{"_id":"575eedf44f1c1b094e11b7a7","slug":"children-read-poems-by-27-poets","type":"story","status":"publish","title_hn":"27 साहित्यकारों ने पढ़ी बाल कविताएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
27 साहित्यकारों ने पढ़ी बाल कविताएं
अमर उजाला, श्रीनगर
Updated Mon, 13 Jun 2016 11:01 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
श्री भुवनेश्वरी महिला आश्रम अंजनीसैंण में आयोजित राष्ट्रीय बाल साहित्य संगोष्ठी में बाल साहित्यकारों को सम्मानित किया गया। इस मौके पर देश के विभिन्न हिस्सों से आए साहित्यकारों को उत्तराखंड की संस्कृति से रू-ब-रू करवाते हुए प्रतीक चिन्ह भेंट किए गए।
विज्ञापन
अंजनीसैंण में संपन्न कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भगवती प्रसाद द्विवेदी ने चिंता जताते हुए कहा कि आज बाल साहित्य बच्चों तक नही पहुंच रहा है। इसके लिए चिंतन करने की जरूरत है। साहित्यकारों को बच्चों के मनोविज्ञान को समझते हुए बालसाहित्य की रचना करनी होगी। आकाशवाणी के सेवानिवृत्त सहायक निदेशक डॉ. हरि सिंह पाल ने कहा कि बच्चों को जो अधिकार मिलने चाहिए थे, वह नहीं मिल पा रहे हैं।
विज्ञापन
श्री राम कॉलेज दिल्ली के प्रोफेसर रवि शर्मा ने कहा शिक्षा का अधिकार सहित अन्य अधिनियमों में बाल अधिकार दिए गए हैं लेकिन यह कागजों में ही सिमट कर रह गए हैं। केंद्रीय विवि दिल्ली के अमरेंद्र सिंह ने कहा कि बाल साहित्य को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिल रही है। यह सुखद पक्ष है। उन्होंने स्कूली पाठ्यक्रम में नियोजित ढंग से बाल साहित्य पढ़ाए जाने पर जोर दिया।
विज्ञापन
तीन दिवसीय संगोष्ठी में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, बिहार, पंजाब, हरियाणा, बिहार, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के 69 बाल साहित्यकारों ने भाग लिया। इसमें 27 साहित्यकारों ने बाल रचनाएं सुनाईं।
किताब का हुआ विमोचन
समापन समारोह में नैनीताल की साहित्यकार विजयलक्ष्मी की पुस्तक सुनहरे फूल का विमोचन किया गया। संगोष्ठी में बालसाहित्य संस्थान अल्मोड़ा की ओर से समूचे देश से प्रकाशित दुर्लभ साठ बाल पत्रिकाओं की प्रदर्शनी विशेष आकर्षण रही। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ बाल साहित्यकार रमेशचंद्र ने की।