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कौड़िया पट्टी में अज्ञात जानवर की दहशत
सतपुली/कोटद्वार
Updated Tue, 01 Dec 2015 10:12 PM IST
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जयहरीखाल ब्लाक की कौड़िया पट्टी में अज्ञात जानवर के मवेशियों पर हो रहे ताबड़तोड़ हमलों से ग्रामीण भारी दहशत में हैं। गत एक माह में क्षेत्र के कई गांवों की गोशालाओं की छतों और दरवाजों को उखाड़कर यह जानवर डेढ़ दर्जन से अधिक हमले कर चुका है। इन हमलों में चार गायों और दो बछड़ों का शिकार करने के साथ ही दर्जनभर से अधिक मवेशियों को यह जानवर घायल कर चुका है। क्षेत्र के महरगांव में दो गाय व एक बछड़ा, कुणझोली व बटनखेत में एक-एक गाय और गढ़कोट में एक बछड़ा इसका शिकार बन चुके हैं। इसके अलावा सारी तल्ली, भिताड़ा, महरगांव, खर्का, सगवाड़ी, सारी मल्ली और पाटीसैंण कस्बे में भी यह जानवर गौशालाओं को तोड़कर कई मवेशियों को घायल कर चुका है। पिछले एक माह से मवेशियों पर हो रहे इन ताबड़तोड़ हमलों के बाद ग्रामीण भारी दहशत में हैं। वन विभाग से कई बार इस जानवर से निजात दिलाने की मांग की जा चुकी है। इसके बावजूद अधिकारी बेखबर बने हुए हैं।
बछड़े को खूंटे समेत ले गया
रविवार रात को यह अज्ञात जानवर गढ़कोट के पूर्व प्रधान मदन पंवार की गोशाला का दरवाजा तोड़कर बछड़े को खूंटे सहित ले गया। सोमवार रात इसी गोशाला में दोबारा हमला कर गाय को भी घायल कर गया। शनिवार को भी इस जानवर ने सारी मल्ली के पशुपालक जगमोहन सिंह की गोशाला की छत को उखाड़कर उसकी गाय को घायल कर दिया गया था।
नहीं हो पा रही सही पहचान
कई मवेशियों का शिकार करने वाले इस जानवर की स्पष्ट पहचान नहीं हो पा रही है। बुजुर्ग इसे जहां चरक प्रजाति का गुलदार बता रहे हैं जो गोशाला की पठालें हटाने के बाद बल्लियों को खिसकाकर इस तरह से हमले करने के लिए कुख्यात है। इस जानवर की एक विशेष खासियत यह भी है कि, यह जानवरों को मारे बगैर उनके ऊपरी हिस्से को जिंदा ही खाना शुरू कर देता है जबकि गुलदार और भालू आमतौर पर जानवर की गर्दन दबाकर पहले उसे मार डालते हैं।
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वनमानुष जैसा देखे जाने का दावा
महरगांव के ग्रामीण जगत सिंह समेत कई लोगों ने इस जानवर को देखने का दावा किया है। वे कहते हैं कि काले रंग के वनमानुष की तरह दिखने वाले इस जानवर के शरीर के पिछले हिस्से में बहुत सारे बाल हैं जबकि आगे के हिस्से में बिल्कुल बाल नहीं हैं। इस जानवर के अपनी पिछली दो टांगों पर मनुष्य की तरह चलने और आगे की दो टांगों से हाथों का काम लेने की बात कही जा रही है।
हमलों की प्रकृति को देखते हुए इस अज्ञात हमलावर के भालू होने की शत प्रतिशत संभावना है। भालू के ऐसे हमले पूर्व में भी प्रकाश में आए हैं। जाड़े के इन दिनों में भालू शीतनिद्रा (सुषुप्त अवस्था) में जाने से पूर्व अपने शरीर में पर्याप्त मात्रा में वसा जमा करने के लिए इस प्रकार के हमलों को अंजाम देता है। अगले एक आध पखवाड़े में ठंड बढ़ने पर इस प्रकार की घटनाओं पर विराम लग जाएगा।
-नितिशमणि त्रिपाठी, डीएफओ लैंसडौन वन प्रभाग
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बछड़े को खूंटे समेत ले गया
रविवार रात को यह अज्ञात जानवर गढ़कोट के पूर्व प्रधान मदन पंवार की गोशाला का दरवाजा तोड़कर बछड़े को खूंटे सहित ले गया। सोमवार रात इसी गोशाला में दोबारा हमला कर गाय को भी घायल कर गया। शनिवार को भी इस जानवर ने सारी मल्ली के पशुपालक जगमोहन सिंह की गोशाला की छत को उखाड़कर उसकी गाय को घायल कर दिया गया था।
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नहीं हो पा रही सही पहचान
कई मवेशियों का शिकार करने वाले इस जानवर की स्पष्ट पहचान नहीं हो पा रही है। बुजुर्ग इसे जहां चरक प्रजाति का गुलदार बता रहे हैं जो गोशाला की पठालें हटाने के बाद बल्लियों को खिसकाकर इस तरह से हमले करने के लिए कुख्यात है। इस जानवर की एक विशेष खासियत यह भी है कि, यह जानवरों को मारे बगैर उनके ऊपरी हिस्से को जिंदा ही खाना शुरू कर देता है जबकि गुलदार और भालू आमतौर पर जानवर की गर्दन दबाकर पहले उसे मार डालते हैं।
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वनमानुष जैसा देखे जाने का दावा
महरगांव के ग्रामीण जगत सिंह समेत कई लोगों ने इस जानवर को देखने का दावा किया है। वे कहते हैं कि काले रंग के वनमानुष की तरह दिखने वाले इस जानवर के शरीर के पिछले हिस्से में बहुत सारे बाल हैं जबकि आगे के हिस्से में बिल्कुल बाल नहीं हैं। इस जानवर के अपनी पिछली दो टांगों पर मनुष्य की तरह चलने और आगे की दो टांगों से हाथों का काम लेने की बात कही जा रही है।
हमलों की प्रकृति को देखते हुए इस अज्ञात हमलावर के भालू होने की शत प्रतिशत संभावना है। भालू के ऐसे हमले पूर्व में भी प्रकाश में आए हैं। जाड़े के इन दिनों में भालू शीतनिद्रा (सुषुप्त अवस्था) में जाने से पूर्व अपने शरीर में पर्याप्त मात्रा में वसा जमा करने के लिए इस प्रकार के हमलों को अंजाम देता है। अगले एक आध पखवाड़े में ठंड बढ़ने पर इस प्रकार की घटनाओं पर विराम लग जाएगा।
-नितिशमणि त्रिपाठी, डीएफओ लैंसडौन वन प्रभाग