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ऑक्सीजन के अभाव में चली गई जान
Updated Mon, 21 Aug 2017 02:16 AM IST
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हल्द्वानी। गोरखपुर मेडिकल कॉलेज जैसी लापरवाही रविवार को सोबन सिंह जीना बेस अस्पताल में भी सामने आ गई। ऑक्सीजन न मिलने से यहां एक मरीज की जान चली गई। अस्पताल में न तो बिजली थी और न ही जेनरेटर चल रहा था। अस्पताल से मेमो न जाने के कारण मरीज के भाई को पोस्टमार्टम कराने के लिए भी भटकना पड़ा।
रविवार को ग्राम प्रधान ललित मोहन सम्भल ओखलढूंगा विकास खंड भीमताल के गोपाल सिंह (59) को अपनी कार से लेकर बेस अस्पताल पहुंचे। आरोप है कि डॉक्टर ने इमरजेंसी से बाहर जाने को कह दिया। मरीज को बेड नंबर 14 पर लिटा दिया गया और पूर्वाह्न 11 बजे से दोपहर 12.15 बजे तक कोई इलाज नहीं किया गया। गोपाल सिंह की सांस काफी फूल रही थी। सांस लेने में दिक्कत आ रही थी। बेस अस्पताल में उस वक्त बिजली गुल थी और जेनरेटर भी नहीं चल रहा था।
प्रधान ने बताया कि दोपहर 12.18 बजे जब ऑक्सीजन सिलेंडर लगाया गया तो मरीज दम तोड़ चुका था। प्रधान ने कहा कि 108 एंबुलेंस को फोन किया गया था तो जवाब मिला कि हम ओखलढूंगा तक नहीं आ सकते। मरीज को काठगोदाम तक लेकर आ जाओ अस्पताल पहुंचा देंगे। उनका आरोप था कि अस्पताल से मेमो थाने को नहीं भेजा गया। प्रधान और अन्य लोग पोस्टमार्टम के लिए परेशान होते रहे। सीएमएस डॉ. एसबी ओली से बात होने के बाद मेमो थाने को गया और तब पोस्टमार्टम हो सका। मृतक के भाई ने पोस्टमार्टम को लेकर एक प्रार्थना पत्र हल्द्वानी कोतवाली में भी दिया।
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मैन्युअल सिलेंडर से क्यों नहीं दी गई ऑक्सीजन
मरीज की मौत में अस्पताल प्रशासन की लापरवाही सामने आ रही है। सवाल यह है कि अगर इमरजेंसी में मैन्युअल आक्सीजन सिलेंडर रखे थे तो मरीज को समय पर आक्सीजन क्यों नहीं दी गई। साथ ही निमोलाइजर क्यों नहीं लगाया गया। बिजली न होने और जेनरेटर न चलने के कारण निमोलाइन चलाना भी संभव नहीं था।
सीओपीडी के मरीज को आक्सीजन की जरूरत नहीं पड़ती है। इमरजेंसी में आक्सीजन सिलेंडर रखे हुए थे। मामले की जांच की जाएगी और इमरजेंसी में ड्यूटी पर मौजूद डाक्टर से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।
डॉ. एसबी ओली, सीएमएस, बेस अस्पताल
कोट
मुझे मामले की कोई जानकारी नहीं है। किसी ने भी कुछ नहीं बताया और मैं नैनीताल में हूं। मामले की जानकारी लेनेे के बाद ही कुछ टिप्पणी कर पाऊंगा।
दीपेंद्र कुमार चौधरी, जिलाधिकारी, नैनीताल
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रविवार को ग्राम प्रधान ललित मोहन सम्भल ओखलढूंगा विकास खंड भीमताल के गोपाल सिंह (59) को अपनी कार से लेकर बेस अस्पताल पहुंचे। आरोप है कि डॉक्टर ने इमरजेंसी से बाहर जाने को कह दिया। मरीज को बेड नंबर 14 पर लिटा दिया गया और पूर्वाह्न 11 बजे से दोपहर 12.15 बजे तक कोई इलाज नहीं किया गया। गोपाल सिंह की सांस काफी फूल रही थी। सांस लेने में दिक्कत आ रही थी। बेस अस्पताल में उस वक्त बिजली गुल थी और जेनरेटर भी नहीं चल रहा था।
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प्रधान ने बताया कि दोपहर 12.18 बजे जब ऑक्सीजन सिलेंडर लगाया गया तो मरीज दम तोड़ चुका था। प्रधान ने कहा कि 108 एंबुलेंस को फोन किया गया था तो जवाब मिला कि हम ओखलढूंगा तक नहीं आ सकते। मरीज को काठगोदाम तक लेकर आ जाओ अस्पताल पहुंचा देंगे। उनका आरोप था कि अस्पताल से मेमो थाने को नहीं भेजा गया। प्रधान और अन्य लोग पोस्टमार्टम के लिए परेशान होते रहे। सीएमएस डॉ. एसबी ओली से बात होने के बाद मेमो थाने को गया और तब पोस्टमार्टम हो सका। मृतक के भाई ने पोस्टमार्टम को लेकर एक प्रार्थना पत्र हल्द्वानी कोतवाली में भी दिया।
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मैन्युअल सिलेंडर से क्यों नहीं दी गई ऑक्सीजन
मरीज की मौत में अस्पताल प्रशासन की लापरवाही सामने आ रही है। सवाल यह है कि अगर इमरजेंसी में मैन्युअल आक्सीजन सिलेंडर रखे थे तो मरीज को समय पर आक्सीजन क्यों नहीं दी गई। साथ ही निमोलाइजर क्यों नहीं लगाया गया। बिजली न होने और जेनरेटर न चलने के कारण निमोलाइन चलाना भी संभव नहीं था।
सीओपीडी के मरीज को आक्सीजन की जरूरत नहीं पड़ती है। इमरजेंसी में आक्सीजन सिलेंडर रखे हुए थे। मामले की जांच की जाएगी और इमरजेंसी में ड्यूटी पर मौजूद डाक्टर से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।
डॉ. एसबी ओली, सीएमएस, बेस अस्पताल
कोट
मुझे मामले की कोई जानकारी नहीं है। किसी ने भी कुछ नहीं बताया और मैं नैनीताल में हूं। मामले की जानकारी लेनेे के बाद ही कुछ टिप्पणी कर पाऊंगा।
दीपेंद्र कुमार चौधरी, जिलाधिकारी, नैनीताल