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तराई केंद्रीय वन प्रभाग

Mon, 16 Apr 2018 01:37 AM IST
Updated Mon, 16 Apr 2018 01:37 AM IST
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तराई केंद्रीय वन प्रभाग
हल्द्वानी। इस साल तराई के जंगल में करीब 122 हेक्टेयर में एक भी पौधा नहीं रोपा जा सका। वित्तीय वर्ष के अंतिम सप्ताह में बजट जारी करने के कारण यह स्थिति आई। वन प्रभाग ढाई लाख पौध लगाने थे लेकिन बजट वापस करना पड़ा।
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तराई केंद्रीय वन प्रभाग करीब 500 हेक्टेयर में इमारती लकड़ी समेत मिश्रित प्रजाति के पौधे रोपता है। इमारती लकड़ी के पौधे जैसे यूकेलिप्टिस, पापुलर आदि का वन विकास निगम कटान करता है। इससे वन विभाग को रायल्टी से हर साल 50-60 करोड़ रुपये की आय होती है। इस कमाऊ विभाग को भी समय से बजट नहीं दिया गया। इस साल तराई केंद्रीय वन प्रभाग को 24 मार्च को करीब 52 लाख रुपये का बजट दिया गया। अब इस बजट को महज एक हफ्ते में पौधारोपण, निराई गुड़ाई, देखभाल और इस प्रक्रिया में लगे सैकड़ों मजदूरों के खाते में आनलाइन ट्रांसफर करने के निर्देश दिए गए। एक हफ्ते में यह करना संभव ही नहीं था इसलिए तराई केंद्रीय ने बजट सरेंडर कर दिया। नतीजा इस साल तराई केंद्रीय में एक भी पौधा नहीं रोपा जा सका। इस साल रोपे गए पौधों को आठ साल बाद पेड़ बनने पर काट कर बिक्री की जाती है।
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यह तब है जबकि प्रदेश सरकार केंद्र से जंगल की पर्यावरणीय सेवाओं के नाम पर ग्रीन बोनस की मांग भी करती आ रही है। ये ढाई लाख पौधे लगते तो प्रदेश को आने वाले आठ साल तक पर्यावरणीय सेवा भी देते। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक इस मामले को सिर्फ व्यवसायिक नजर से ही देखा गया।
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तराई के जंगल में 122 हेक्टेयर में इस बार नहीं रोपा जा सका एक भी पौधा
500 हेक्टेयर के जंगल में इस साल लगने थे पौधे, वित्तीय वर्ष के अंत में मिलने से वन विभाग ने बजट किया सरेंडर

तराई केंद्रीय वन प्रभाग से तीन साल में हुई आय
साल आय
2015 54,71,85,820
2016 67,06,32,841
2017 19,76,57,464
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