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Kotdwar News: रास्ते के विवाद में निचली अदालत का आदेश निरस्त
Wed, 07 Oct 2026 06:40 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Wed, 07 Oct 2026 06:40 PM IST
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अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने सुनाया फैसला
कोटद्वार। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) रजनी शुक्ला की अदालत ने रास्ते के विवाद से जुड़े मामले में निचली अदालत के अंतरिम निषेधाज्ञा आदेश को निरस्त कर दिया। अदालत ने मामले में यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।
मामला पदमपुर, पट्टी सुखरो क्षेत्र का है। मुन्नी देवी और अर्जुन सिंह की ओर से वर्ष 2026 में अपील दायर की गई थी। अपील में 20 दिसंबर 2025 को सिविल जज (जूनियर डिवीजन), कोटद्वार की ओर से पारित अंतरिम निषेधाज्ञा आदेश को चुनौती दी गई थी। निचली अदालत ने धीरेंद्र सिंह और कमली देवी को विवादित रास्ते पर किसी तरह का अतिक्रमण या रास्ता बंद करने से रोक दिया था।
दूसरे पक्ष ने इसका विरोध करते हुए कहा कि उनके भूखंड के उत्तर दिशा में पहले से सरकारी गूल और उसके बाद करीब 3.5 फीट चौड़ा रास्ता मौजूद है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और दस्तावेजों का अवलोकन किया और अपील स्वीकार करते हुए निचली अदालत का आदेश निरस्त कर दिया।
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घरेलू हिंसा साबित, पति देगा पांच हजार मासिक किराया
कोटद्वार। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) प्रथम श्रेणी मनोज कुमार द्विवेदी ने घरेलू हिंसा के एक मामले में फैसला सुनाया है। न्यायालय ने पूजा के पति प्रदीप सिंह, ससुर प्रेम सिंह और सास मुन्नी देवी द्वारा घरेलू हिंसा किए जाने को साबित पाया। पति प्रदीप सिंह को पूजा को पांच हजार रुपये मासिक वैकल्पिक आवासीय भत्ता देने का आदेश दिया गया है।
पूजा ने घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 के तहत आवेदन किया था। उसने आरोप लगाया था कि शादी के बाद से उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया। बचाव पक्ष ने इन आरोपों का खंडन किया। न्यायालय ने पाया कि प्रदीप सिंह, प्रेम सिंह और मुन्नी देवी ने पूजा के साथ घरेलू हिंसा की है। पूजा को पहले से ही परिवार न्यायालय से आठ हजार रुपये मासिक भरण-पोषण मिल रहा है। न्यायालय ने इस राशि को पूजा के भरण-पोषण के लिए पर्याप्त माना। दिल्ली उच्च न्यायालय के एक निर्णय का हवाला देते हुए वैकल्पिक आवासीय भत्ता देने का आदेश दिया गया। संवाद
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कोटद्वार। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) रजनी शुक्ला की अदालत ने रास्ते के विवाद से जुड़े मामले में निचली अदालत के अंतरिम निषेधाज्ञा आदेश को निरस्त कर दिया। अदालत ने मामले में यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।
मामला पदमपुर, पट्टी सुखरो क्षेत्र का है। मुन्नी देवी और अर्जुन सिंह की ओर से वर्ष 2026 में अपील दायर की गई थी। अपील में 20 दिसंबर 2025 को सिविल जज (जूनियर डिवीजन), कोटद्वार की ओर से पारित अंतरिम निषेधाज्ञा आदेश को चुनौती दी गई थी। निचली अदालत ने धीरेंद्र सिंह और कमली देवी को विवादित रास्ते पर किसी तरह का अतिक्रमण या रास्ता बंद करने से रोक दिया था।
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दूसरे पक्ष ने इसका विरोध करते हुए कहा कि उनके भूखंड के उत्तर दिशा में पहले से सरकारी गूल और उसके बाद करीब 3.5 फीट चौड़ा रास्ता मौजूद है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और दस्तावेजों का अवलोकन किया और अपील स्वीकार करते हुए निचली अदालत का आदेश निरस्त कर दिया।
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घरेलू हिंसा साबित, पति देगा पांच हजार मासिक किराया
कोटद्वार। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) प्रथम श्रेणी मनोज कुमार द्विवेदी ने घरेलू हिंसा के एक मामले में फैसला सुनाया है। न्यायालय ने पूजा के पति प्रदीप सिंह, ससुर प्रेम सिंह और सास मुन्नी देवी द्वारा घरेलू हिंसा किए जाने को साबित पाया। पति प्रदीप सिंह को पूजा को पांच हजार रुपये मासिक वैकल्पिक आवासीय भत्ता देने का आदेश दिया गया है।
पूजा ने घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 के तहत आवेदन किया था। उसने आरोप लगाया था कि शादी के बाद से उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया। बचाव पक्ष ने इन आरोपों का खंडन किया। न्यायालय ने पाया कि प्रदीप सिंह, प्रेम सिंह और मुन्नी देवी ने पूजा के साथ घरेलू हिंसा की है। पूजा को पहले से ही परिवार न्यायालय से आठ हजार रुपये मासिक भरण-पोषण मिल रहा है। न्यायालय ने इस राशि को पूजा के भरण-पोषण के लिए पर्याप्त माना। दिल्ली उच्च न्यायालय के एक निर्णय का हवाला देते हुए वैकल्पिक आवासीय भत्ता देने का आदेश दिया गया। संवाद