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Kotdwar News: चकबंदी जागर यात्रा में ग्रामीणों ने उठाई पहाड़ बचाने की आवाज
Tue, 22 Sep 2026 04:00 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Tue, 22 Sep 2026 04:00 PM IST
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मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम को सौंपा आठ सूत्रीय मांगपत्र
सतपुली/चौबट्टाखाल। पहाड़ों में खेती और गांवों के अस्तित्व को बचाने के लिए मंगलवार को चौबट्टाखाल में चकबंदी जागर यात्रा निकाली गई। गरीब क्रांति अभियान उत्तराखंड और भलु लगद (फील गुड संस्था) की पहल पर आयोजित यात्रा में 100 से अधिक काश्तकारों, जनप्रतिनिधियों और चकबंदी कार्यकर्ताओं ने प्रतिभाग किया। प्रदर्शनकारियों ने उप जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को आठ सूत्री मांगपत्र भेजकर चकबंदी प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग की।
चकबंदी जागर यात्रा मुख्य बाजार से शुरू होकर तहसील मुख्यालय परिसर तक पहुंची। कार्यक्रम समन्वयक बलबंत सिंह गुसाईं ने कहा कि सरकार चकबंदी को पहाड़ी खेती और बागवानी के लिए महत्वपूर्ण बता रही है लेकिन इसके क्रियान्वयन की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि गांवों का अस्तित्व बचाने के लिए ग्रामीणों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ सकता है।
संस्था के संस्थापक सुधीर सुंद्रियाल ने वन्यजीवों से फसलों को हो रहे नुकसान का मुद्दा उठाते हुए खेती की सुरक्षा के लिए चकबंदी लागू करने की मांग की। समाजसेवी सुरेंद्र सिंह रावत ने पूर्व चयनित नोटिफाइड गांवों में तत्काल चकबंदी शुरू कर मॉडल विकसित करने की बात कही।
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इसके अलावा अनिवार्य चकबंदी की योजना बनाने, कृषि भूमि पर उगे वृक्षों पर काश्तकारों का अधिकार तय करने, वास्तविक फसल उत्पादक को वन्यजीव क्षति का मुआवजा देने, ब्लॉक स्तर पर कृषि विपणन केंद्र खोलने और ग्राम पंचायत स्तर पर तारबाड़ के लिए स्थायी बजट का प्रावधान करने की मांग भी शामिल है।
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सतपुली/चौबट्टाखाल। पहाड़ों में खेती और गांवों के अस्तित्व को बचाने के लिए मंगलवार को चौबट्टाखाल में चकबंदी जागर यात्रा निकाली गई। गरीब क्रांति अभियान उत्तराखंड और भलु लगद (फील गुड संस्था) की पहल पर आयोजित यात्रा में 100 से अधिक काश्तकारों, जनप्रतिनिधियों और चकबंदी कार्यकर्ताओं ने प्रतिभाग किया। प्रदर्शनकारियों ने उप जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को आठ सूत्री मांगपत्र भेजकर चकबंदी प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग की।
चकबंदी जागर यात्रा मुख्य बाजार से शुरू होकर तहसील मुख्यालय परिसर तक पहुंची। कार्यक्रम समन्वयक बलबंत सिंह गुसाईं ने कहा कि सरकार चकबंदी को पहाड़ी खेती और बागवानी के लिए महत्वपूर्ण बता रही है लेकिन इसके क्रियान्वयन की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि गांवों का अस्तित्व बचाने के लिए ग्रामीणों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ सकता है।
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संस्था के संस्थापक सुधीर सुंद्रियाल ने वन्यजीवों से फसलों को हो रहे नुकसान का मुद्दा उठाते हुए खेती की सुरक्षा के लिए चकबंदी लागू करने की मांग की। समाजसेवी सुरेंद्र सिंह रावत ने पूर्व चयनित नोटिफाइड गांवों में तत्काल चकबंदी शुरू कर मॉडल विकसित करने की बात कही।
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इसके अलावा अनिवार्य चकबंदी की योजना बनाने, कृषि भूमि पर उगे वृक्षों पर काश्तकारों का अधिकार तय करने, वास्तविक फसल उत्पादक को वन्यजीव क्षति का मुआवजा देने, ब्लॉक स्तर पर कृषि विपणन केंद्र खोलने और ग्राम पंचायत स्तर पर तारबाड़ के लिए स्थायी बजट का प्रावधान करने की मांग भी शामिल है।