ तो सोचना चाहिए। -मोहन नेगी, कैंट बोर्ड उपाध्यक्ष रानीखेत।
उत्तराखंड राज्य भाजपा सरकार ने बनाया है। रानीखेत का विकास भी भाजपा सरकार करेगी। जिले के लिए कांग्रेस लोगों को भ्रम में डाल रही है।
अजय टम्टा केंद्रीय कपड़ा राज्य मंत्री
रानीखेत चिलियानौला के नाम से इन वर्षों में जरूर नगरपालिका का गठन हुआ है, लेकिन इसमें भी रानीखेत क्षेत्र शामिल नहीं है। युवाओं के लिए खेल स्टेडियम का अभाव आज भी सालता ही रहता है। हर बार युवाओं को खेल के लिए सेना के मैदानों का मुंह ताकना पड़ता है। उत्तराखंड राज्य अब युवा हो चुका है, लेकिन विकास के नाम पर ब्रिटिशकालीन पर्यटन नगरी लगातार रसातल में जा रही है।
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रानीखेत क्षेत्र कैंट बोर्ड के अधीन है। कैंट के कड़े कानूनों के चलते यहां नागरिकों को तमाम तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। भवन निर्माण सहित तमाम छोटे छोटे कार्यों के लिए भी लोग कैंट दफ्तर के चक्कर काटते रहते हैं। इसको देखते हुए लोग कैंट की सिविल एरिया को नगर पालिका बनाने की मांग कर रहे थे। हालांकि रानीखेत चिलियानौला नाम से नगरपालिका का गठन हो चुका है, लेकिन कैंट की सिविल एरिया को नगरपालिका में अभी तक विलय नहीं किया गया है।
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जिले की मांग 1955 से चली आ रही है। इसके लिए लोग आए दिन सड़कों पर रहते हैं, राज्य बनने के बाद जिला बनने की उम्मीद थी, 2011 में जिले की घोषणा सिर्फ कोरी साबित हुई। युवाओं के लिए खेल मैदान तक नहीं है। युवाओं ने यहां राजपुरा के छोटे से मैदान को किसी तरह खेलने योग्य बनाया है। 2016 में तत्कालीन सीएम हरीश रावत ने स्टेडियम की घोषणा की, लेकिन चयनित स्थल पर पेड़ों की अधिकता का मामला आड़े आ गया। मामला केंद्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय में लंबित पड़ा है।
कोट...........
राज्य बनने के बाद रानीखेत क्षेत्र का अपेक्षित विकास नहीं हुआ है। हर बार सरकारों ने जिले के नाम पर सिर्फ छलावा किया है। चिलियनौला नगर पालिका बनाई लेकिन उसमे रानीखेत के हिस्से को शामिल नहीं किया। कैंट के जटिल प्रावधानों के चलते यहां लोग भवन बनाने से कतरा रहे हैं। व्यवसाय पूरी तरह चौपट है। व्यापारी पलायन करने को विवश हो रहे हैं। रानीखेत क्षेत्र ब्रिटिशकालीन पर्यटन नगरी है। इसके लिए सरकारों को कुछ तो सोचना चाहिए। -मोहन नेगी, कैंट बोर्ड उपाध्यक्ष रानीखेत।
उत्तराखंड राज्य भाजपा सरकार ने बनाया है। रानीखेत का विकास भी भाजपा सरकार करेगी। जिले के लिए कांग्रेस लोगों को भ्रम में डाल रही है।
अजय टम्टा केंद्रीय कपड़ा राज्य मंत्री