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दर्दनाक: व्यवस्था ने उजाड़ दी गर्भवती कुंती की कोख
चंद्रेश पांडे
Updated Wed, 21 Aug 2013 10:47 AM IST
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उत्तराखंड के भीमताल में तीन दिन तक 300 किलोमीटर भागने के बाद आखिर कुंती हार गई। उसकी कोख को उजाड़ दिया सिस्टम ने।
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बागेश्वर जिले के दुर्गम गांव तल्लाभनार से गर्भस्थ शिशु को बचाने के लिए मौत से ‘जंग’ लड़ने वाली इस महिला का सफर भीमताल में खत्म हुआ और नौ महीने की कोख पलभर में जिंदगीभर का दर्द दे गई।
कुंती का बच्चा भले ही दुनिया में आने से पहले रुखसत हो गया पर उस नन्ही जान ने प्रदेश में पिछले 13 सालों से सुलग रहे सवालों को फिर ‘ज्वाला’ बना दिया है।
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उमेश सिंह की 35 साल की पत्नी कुंती का नौ माह का गर्भ था। 17 अगस्त को उसे प्रसव पीड़ा हुई तो वहीं से कुंती का बच्चे के लिए संघर्ष शुरू हुआ।
सड़क से सात किलोमीटर पैदल दूरी पर बसे अपने गांव से पहले कुंती पीड़ा सहते-सहते तिमलाबगड़ में सड़क तक पहुंची और वहां से गाड़ी में लदकर 120 किलोमीटर दूर बागेश्वर आई, लेकिन अफसोस।
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127 किलोमीटर तक उमेश और कुंती जिस व्यवस्था को कोस रहे थे उसने बागेश्वर में भी उनका पीछा नहीं छोड़ा। सरकारी अस्पताल ने लाचारी की ऐसी तस्वीर दिखाई कि उन्हें बच्चे को बचाने के लिए 90 किलोमीटर दूर अल्मोड़ा दौड़ना पड़ा।
17 अगस्त को ही अपराह्न ढाई बजे उसे महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। डाक्टरों ने प्रारंभिक जांच की। एक रात उसे भर्ती किया और अगले दिन 18 अगस्त को ऑपरेशन की बात कही।
सारी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी थी। पूरे दिन उमेश डाक्टरों से पूछता रहा कि ऑपरेशन कब होगा लेकिन डाक्टरों ने कुंती की कोई सुध नहीं ली। तमाशा देख रहे अल्मोड़ा के डाक्टरों ने 19 अगस्त अपराह्न तीन बजे कुंती का ऑपरेशन करने से हाथ खड़े कर दिए।
केस को गंभीर बताकर उसे हल्द्वानी एसटीएच रेफर कर दिया गया। अब मौत उसकी कोख के सामने थी और तीन दिन तक लड़ने वाली कुंती कमजोर।
गरमपानी के पास वैन में उसका आधा प्रसव हुआ। शिशु का धड़ बाहर आ गया लेकिन सिर गर्भ में ही फंसा रहा। इस वीभत्स तस्वीर के बावजूद आशा कार्यकत्री प्रेमा कोरंगा और 108 के स्टाफ ने सुरक्षित प्रसव के हरसंभव प्रयास किए, लेकिन गरमपानी से भीमताल तक लगभग 30 किलोमीटर के सफर में कुंती के बच्चे की मौत हो गई।
भीमताल में सीएचसी चिकित्सा अधीक्षक डा. सुधीर कन्याल के निर्देशन में आशा कार्यकत्री प्रेमा कोरंगा और नर्स हेमा बिष्ट ने किसी तरह लगातार बह रहे खून को रोक गर्भ में फंसे शिशु को बाहर निकालकर कुंती की जान बचाई पर इस घटना के बाद कुंती पूरी तरह टूट गई है। बेसुध पड़ी है अस्पताल के एक बिस्तर में।