सार्वजनिक स्थानों पर चस्पा होगी बकायेदारों की सूची
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सावधान! यदि आपने गढ़वाल दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ (आंचल डेरी) का उधार नहीं लौटाया है, तो जल्द लौटा दें। ऐसा नहीं करने पर आपका नाम बकायेदारों की सूची में जगह-जगह चस्पा हो जाएगा। आंचल डेरी की उधार फंसी रकम को वापस लेने के लिए यूसीडीएफ (उत्तराखंड सहकारी डेरी फेडेरशन) वसूली की कार्रवाई करने के साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर बकायेदारों की सूची लगाने जा रहा है। इसके अलावा यूसीडीएफ डेरी के उन कर्मचारियों से वसूली करने के साथ ही गबन का मुकदमा पंजीकृत कराएगा, जिन्होंने व्यापारियों से रुपये ले लिए लेकिन लौटाए नहीं।
बता दें कि वर्ष 1991 में श्रीनगर में फीडर बैलेसिंग डेरी (आंचल डेरी) की स्थापना हुई थी। इसका मकसद पशुपालकों की आर्थिकी में सुधार, उपभोक्ताओं को सुविधा और रोजगार उपलब्ध कराना था। डेरी से रोजगार तो उपलब्ध हो गया, लेकिन दो उद्देश्य कुप्रबंधन और कर्मचारियों की लापरवाही से पूरे नहीं हो पाए। आंचल डेरी व्यवसायिक संस्था है। यानि कर्मचारी काम करके पैसे कमाएंगे, जिससे वेतन और अन्य खर्चें निकलेंगे।
पिछले एक दशक में डेरी की 36 लाख रुपये की रकम पौड़ी, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग व चमोली सहित अन्य जिलों में फंसी हुई है। व्यापारियों ने डेरी से दूध और दुग्ध उत्पाद खरीदे, लेकिन पैसा नहीं दिया। वहीं कतिपय कर्मचारियों ने बाजार से रकम तो ले ली, लेकिन इसको जमा नहीं कराया। हाल में डेरी प्रबंधन एक ऐसे ही कर्मचारी से लाखों की वसूली कर चुका है। यूसीडीएफ बाजार और कर्मचारियों के बीच फंसी ऐसी रकम को वसूल कर डेरी को पटरी पर लाने का विचार कर रहा है।
डेरी केे प्रबंधक को निर्देश दिए जा रहे हैं कि बाजार और कर्मचारियों से वसूली की जाए। जिन व्यापारियों या संस्था ने रुपये उधार नहीं चुकाया है, उनके नाम की सूची डेरी, तहसील और नगर पालिका कार्यालय समेत अन्य स्थानों में चस्पा की जाए। डेरी के कर्मचारियों पर सरकारी धन के गबन का मुकदमा भी किया जाएगा।
-ललित मोहन रयाल, प्रबंध निदेशक, यूसीडीएफ उत्तराखंड